आया रामों और गया रामों के लिए मशहूर हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी इंडियन नैशनल लोकदल दो फाड़ हो गई है और एक तरफ पिता, जो जेल में हैं और अभय चौटाला हैं तो दूसरी ओर ओम प्रकाश चौटाला के ही दूसरे बेटे अजय चौटाला. दोनों ही पार्टियां लगता है दादा देवीलाल और पिता ओम प्रकाश चौटाला के नाम पर चुनाव में उतरेंगी और अपने पिट्ठुओं को कुछ न कुछ दिलाने की कोशिश करेंगी.

इस देश की राजनीति में टुकड़ेटुकड़े होने की आदत हमारी जाति और गोत्र व्यवस्था और संयुक्त परिवार की साझी मिल्कीयत की देन है. हर जना अपनी डेढ़ ईंट की मसजिद बना कर रहना चाहता?है और मजे की बात है कि महल के बजाय अपने दड़बे में ज्यादा खुश रहता है.

हमारी पार्टियों में फूट होती रहती है. किसी के पास राज करने के अलावा तो कुछ काम है नहीं. जनता को तो इस्तेमाल करते हैं. सब मिल कर जनता की मुसीबतों को कम करें या दूर करें यह गलतफहमी भी हमारे नेता नहीं पालते. जनता तो उन के लिए गुलाम है और हर कोई अपने गुलाम चाहता है, गुलामों के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं.

देवीलाल ने जाटोंयादवों को एक करने की कोशिश की थी पर अपने भले के लिए, उन्हें पट्टी पढ़ा काम करने लायक बना कर, उन की हैसियत बढ़ा कर, उन्हें खुशहाल बनाने के लिए नहीं. ओम प्रकाश चौटाला ने उन के बाद गद्दी संभाली और वही किया और अब ओम प्रकाश चौटाला के दोनों बेटे यही कर रहे हैं. अजय चौटाला और अभय चौटाला का झगड़ा गुलामों को बांटने पर है, गुलाम जनता की खुशहाली को ले कर नहीं है.

ऐसा ही कुछ नीतीश कुमार के राज्य बिहार में हो रहा है जहां बागी आवाजें उठ रही हैं. मायावती मुंह फुलाए घूम रही हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अपने गुलाम दलितों की अकेली मालकिन हैं और ये गुलाम उन्हीं के बने रहें किसी और पार्टी के निशान पर ठप्पा लगाने की आदत न हो उन में.

इन नेताओं को हारजीत से कोई मतलब नहीं होता. विधानसभा या लोकसभा के चुनावों में हारने के बाद भी उन की नेताजी वाली छवि बनी रहती है, इसीलिए शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव अलग हो गए हैं क्योंकि अखिलेश यादव अपनी चलाना चाहते हैं.

यह न सोचें कि भाजपा इस से मुक्त है. फर्क यह है कि भाजपा में नागपुर के अलावा सब गुलाम हैं नरेंद्र मोदी भी, अमित शाह भी. इन्होंने हिंदुत्व को मालिक मान लिया और सर संघ संचालक को प्रथम पुजारी, बाकी हाल यहां भी यही है. हिंदू गुलामी करते रहें, हिंदू गुलामों की हैसियत सुधरे या न सुधरे, कोई मतलब नहीं. इन सब दलों के लिए सत्ता जनता के लिए कुछ अपनी मरजी का करने का जरीया नहीं है, जनता से अपना काम करवाने के लिए है.

जय चौटाला, जय यादव, जय हिंदुत्व न बोलो, जयजय पावर बोलो.

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