सरस सलिल विशेष

अब से करीब 4 साल पहले बौलीवुड की एक फिल्म रिलीज हुई थी ‘स्पैशल 26’. नीरज पांडे द्वारा निर्देशित इस फिल्म की स्टोरी समाज में घट रही घटनाओं को छूती हुई थी. अभिनेता अक्षय कुमार (अजय सिंह), अनुपम खेर (पी.के. शर्मा), किशोर कदम (इकबाल), राजेश शर्मा (जोगिंदर) आदि का एक गैंग था. यह गैंग फरजी सीबीआई अधिकारी बन कर लोगों के यहां रेड डालता था और वहां से माल ले कर फुर्र हो जाता था. इस गैंग ने असली पुलिस की नींद हराम कर रखी थी.

स्पैशल 26 की तरह दिल्ली में भी नकली पुलिस वालों ने एक के बाद एक वारदातें कर के दिल्ली पुलिस की नाक में दम कर दिया था. दिल्ली में यह नकली पुलिस वाले कहीं रेड वगैरह तो नहीं डालते थे, पर सड़क चलते लोगों को ये इतनी आसानी से ठग लेते थे कि उन्हें ठगी का अहसास घर पहुंचने के बाद होता था. पिछले एक साल में फरजी पुलिस वालों का यह गैंग करीब 70-80 वारदातों को अंजाम दे चुका था. सभी वारदातों में ठगी का तरीका एक जैसा था.

5 मार्च, 2017 की बात है. शक्ति नागपाल विवेक विहार स्थित अपने घर से निकली और मेनरोड से रिक्शा पकड़ कर मैट्रो स्टेशन जा रही थी. वह अभी कुछ दूर ही गई थी कि उस के पास एक मोटरसाइकिल आ कर रुकी. उस पर 2 युवक सवार थे. उन की कदकाठी ठीकठाक थी. उन्होंने रिक्शा रुकवाते हुए शक्ति नागपाल से कहा, ‘‘हम दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच से हैं, आप को पता नहीं है कि कल यहां एक औरत की ज्वैलरी लूट ली गई थी. आप इस तरह ज्वैलरी पहन कर जाती हैं. और अगर आप के साथ कोई घटना हो जाती है तो परेशान पुलिस होगी.’’

यह सुन कर शक्ति नागपाल घबरा कर अंगुली में पहनी हीरे की अंगूठी और कलाई में पहनी सोने की चूडि़यों को देखने लगी. वह बोली, ‘‘मुझे तो बस यहीं कड़कड़डूमा मैट्रो स्टेशन तक जाना है.’’

‘‘देखिए मैडम, आप को जहां भी जाना है जाइए, लेकिन उस के पहले हिफाजत जरूरी है.’’ कह कर उस युवक ने सफेद रंग का एक कोरा कागज बैग से निकाल कर कहा, ‘‘आप अपनी सारी ज्वैलरी इस कागज पर रख दीजिए. इस में ज्वैलरी ले जाना आप के लिए सेफ रहेगा.’’

इस के बाद शक्ति नागपाल ने हाथों से सोने की चूडि़यां और हीरे की अंगूठी निकाल कर उस कागज पर रख दिया. वह व्यक्ति उस ज्वैलरी को कागज में लपेटते हुए उस से बात करने लगा. एकडेढ़ मिनट बाद उस ने कागज में लपेटी ज्वैलरी शक्ति नागपाल को देते हुए कहा, ‘‘मैडम, इस तरह से ज्वैलरी पहन कर मत निकला करो. आजकल जमाना बहुत खराब है. लो, अब इसे अपने पर्स में रख लो.’’

शक्ति नागपाल ने झट से कागज में लिपटी ज्वैलरी अपने पर्स में रखते हुए रिक्शे वाले से कहा, ‘‘चलो भैया, जल्दी चलो. देर हो रही है.’’

रिक्शा के आगे बढ़ते ही मोटरसाइकिल सवार युवक भी वहां से चले गए. शक्ति नागपाल उन पुलिस वालों का बारबार शुक्रिया अदा कर रही थी कि उन्होंने सही सलाह दी. साथ ही उस ने तय कर लिया कि अब वह हर समय आर्टिफिशियल ज्वैलरी ही पहना करेगी. असली ज्वैलरी का उपयोग किसी खास अवसर पर ही करेगी.

कड़कड़डूमा मैट्रो स्टेशन के पास पहुंच कर रिक्शे वाले को पैसे देने के बाद उस का मन अपनी ज्वैलरी देखने को हुआ. पर जैसे ही उस ने वह कागज खोला, उस के जैसे होश उड़ गए. उस कागज में उस की अपनी असली ज्वैलरी की जगह केवल आर्टिफिशियल चूडि़यां थीं.

शक्ति नागपाल को मैट्रो से जहां भी जाना था, वह वहां जाना भूल गई और तुरंत एक रिक्शा पकड़ कर उसी जगह पहुंच गई, जहां उसे पुलिस वाले मिले थे. लेकिन वे वहां नहीं मिले. शक्ति समझ गई कि उस के साथ ठगी की गई है. अब पुलिस में शिकायत करने के अलावा उस के पास कोई उपाय नहीं था.

इसी तरह 2 मार्च, 2017 को पूर्वोत्तर राज्य से एक दंपति करोलबाग आए. इसी तरह लुटेरों का भय दिखा कर मोटरसाइकिल सवार 2 युवकों ने खुद को दिल्ली पुलिस का बताया. उन्होंने विश्वास के लिए उस दंपति को पुलिस का आईडी कार्ड भी दिखाया. उन से भी उन्होंने एक सफेद कागज में हीरे की 2 अंगूठियां, सोने की 2 अंगूठियां, हीराजडि़त चूडि़यां, चेन रखवा लीं और हाथ की सफाई दिखाते हुए पलक झपकते ही दूसरे कागज में लिपटी आर्टिफिशियल ज्वैलरी पकड़ा कर उसे बैग में रखने को कहा.

इस के बाद वे वहां से चंपत हो गए. उस दंपति ने जब वह कागज खोल कर देखा तो उस में आर्टिफिशियल ज्वैलरी मिली. लाखों रुपए की ज्वैलरी ठगी जाने की उन्होंने भी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी.

ओल्ड राजेंद्रनगर के रहने वाले 75 साल के मखीजा जी शाम के समय घर से बाहर घूमने के लिए निकले. वह भी उन फरजी पुलिस वालों की साजिश का शिकार हो गए. इसी तरीके से मोटरसाइकिल सवार 2 युवक उन की सोने की अंगूठी, कड़ा और सोने की चेन ले कर चंपत हो गए.

करोलबाग में तो कई वारदातों में ठगों ने 2 करोड़ रुपए से ज्यादा के गहनों की ठगी की थी. एक साल के अंदर दिल्ली में इसी तरह की ठगी की 78 वारदातें हो चुकी थीं. इन में से 38 वारदातें तो केवल पश्चिमी जिले में हुई थीं. सभी वारदातों में ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का बताया था. वे नकली पुलिस वाले कभीकभी सफारी सूट में भी मिलते थे.

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पुलिस के नाम पर हो रही इस तरह की ठगी की वारदातों से लोगों का दिल्ली पुलिस से विश्वास उठता जा रहा था. इस से पुलिस की छवि भी खराब हो रही थी. पुलिस आयुक्त ने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने क्राइम ब्रांच के सभी सैक्शनों, समस्त जिलों के स्पैशल स्टाफ, एटीएस और यहां तक कि स्पैशल सेल को भी उन फरजी ठगों का पता लगाने के आदेश दिए.

पश्चिमी जिले में सब से ज्यादा 38 वारदातें इस तरह की ठगी की हुई थीं, इसलिए डीसीपी विजय कुमार ने अपने जिले के स्पैशल स्टाफ को इस काम पर पहले से ही लगा रखा था. एसीपी औपरेशन जगजीत सांगवान के नेतृत्व में स्पैशल स्टाफ की जो टीम इस मामले पर काम कर रही थी, उस में इंसपेक्टर सुरेंद्र संधू, एसआई संदीप डबास, सुमेर सिंह, एएसआई दिलबाग सिंह, दीपेंद्र सिंह, हैडकांस्टेबल रूपेश कुमार, विकास कुमार, नवीन कुमार, कांस्टेबल सनी, योगेश, प्रदीप कुमार, अमित कुमार आदि शामिल थे.

टीम के पास उन ठगों में से किसी का न तो फोटोग्राफ था और न ही कोई फोन नंबर, जिस के सहारे उन तक पहुंचा जा सके. जिन लोगों के साथ ठगी की वारदातें हुई थीं, उन से उन का हुलिया जरूर पता लग गया था. ठगों ने पश्चिमी दिल्ली में ज्यादातर बुजुर्ग महिलाओं को ही अपना निशाना बनाया था.

इलाके में जिन जगहों पर वारदातें हुई थीं, वहां आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देखी, पर सफलता नहीं मिली. पुलिस टीम काम में जुटी थी, उसी दौरान इलाके में ठगी की एक और वारदात हो गई. 9 अप्रैल, 2017 को जे-5 ब्लौक राजौरी गार्डन की रहने वाली 74 वर्षीया रमेश कुमारी अपने पति सुभाषचंद्र शर्मा के साथ रिक्शे में बैठ कर राजौरी गार्डन के ही जे-3 ब्लौक जा रही थीं.

उन का रिक्शा मेनरोड पर कुछ दूर ही आगे बढ़ा था कि आगे खड़े 2 लड़कों ने उन का रिक्शा रुकवा लिया. उन में से एक ने अपना आईडी कार्ड दिखाते हुए खुद को दिल्ली पुलिस का कांस्टेबल बताया.

उस ने कहा, ‘‘माताजी, आप इस तरह सोने की चूडि़यां और अंगूठी पहन कर जा रही हैं, आप को नहीं पता कि कल यहां पर एक बड़ी वारदात हो गई है. बदमाशों ने एक महिला की चूडि़यां व अन्य ज्वैलरी लूट ली थी. सामने हमारे एसएचओ साहब खडे़ हैं. अपनी सुरक्षा के लिए आप को क्या करना है, वह खुद बता देंगे.’’ कह कर वह उस बुजुर्ग महिला और उस के पति को 20-25 कदम दूर खड़े 2 व्यक्तियों के पास ले गए. वे दोनों सफारी सूट पहने थे.

रमेश कुमारी को देखते ही सफारी सूट पहने व्यक्ति ने कहा, ‘‘माताजी, आजकल जमाना इतना खराब चल रहा है और आप ये ज्वैलरी पहन कर जा रही हैं. अब रास्ते में आप के साथ कोई वारदात हो जाएगी तो लोग तो यही कहेंगे कि पुलिस सीनियर सिटिजंस का खयाल नहीं रख रही. वारदात को बढ़ावा तो आप लोग देते हैं.’’

वह व्यक्ति एक पुलिस अधिकारी की तरह ही बुजुर्ग रमेश कुमारी से बात कर रहा था. उसी दौरान सामने से एक और राहगीर आता दिखा. उस के दाहिने हाथ में काले रंग का एक बैग था और वह गले में सोने की मोटी चेन पहने था. सफारी सूट पहनने वाले उसी व्यक्ति ने उस राहगीर को पुलिसिया अंदाज में रोक कर उस से पूछा कि वह कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है?

वह राहगीर समझ गया कि ये पुलिस वाले हैं, इसलिए उस ने अपने बारे में बता दिया तो उस सफारी सूट वाले ने कहा, ‘‘तुम्हें पता नहीं कि इधर का माहौल काफी खराब चल रहा है और तुम गले में ये मोटी चेन पहन कर जा रहे हो. यहां स्नैचिंग की कई वारदातें हो चुकी हैं, इसलिए बेहतर यही होगा कि इसे उतार कर रख लो.’’

इतना कह कर उस आदमी ने अपनी डायरी में रखा सफेद कागज निकाल कर कहा, ‘‘चेन इस में रख कर इसे बैग में रख लेना.’’

वह राहगीर डर गया, उस ने गले से सोने की चेन उतार कर उस सफारी सूट वाले को दे दी, जो खुद को दिल्ली पुलिस  का एसएचओ बता रहा था. कागज में चेन लपेट कर उस ने उस राहगीर को दे दी. राहगीर ने उसे अपने बैग में रख लिया और वहां से चला गया. उस समय बुजुर्ग महिला रमेश कुमारी वहीं खड़ी थीं.

एसएचओ ने उन से भी कहा, ‘‘माताजी, आप भी अपनी ज्वैलरी इस कागज पर रख दो, सेफ रहेगी.’’

उस के कहने पर रमेश कुमारी ने अपने हाथों में पहनी सोने की चूडि़यां और अंगुली से सोने की अंगूठी निकाल कर उस सफेद कागज पर रख दी. उस के बाद उस पुलिस वाले ने वह ज्वैलरी लपेट कर सुरक्षित रहने के बारे में बताया और कागज में लपेटी ज्वैलरी थैले में रखने को कहा.

थैले में ज्वैलरी रखने के बाद रमेश कुमारी पति के साथ चली गईं. रास्ते भर वह उस पुलिस वाले की तारीफ पति से करती रहीं, जिस ने उन की सुरक्षा का इतना खयाल रखा था.

घर पहुंचने के बाद रमेश कुमारी ने थैले से कागज में लपेटी ज्वैलरी निकाल कर देखी तो होश उड़ गए. क्योंकि उस कागज में उन की ज्वैलरी की जगह आर्टिफिशियल चूडि़यां रखी थीं. वह फटाफाट घर से निकलीं और पति के साथ रिक्शे में बैठ कर उसी जगह पहुंची, जहां उन्हें पुलिस वाले मिले थे. पर उस समय वहां कोई नहीं मिला.

अब वह समझ गईं कि उन के साथ धोखा हुआ है, वे लोग कोई पुलिस वाले नहीं, बल्कि ठग थे. वह सीधे थाना राजौरी गार्डन पहुंची और थानाप्रभारी को अपने साथ घटी घटना से अवगत करा दिया.

थानाप्रभारी समझ गए कि उन शातिर ठगों ने इस बुजुर्ग महिला को भी अपना निशाना बनाया है. बहरहाल, उन्होंने रमेश कुमारी की तहरीर पर अज्ञात ठगों के खिलाफ भादंवि की धारा 420 के तहत मामला दर्ज कर जांच एसआई विक्रम सिंह के हवाले कर दी. यह घटना पश्चिमी जिले में ही घटित हुई थी, इसलिए इस की जानकारी जब स्पैशल स्टाफ टीम को हुई तो टीम और ज्यादा अलर्ट हो गई.

टीम ने रमेश कुमारी से उन ठगों के हुलिया आदि के बारे में पूछताछ की. उन का हुलिया और काम करने का तरीका पहले घटित हो चुकी घटनाओं से मेल खा रहा था. लेकिन दिल्ली में अलगअलग जगहों पर लगातार वारदातें करने वाले ये लोग हैं कौन, इस बात का पता नहीं लग रहा था. कहीं यह मेवाती गैंग का काम तो नहीं है.

वैसे मेवाती गैंग इस तरह की वारदातें करता नहीं था, फिर भी पुलिस टीम ने मेवाती गैंग के कुछ लोगों को भी पूछताछ के लिए उठाया. काफी पूछताछ के बाद जब लगा कि वे निर्दोष हैं तो उन्हें छोड़ दिया गया.

इंसपेक्टर सुरेंद्र संधू के लिए यह मामला किसी चुनौती से कम नहीं था. उन की टीम में एसआई संदीप डबास, सुमेर सिंह, एएसआई दिलबाग सिंह, दीपेंद्र सिंह जैसे तेजतर्रार पुलिस अधिकारी थे. ये सभी अपनेअपने स्तर से उन ठगों का पता लगाने में जुटे थे. इंसपेक्टर सुरेंद्र संधू ने टीम के सभी सदस्यों के साथ एक मीटिंग की. करीब 2 घंटे तक चली इस मीटिंग में विस्तार से विचारविमर्श किया गया.

मीटिंग के बाद पुलिस एक बार फिर से इसी केस में जुट गई. सभी ने अपनेअपने मुखबिरों को भी अलर्ट कर दिया. एक मुखबिर से एसआई संदीप डबास को सूचना मिली कि ईरानी गैंग इस तरह की वारदातें करता है. उन्होंने इस लीड के बारे में इंसपेक्टर सुरेंद्र संधू को बताया. इंसपेक्टर संधू इसी लीड पर काम करने को हरी झंडी दे दी. एसआई संदीप डबास और सुमेर सिंह ईरानी गिरोह के बारे में जानकारी जुटाने लगे.

जांच में पता चला कि इस गिरोह का ताल्लुक मुंबई के ठाणे जिले से है. इस बारे में मुंबई पुलिस से संपर्क किया गया तो जानकारी मिली कि ईरानी गैंग ने मुंबई पुलिस की नाक में दम कर रखा था. अंबीवली थाने में इस गैंग के खिलाफ अनेक मामले दर्ज हैं. मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस गैंग के 9 लोगों को सन 2015 में गिरफ्तार कर मकोका लगा कर जेल भेजा था. लेकिन गिरोह के सदस्य नासिर व जफर अब्बास अभी भी फरार हैं. मुंबई क्राइम ब्रांच ने यह भी बताया कि गैंग के फरार सदस्य दूसरे किसी शहर में हो सकते हैं. क्राइम ब्रांच दिल्ली पुलिस को ईरानी गैंग के बारे में जानकारी तो मिल गई, लेकिन फरार आरोपियों के कोई फोटोग्राफ वगैरह नहीं मिले.

दिल्ली में जिस तरीके से ठगी की वारदातें हो रही थीं, ठीक उसी तरह से ईरानी गैंग मुंबई में भी वारदातें करता था. मुंबई क्राइम ब्रांच पुलिस से मिली जानकारी के बाद इस बात की संभावना लगने लगी कि इन वारदातों में भी ईरानी गैंग का ही हाथ हो सकता है. पर यह पता नहीं लग पा रहा था कि यह सदस्य वारदात करने के बाद कहां चले जाते हैं. यानी वह दिल्ली में रह रहे हैं या एनसीआर में.

कभीकभी कुछ मामले पुलिस को उलझा देते हैं. इस मामले में पुलिस ने जो जांच की थी, उस से कुछ उम्मीद की किरण दिखाई तो दे रही थी, लेकिन अब समस्या यह हो गई थी कि जांच ऐसी जगह आ कर रुक गई थी, जहां से आगे बढ़ने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था. यदि ईरानी गैंग के नासिर या उस के साथी का कहीं से फोटो मिल जाता तो जांच आगे बढ़ने में मदद मिल सकती थी. पर स्पैशल स्टाफ टीम ने हिम्मत नहीं हारी. टीम अपने स्रोतों से मिल रही सूचनाओं पर काम करती रही.

उसी दौरान एक मुखबिर ने एसआई संदीप डबास को ऐसी सूचना दी कि टीम में शामिल सभी सदस्यों के चेहरे पर मुसकान तैर गई. उस ने बताया कि ईरानी गैंग के कुछ लोग दक्षिणपूर्वी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन के भोगल इलाके में रहते हैं. यह जानकारी बहुत महत्त्वपूर्ण थी. मुखबिर की सूचना के बाद पुलिस टीम ने जांच की तो पता चला कि मुंबई से भागा हुआ ईरानी गैंग का मुखिया नासिर उर्फ समीर अली भोगल इलाके में रहता है. यहां भी उस ने अपना एक गैंग बना रखा है. ये लोग मोटरसाइकिल और स्कूटी से वारदात के लिए निकलते हैं.

पुख्ता जानकारी मिलने के बाद स्पैशल स्टाफ टीम 14 अप्रैल, 2017 को भोगल में मसजिद लेन के पास मुस्तैद हो गई. दोपहर करीब 1 बजे मसजिद लेन पर 4 लोग आए. उन में से 2 मोटरसाइकिल पर और 2 स्कूटी पर थे. मुखबिर के इशारे पर पुलिस ने उन्हें घेर लिया. उन में से एक के पास एक बैग था. बैग की तलाशी ली गई तो उस में एक आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, कुछ आर्टिफिशियल ज्वैलरी और सफेद कागज मिले.

उन के पास जो टीवीएस कंपनी की जुपिटर स्कूटी और यामाहा मोटरसाइकिल थी, पुलिस ने उन के कागज दिखाने को कहा तो वे केवल मोटरसाइकिल के ही कागज दिखा पाए. पता चला कि वह स्कूटी चुराई हुई है.

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पूछताछ में उन्होंने अपने नाम नासिर हफीज खान उर्फ समीर अली, शाह जमन सैय्यद उर्फ आशु, बरकत अली और जफर अब्बास अमजद शेख बताए. ये सभी मूलरूप से महाराष्ट्र के कल्याण इलाके की ईरानी बस्ती के रहने वाले थे और भोगल में मसजिद लेन पर स्थित एक मकान में किराए पर रहते थे. पुलिस ने उन से लूट की वारदातों के बारे में सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया.

इस के बाद पुलिस उन सभी को स्पैशल स्टाफ औफिस ले गई. उन चारों ने स्वीकार किया कि उन्होंने दिल्ली के पश्चिमी जिले में ही नहीं, बल्कि और भी इलाकों में ठगी की वारदातों को अंजाम दिया था. ईरानी गैंग कौन है और ये लोग ठग कैसे बने, इस की एक अलग ही कहानी है.

बताया जाता है कि इन आरोपियों के पुरखे ईरान से ताल्लुक रखते थे. 15वीं और 16वीं सदी में गोलकुंडा के राजा ईरान के कुछ लोगों को बौडीगार्ड के तौर पर लाए थे. कदकाठी में लंबेतगड़े होने की वजह से ये राजा के बौडीगार्ड के रूप में तैनात रहते थे. रजवाड़े के बाद इन्होंने अपना ठिकाना मुंबई के ठाणे जिले में स्थित कल्याण क्षेत्र में बना लिया.

इन में से अनेक लोगों ने जरायम को अपना पेशा चुना. गैंग बना कर ये अपराध करने लगे. जिस से वहां पर ईरानी गैंग मशहूर हो गया. पिछले कुछ दिनों से इस गैंग ने फरजी पुलिसकर्मी बन कर राह चलते लोगों से ज्वैलरी ठगनी शुरू कर दी.

वहां जब ज्वैलरी ठगी की वारदातें बढ़ने लगीं तो पुलिस हरकत में आई. मुंबई क्राइम ब्रांच भी मामले की जांच करने लगी. सन 2015 में आखिर क्राइम ब्रांच ने ईरानी गैंग के 9 सदस्यों को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई. गैंग के 2 सदस्य नासिर और जफर अब्बास वहां से फरार हो गए.

ईरानी गैंग के जो 9 सदस्य क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किए थे, पुलिस ने उन्हें मकोका के तहत निरुद्ध कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. फरार नासिर और जफर अब्बास को अनेक संभावित जगहों पर तलाशा गया, पर उन का पता नहीं चल सका.

मुंबई से फरार होने के बाद नासिर और जफर अब्बास कुछ दिन तो इधरउधर घूमते रहे. उस के बाद वे दिल्ली चले आए. दिल्ली के भोगल इलाके में उन के कुछ जानकार रहते थे. वे भी उन के साथ रहने लगे. कहते हैं कि चोर चोरी भले ही छोड़ दे, पर हेराफेरी नहीं छोड़ता. यही हाल नासिर और जफर अब्बास का था. नासिर और जफर ने अपने साथियों शाहजमन उर्फ आशु और बरकत अली से बात की. ये दोनों भी मुंबई के कल्याण इलाके के अंबीवलि के रहने वाले थे.

फरजी पुलिस वाले बन कर राह चलते लोगों को इन्होंने ठगने की योजना बनाई. नासिर ने पुलिस का फरजी आईडी कार्ड बनवा रखा था. इस के अलावा उस ने एक प्रैस रिपोर्टर की भी फरजी आईडी बनवा रखी थी. ये चारों ऐसी सड़क पर खड़े हो जाते थे, जहां से पैदल और रिक्शे वाले गुजरते हों. इन में से 2 सफारी सूट पहने होते थे, जो खुद को पुलिस इंसपेक्टर बताते थे, जबकि 2 उन से कुछ दूर शिकार की तलाश में खड़े हो जाते थे.

ये अधिकतर ऐसी उम्रदराज महिलाओं को अपना शिकार बनाते थे, जो हाथों में या गले में सोने या हीरे की कोई ज्वैलरी पहने होती थीं. दोनों युवक खुद को पुलिस वाला बता कर शिकार के मन में डर पैदा करने के लिए कहते थे कि इस इलाके में ज्वैलरी लूट की घटना हुई है.

इस के बाद वे शिकार को अपने 2 अन्य साथियों के पास ले जाते थे. उन्हें वह अपना अधिकारी बताते थे. खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले गिरोह के ये सदस्य शिकार की ज्वैलरी उतरवा कर एक सफेद पेपर में रखने को कहते थे. उसी दौरान वे असली ज्वैलरी की जगह उसे नकली ज्वैलरी थमा देते थे. शिकार के वहां से जाते ही चारों फरार हो जाते थे. उस महिला को ठगी का तब पता चलता था, जब वह घर पहुंच कर अपने आभूषण देखती थी.

शिकार पर विश्वास जमाने के लिए कभीकभी गिरोह का एक सदस्य गले में सोने की चेन पहन कर उस समय सफारी सूट पहने हुए उधर से गुजरता था, जब वे किसी शिकार से बात कर रहे होते थे. फरजी एसएचओ बना उस का साथी उस सदस्य पर ऐसे रौब दिखाता था, जैसे वह असली एसएचओ हो. वह उस की चेन उतरवा कर कागज में रख कर दे देता था. इस से शिकार भी विश्वास में आ कर अपनी ज्वैलरी उतार देता था.

इस तरह इन लोगों ने दिल्ली के अलगअलग इलाकों में ठगी की वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया. नासिर शादीशुदा था, फिर भी उस ने भोगल इलाके की पिंकी नाम की एक लड़की से शादी कर ली थी. चुराई गई ज्वैलरी को बेचने की जिम्मेदारी पिंकी की थी. पूछताछ में इन्होंने बताया कि वे दिल्ली और एनसीआर में कितनी वारदातें कर चुके हैं, इस का उन्हें भी पता नहीं है.

पुलिस ने 15 अप्रैल, 2017 को चारों अभियुक्तों को तीसहजारी कोर्ट में महानगर दंडाधिकारी अजय कुमार मलिक की कोर्ट में पेश कर नासिर और आशु का 3 दिनों का पुलिस रिमांड मांगा. कोर्ट ने नासिर और आशु को 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर दे दिया तथा बरकत अली और जफर अब्बास को न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

पुलिस ने नासिर की निशानदेही पर भोगल रोड, जंगपुरा के ज्वैलर राहुल वर्मा को गिरफ्तार कर लिया. उस का सोनी ज्वैलर्स के नाम से ज्वैलरी शोरूम था. वह इन ठगों से ज्वैलरी खरीदता था. ज्वैलर राहुल से पुलिस ने सोने की एक अंगूठी बरामद की थी. वह अंगूठी वृद्ध महिला रमेश कुमारी से ठगी गई थी. राहुल वर्मा को भी पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

शातिर ठगों को गिरफ्तार करने की  सूचना दिल्ली पुलिस ने ठाणे जिले के कल्याण थाना पुलिस को दे दी थी. चूंकि कल्याण पुलिस को भी मकोका में वांछित नासिर और जफर अब्बास की तलाश थी, इसलिए खबर मिलते ही कल्याण थाने के एपीआई श्रीशैल शेट्टी और हैडकांस्टेबल सुनील जाधव दिल्ली पुलिस के स्पैशल स्टाफ औफिस पहुंच गए. लेकिन तब तक अभियुक्तों को जेल भेजा जा चुका था.

वे उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर ले जाना चाहते थे. पर दिल्ली के केसों की टीआईपी से पहले उन्हें उन का ट्रांजिट रिमांड नहीं मिला, लिहाजा कल्याण पुलिस को बैरंग लौटना पड़ा.

इन शातिर ठगों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम की डीसीपी विजय कुमार ने काफी सराहना की. मामले की तफ्तीश एसआई सुमेर सिंह कर रहे हैं.?

– कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित