सरस सलिल विशेष

दिल्ली की एक निम्नमध्यम कालोनी में रह रहे बस ड्राइवर पति ने अपने बच्चों के सामने अपनी पत्नी की इसलिए हत्या कर डाली क्योंकि वह मायके से ससुराल जाने को मना कर रही थी.

10 साल के बेटे के बीचबचाव के बावजूद पति ने पत्नी पर चाकू से वार भी किए और फिर उस पर गैस सिलैंडर मार कर उस की जान ले ली.

पुलिस स्टेशन पहुंच कर भी उस का गुस्सा शांत न हुआ और जेल से बाहर आ कर वह ससुराल वालों व अपने बच्चों को मारने की धमकियां देता रहा.

पतिपत्नी विवाद में इस तरह की घटनाएं आम हैं. जिस पति के हुक्म को मानने में पत्नी को बेहद खुशी मिलती है और जिस पत्नी के चेहरे पर एक मुसकान देखने के लिए पति पहाड़ पर चढ़ जाता है वे पतिपत्नी एकदूसरे की जान के हत्यारे बन जाते हैं, यह नया नहीं है. सभ्यता ने साथ रहना सिखा दिया पर आमतौर पर पतिपत्नी में गंभीर विवाद अकसर होते रहे हैं.

पतिपत्नी में सौहार्द के अभाव का बड़ा कारण यह है कि इस संबंध में एक, अपने को दूसरे से श्रेष्ठ समझता है. दोनों एकदूसरे के पूरक हैं, यह बात समाज नहीं सिखा पाया है. विवाह को धर्म ने किसी काल्पनिक शक्ति का आदेश दे कर स्थिर करने की कोशिश की  पर उस ने धर्म के बिचौलियों को विवाह पर ज्यादा अधिकार दे दिए, विवाह को सुखद कम बनाया.

जब से तलाक के कानून बने हैं, तब से कम से कम दोनों को अलग होने के अधिकार तो मिल गए हैं. वह पति, जिस ने पत्नी की हत्या कर दी, अगर पत्नी से तलाक ले लिया होता, तो पत्नी पर हक न जता पाता. विवाह करना तो चुटकियों का काम है पर विवाह तोड़ना और तलाक लेना बड़ा महंगा व समय लगने वाला है. इसलाम का 3 तलाक का फार्मूला कुछ अच्छा था लेकिन एकतरफा होने की वजह से बेहद अनैतिक था.

अब जब दुनिया ने स्वीकार कर लिया है कि औरतें सब मामलों में बराबर के अधिकार रखती हैं और वे खुद अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं, तो इस तरह की हिंसा से बचने के लिए तलाक को आसान बनाया जाना चाहिए.

जैसे कहीं भी पंडित, पादरी या काजी के हाथों घंटों में विवाह हो सकते हैं, वैसे ही तलाक भी हो जाएं. विवाद हो तो बच्चों के संरक्षण का हो, संपत्ति के बंटवारे का हो. और पतिपत्नी, तलाक के बाद अपनाअपना जीवन मनमरजी से जी सकें.

ब्याह के साथ झट तलाक कहनेसुनने में चाहे बुरा लगे पर पतिपत्नी अदालतों में जूतेचप्पलें घिसते रहें, इस का कोई अर्थ नहीं है.