बार के डांसों या रैस्टोरैंटों के कैबरे डांसों की वकालत करना मुश्किल है जबकि ये बंद हालों में होते हैं. इस के उलट आजकल गांवों और कसबों में खुले में पंडाल लगा कर भड़काऊ नाच कराए जा रहे हैं.
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