सरस सलिल विशेष

VIDEO : ये नया हेयरस्टाइल ट्राई किया आपने 

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

देश में ही नहीं, दुनियाभर में हवाई सेवाएं लोकप्रिय हो रही हैं. काश, ऐसा दिन आ जाए जब आप बिना प्रीबुक कराए, जैसे टैक्सी को हाथ हिला कर बुला सकते हैं, वैसे ही हवाई सेवा का उपयोग कर सकें. आजकल बड़ेबड़े हवाई अड्डे बनने लगे हैं जहां मीलों तक बाजारों व खानेपीने की दुकानों से गुजर कर पहुंचना पड़ता है. यह अड़चन हवाई सेवाओं का सुख छीन रही है.

विशाल हवाई अड्डों की जगह छोटे हवाई अड्डे और बड़े जहाजों की जगह छोटे हवाई जहाज शायद ज्यादा उपयोगी हों.

देश में दिल्ली और मुंबई के क्रमश: जेवर और नवी मुंबई में विशाल हवाई अड्डे बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जहां पहुंचने में दिल्ली और मुंबई वालों को घंटों सड़कों पर ट्रैफिक से जूझना पड़ेगा. फिर आजकल सुरक्षा के नाम पर मनमाने कंट्रोल होने लगे हैं. आधे घंटे पहले हवाई जहाज में चढ़ा दिया जाता है. उतरते वक्त मीलों चलना पड़ता है. बैगेज का इंतजार करना पड़ता है.

मस्तमौलाओं के लिए हवाई सेवाएं भी क्यों नहीं मस्तमौला हो सकतीं. चाहे 4 सीटर प्लेन हों या 400 सीटर, जब चाहो जैसे चाहो, बैठो और पहुंचो. भारीभरकम हवाई जहाज इसलिए चल रहे हैं क्योंकि हवाई कंपनियां इतनी बड़ी हो गई हैं कि वे छोटे हवाई जहाजों के उद्योग को पनपने ही नहीं दे रही हैं. जहां जमीनी वाहनों में 400-500 यात्रियों को ले जाने वाली ट्रेनों से ले कर 2 जनों तक ले जाने वाली बाइक हैं, वहीं हवाई सेवाओं में छोटे वाहनों की भारी किल्लत है. छोटे हवाई जहाज तो लक्जरी आइटम हैं और उन को चलाना व खरीदना नीरव और ललित मोदियों के बस का ही है, जो जनता का पैसा लूट सकते हैं. होना तो यह चाहिए कि जम कर रिसर्च हो कि आम लोगों को हवा में उड़ने लायक ज्यादा व आसान सुविधाएं कैसे दी जाएं.

विज्ञान आवश्यकता के अनुसार खोज कर लेता है. मोबाइल और कंप्यूटर कभी बेहद महंगे होते थे पर आज एकदम सस्ते हो गए हैं. इतने सस्ते कि सरकार समझने लगी है कि मोबाइल नंबर ही आदमी की पहचान बन गया है. ऐसा ही हवाई सेवाओं के क्षेत्र में होना चाहिए और किसी भी शहर के ऊपर हवाई जहाज वैसे ही उड़ते नजर आने चाहिए जैसे चीलकबूतर उड़ते नजर आते हैं. यह संभव भी है. बस, बड़ी कंपनियों का कंट्रोल तो हटे.