सरस सलिल विशेष

दिल्ली के रामजस कालेज में एक सेमिनार में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों को आमंत्रित करने पर भारतीय जनता पार्टी की युवा शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने हंगामा खड़ा कर दिया है. सेमिनार के दिन विद्यार्थी परिषद ने जम कर आमंत्रित करने वाले छात्रों और उन के समर्थक अध्यापकों की धुनाई की. ये वे छात्र हैं जो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कन्हैया कुमार के साथ थे और दलितों और पिछड़ों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. परिषद इन आवाजों में से कश्मीर में सेना की ज्यादतियों पर ज्यादा आपत्ति कर रही है, क्योंकि विद्यार्थी परिषद का मानना है कि कट्टर हिंदू धर्म को बचाने के लिए कुछ भी करना जायज है.

जब रामजस कालेज में सेमिनार के लिए आमंत्रित करने वालों के समर्थन में कारगिल में शहीद कैप्टन मंदीप सिंह की बेटी गुरमेहर कौर खुल कर सामने आई तो एबीवीपी ने जम कर उसे मांबहन की गालियां देनी शुरू कर दीं और वे भूल गए कि वे ही औरतों को देवी मानने की झूठी मान्यताएं फैलाते रहते हैं. उन्होंने गुरमेहर कौर को देख लेने की धमकी दे डाली.

इस सब पर कोई आश्चर्य नहीं करना चाहिए. हमारे युवाओं को हिंदू संस्कृति में केवल मातापिता, गुरुओं, पंडों और पुजारियों के बीच बिना तर्कवितर्क मानने की शिक्षा दी जाती है. दुनिया का कोई भी धर्म असल में किसी तरह के सवालों की इजाजत नहीं देता तो यह हिंदू धर्म कैसे अलग हो सकता है? विद्यार्थी परिषद के छात्रों के लिए दंगा फैलाने का यह सुनहरा अवसर था, अब वे सरकार के खिलाफ तो बोल नहीं सकते, क्योंकि सरकार उन की अपनी है. वे ईरान व पाकिस्तान में धर्म के विरुद्ध किसी के कुछ बोलने पर हल्ला मचाने वालों का पूरा अनुसरण करते हुए हर पोल खोलने की बात को दबा देना चाहते हैं.

युवाओं से उम्मीद की जाती है कि वे खुद नया सोचें, दूसरों को भी नया सोचने के लिए कहें पर राजनीतिक व धार्मिक जहर इस तरह गहरी पैठ बना चुका है कि युवा खेमों में बंट गए हैं. कुछ को भगवा दिखता है तो कुछ को लाल. कुरेद कर नया ढूंढ़ने वाला खेमा गायब हो गया है. रामजस कालेज में हुआ हंगामा और उस पर मोदी सरकार की शाबाशी साबित करती है कि हर दिमाग पर धार्मिक परत चढ़नी जरूरी होने लगी है.