सरस सलिल विशेष

जकिया चौहान 13 जून, 2017 को अपने घर पर ही थी. उस का घर जोधपुर शहर में चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सोसाइटी में था. यह सोसाइटी पुलिस थाने से करीब सौ मीटर की दूरी पर है. जकिया जिस मकान में रहती थी, उस के भूतल पर उस का ब्लैक मैजिक कैफे चलता था और पहली मंजिल पर वह रहती थी.

उस दिन शाम के समय उस के पास थानाप्रभारी कमलदान चारण का फोन आया. कमलदान चारण जोधपुर शहर के राजीव गांधी नगर के थानाप्रभारी थे. उन्होंने जकिया से कहा, ‘‘मैं आज शाम को आऊंगा, घर पर ही रहना, एंजौय करेंगे.’’

‘‘साहबजी, यह भी तो बता दो कि कितने बजे आओगे?’’ जकिया ने पूछा.

‘‘यही कोई 8-साढ़े 8 बजे तक आ जाऊंगा.’’ उन्होंने कहा.

‘‘ठीक है साहब, मैं इंतजार करूंगी.’’ कहते हुए जकिया के चेहरे पर कुटिल मुसकान उभर आई. थानाप्रभारी से बात खत्म होने के बाद जकिया ने तुरंत अपने मोबाइल से एक नंबर डायल किया. दूसरी ओर से फोन रिसीव किया गया तो उस ने कहा, ‘‘सरजी, मैं जकिया बोल रही हूं. उस थानाप्रभारी ने आज रात 8-साढ़े 8 बजे घर आने को कहा है. मुझे बड़ा डर लग रहा है.’’

‘‘तुम्हें घबराने की कोई जरूरत नहीं है. तुम बस इतना ध्यान रखना कि वह तुम से किसी बात पर नाराज न होने पाए.’’ दूसरी तरफ से कहा गया.

‘‘ठीक है सरजी.’’ कह कर जकिया ने फोन काट दिया.

इस के बाद जकिया सोच में डूब गई. उस ने गणपत को फोन किया. गणपत उस के ब्लैक मैजिक कैफे में काम करता था. उस समय वह कैफे में ही था, इसलिए 2 मिनट में ही पहली मंजिल पर पहुंच गया.

गणपत के आते ही जकिया ने कहा, ‘‘आज वह आशिक थानेदार आ रहा है. तुम सब चीजों का ध्यान रखना. किसी तरह की कोई गड़बड़ नहीं होनी चाहिए.’’

जकिया कमलदान चारण को थानेदार कहती थी. गणपत ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘मैडम, आप पूरी तरह बेफिक्र रहें. कोई गड़बड़ नहीं होगी. सारा काम ठीक तरीके से हो जाएगा.’’

अपनी बात कह कर गणपत कैफे में चला गया. जकिया अपने बैड पर लेट गई. लेटेलेटे वह थानेदार कमलदान चारण से करीब 10 दिनों से चल रही मुलाकातों और बातों के बारे में सोचती रही. फिर उस ने थानेदार द्वारा भेजे गए वाट्सऐप मैसेज को पढ़ा. मैसेज पढ़ कर उस की आंखों में गुस्सा तैर आया. लेकिन उस ने खुद को किसी तरह संयमित किया और उठ कर घर के छोटेमोटे काम निपटाने लगी.

रात करीब पौने 8 बजे गणपत जकिया के कमरे में आया. उस ने उसे सारी बातें समझा कर उसे पहली मंजिल पर ही अन्य कमरे में छिपा दिया. इस के बाद उस ने बैड पर फैला छोटामोटा सामान हटा कर ढंग से रख दिया. बैड की चादर करीने से बिछाई और कुरसी पर बैठ कर आशिक थानाप्रभारी का इंतजार करने लगी.

रात करीब साढ़े 8 बजे थानाप्रभारी कमलदान चारण का फोन आया, ‘‘जकिया डार्लिंग, मैं आ गया हूं.’’

‘‘ठीक है, सीढ़ी वाला गेट खुला हुआ है. आप सीधे पहली मंजिल पर आ जाइए.’’ जकिया ने कहा.

लगभग एक मिनट बाद थानाप्रभारी जकिया के कमरे में दाखिल हुए. आते ही उन्होंने दरवाजे की सिटकनी लगा दी. वह एकदम फ्री मूड में नजर आ रहे थे. उन्होंने टीशर्ट और जींस पहन रखी थी. उन्हें कमरे में रखी कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए जकिया ने कहा,‘‘आइए जनाब, हम आप का ही इंतजार कर रहे थे.’’

‘‘जानम, इंतजार तो हम आप का कर रहे थे.’’ थानेदार ने जकिया की हथेली अपने हाथों में ले कर कहा, ‘‘लेकिन कोई बात नहीं, इंतजार का भी अपना अलग ही मजा है. आखिर आज वह इंतजार खत्म हो जाएगा.’’

चारण ने जकिया का हाथ छोड़ कर कुरसी के बजाय बैड पर बैठते हुए कमरे में चारों ओर पुलिसिया नजरें दौड़ाईं. उस के बाद हंसते हुए कहा, ‘‘भई, इस कमरे में कोई कैमरा वगैरह तो नहीं लगा रखा?’’

‘‘थानेदार साहब, आप भी कैसी बातें करते हैं?’’ जकिया ने अपने चेहरे पर मधुर मुसकान बिखेरते हुए कहा, ‘‘मैं क्या आप को कोई चालबाज हसीना नजर आती हूं? इस कमरे में न तो कोई कैमरा लगा है और न ही कोई दूसरा आदमी है. यहां केवल आप हैं और मैं हूं.’’

‘‘ये हुई न बात,’’ चारण ने जकिया को अपने पास आने का इशारा करते हुए कहा, ‘‘जकिया, तुम सचमुच बड़ी समझदार हो.’’

‘‘साहबजी, मुझे इस जमाने ने समझदार बना दिया है, वरना मैं तो कहां दुनियादारी जानती थी.’’ जकिया ने कमलदान चारण को अपनी बातों में उलझाते हुए कहा, ‘‘इसी दुनियादारी के कारण मैं ने अपने पति को छुड़वाने के लिए आप को एक लाख रुपए नकद और एक लाख रुपए का चैक दे दिया था. अरे हां, आज आप मेरा वह एक लाख रुपए का चैक वापस करने वाले थे, उस का क्या हुआ?’’

कमलदान चारण ने जेब से चैक निकाल कर जकिया को दिखाते हुए कहा, ‘‘देखो, चैक तो मैं ले आया हूं. लेकिन यह चैक दूंगा तभी, जब तुम मुझे खुश कर दोगी.’’

जकिया ने खुद को उस की गिरफ्त से छुड़ाते हुए कहा, ‘‘साहब, ऐसी भी क्या जल्दी है. इतनी गरमी में आए हो, पहले कुछ ठंडा या गरम पी लो. बताओ, क्या लोगे, कोल्ड कौफी या हौट कौफी?’’

‘‘हौट तो तुम हो ही,’’ थानेदार ने जकिया की कमसिन देह को ललचाई नजरों से देखते हुए कहा, ‘‘तुम कह रही हो तो कोल्ड कौफी पी लेंगे. और हां, तुम्हारे कैफे में तो हुक्का बार भी चलता है. आज किसी अच्छे से फ्लेवर का हुक्का पिला दो तो तुम्हारे साथ का मजा दोगुना हो जाएगा.’’

‘‘साहबजी, हुक्का आप को फिर कभी पिलवा दूंगी.’’ जकिया ने कहा, ‘‘आज तो आप कोल्ड कौफी से ही काम चला लीजिए.’’

कह कर जकिया ने अपने मोबाइल फोन से एक नंबर डायल किया. दूसरी तरफ से फोन रिसीव किया गया तो जकिया ने कहा, ‘‘2 कोल्ड कौफी भेज दो.’’

कमलदान चारण जकिया को अपनी बांहों में लेने को बेचैन था. जकिया उस की बेचैनी को समझ रही थी. उस ने जकिया का हाथ थामा तो उस ने कहा, ‘‘थोड़ा सब्र कीजिए साहब, वेटर कौफी ले कर आता होगा, पहले कौफी तो पी लें.’’

तभी किसी ने दरवाजा खटखटाया तो जकिया ने कहा, ‘‘शायद कौफी ले कर आ गया.’’

जकिया दरवाजा खोलने के लिए उठी. उस ने जैसे ही दरवाजा खोला, 4-5 हट्टेकट्टे आदमी सीधे कमरे में घुस आए. उन में से एक अधेड़ उम्र के आदमी ने बैड पर बैठे थानाप्रभारी कमलदान चारण से कहा, ‘‘हम भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से हैं.’’

एसीबी की टीम को देख कर कमलदान चारण के मन में छाई सारी उमंगें और रंगीनियां पलभर में गायब हो गईं. उस के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. वह समझ नहीं पाया कि अचानक यह सब कैसे हो गया?

जकिया ने कहा, ‘‘यही है वह थानेदार, जो मेरी अस्मत लूटने मेरे घर पर आया है.’’

एसीबी की टीम अपने काम में जुट गई. थानाप्रभारी कमलदान चारण की तलाशी में टीम को एक लाख रुपए का वह चैक मिल गया, जो जकिया ने दिया था. टीम ने कमलदान चारण को गिरफ्तार कर लिया. देर रात तक एसीबी की टीम जकिया के घर फर्द बनाने और जब्ती वगैरह की काररवाई में लगी रही.

थानाप्रभारी कमलदान चारण से की गई पूछताछ और एसीबी की जांचपड़ताल में जो कहानी प्रकाश में आई, वह इस प्रकार थी.

इसी साल 3 जून को थाना राजीव गांधी नगर के थानाप्रभारी कमलदान चारण ने मुखबिर की सूचना पर पंकज वैष्णव और गणपत बिश्नोई को एक किलोग्राम अफीम ले जाते हुए गिरफ्तार किया था. पंकज वैष्णव जकिया का पति था. वह अफीम ये लोग होंडा सीआरवी कार में रख कर ले जा रहे थे.

थाने ले जा कर दोनों से पूछताछ की गई तो गणपत ने खुद को इंजीनियरिंग का छात्र बताया और छोड़ देने की गुहार लगाई. थानाप्रभारी ने गणपत के घर वालों को थाने बुला लिया. बाद में सौदेबाजी कर के उस ने गणपत को छोड़ दिया.

पंकज वैष्णव ने बताया कि होंडा सीआरवी कार उस की पत्नी जकिया चौहान की है. इस के बाद थानाप्रभारी ने जकिया को थाने बुला लिया. जकिया कमलदान चारण से अपने पति पंकज को छोड़ देने की सिफारिश करने लगी.

कमलदान चारण ने कहा कि उस के पास से एक किलोग्राम अफीम मिली है, इसलिए इसे जेल जाना ही पड़ेगा, साथ ही केस चलने तक कार भी नहीं छोड़ी जाएगी.

जकिया ने पुलिस के एक दलाल से बात की तो उस के कहने पर थानाप्रभारी इस बात पर सहमत हो गए कि कार को मुकदमे में नहीं दिखाएंगे, लेकिन इस के लिए 2 लाख रुपए खर्च करने होंगे. जकिया ने कहा कि उस के पास इतनी रकम नहीं है तो बिचौलिए ने कहा कि थानाप्रभारी इस से कम में नहीं मानेगा. परेशान हो कर जकिया ने किसी तरह एक लाख रुपए का इंतजाम किया. 1 लाख रुपए नकद और एक लाख रुपए का चैक जकिया ने बिचौलिए के जरिए थानाप्रभारी कमलदान चारण को दे दिए.

थानेदार ने वह चैक इस शर्त पर लिया था कि एक लाख रुपए नकद देने के बाद वह उसे वह चैक लौटा देगा. थानाप्रभारी ने पंकज कुमार वैष्णव और गणपत बिश्नोई को कार में एक किलोग्राम अफीम के साथ पकड़ा था. पर रिश्वत में मोटी रकम मिलने के बाद उस ने गणपत और होंडा सीआरवी कार को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया था. उस ने 3 जून, 2017 को केवल पंकज कुमार वैष्णव के खिलाफ ही राजीवगांधी नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया.

आमतौर पर एनडीपीएस एक्ट के मामले की जांच एसीपी द्वारा दूसरे थाने के समकक्ष अधिकारी को दी जाती है. लेकिन कमलदान चारण ने एसीपी (प्रतापनगर) स्वाति शर्मा को ऐसी पट्टी पढ़ाई कि उन्होंने इस मामले की जांच राजीव गांधी नगर थाने के ही एसआई को सौंप दी. इस की वजह यह थी कि पहली ही मुलाकात में कमलदान जकिया चौहान की खूबसूरती पर मर मिटा था.

इस के लिए उस ने जकिया से वादा भी किया था कि वह इस मामले में उस के पति को छुड़वाने की हरसंभव कोशिश करेगा. जकिया से बातें करने के लिए उस ने उस का मोबाइल नंबर ले लिया था.

कार भले ही छूट गई थी, लेकिन जकिया का पति पंकज जेल में बंद था. जकिया उसे जल्द से जल्द छुड़ाना चाहती थी. परेशानी यह थी कि एनडीपीएस एक्ट के मामले में जल्दी से जमानत नहीं होती. फिर पंकज के पास पुलिस ने एक किलोग्राम अफीम दिखाई थी.

कानून के जानकारों का कहना था कि 250 ग्राम तक अफीम बरामद होने पर सजा का प्रावधान कम है, लेकिन कौमर्शियल क्वालिटी की ज्यादा मात्रा में बरामद अफीम के मामले में 10 से 20 साल तक की सजा का प्रावधान है. इसी कारण जकिया चिंतित थी. वह पंकज की जल्द से जल्द जमानत कराने की कोशिश में जुटी थी. इस के लिए वह कभी कमलदान चारण को फोन करती तो कभी थाने जा कर उस से जमानत में मदद करने की गुहार लगाती.

कमलदान चारण जकिया की इस मजबूरी का फायदा उठाना चाहता था. वह जकिया को हासिल करने की कोशिश करने लगा. उस ने जकिया से यह भी कह दिया कि वह पंकज से बरामद अफीम की मात्रा 200 ग्राम दिखा देगा, जिस से उस की जमानत जल्द हो जाएगी.

पंकज को जेल भेजने के एकदो दिन बाद ही कमलदान चारण जकिया से प्यारमोहब्बत की बातें करने लगा. वह उसे वाट्सऐप पर ‘आई लव यू’ के अलावा तरहतरह के मैसेज भेजने लगा. वह जकिया की खूबसूरती की तारीफें करता और कहता कि पति को छुड़वाने के लिए उसे कुछ तो कंप्रोमाइज करना ही पड़ेगा.

सरस सलिल विशेष

उस की इस तरह की बातों से जकिया समझ गई कि उस की नीयत ठीक नहीं है. उस की बातों से वह डर गई. उस का दिन का चैन और रातों की नींद उड़ गई. उस का मन तो कर रहा था कि वह उस के सामने जा कर सीधे उस के गाल पर चांटा जड़ दे. पर वह ऐसा नहीं कर सकती थी.

वह कमलदान चारण को सबक सिखाने के बारे में सोचने लगी. एक तरफ पति की चिंता थी और दूसरी तरफ अस्मत बचाने का संघर्ष. वह चाहती थी कि चारण को ऐसा सबक मिले कि वह जिंदगी भर याद रखे. इस के लिए उस ने अपने कैफे में काम करने वाले सब से विश्वासपात्र गणपत बिश्नोई को कमलदान की गलत नीयत की बात बताई.

गणपत को पता था कि थानाप्रभारी ने उसे अफीम के मामले में छोड़ने के लिए घर वालों से मोटी रकम ली थी. इसलिए वह भी उसे सबक सिखाना चाहता था. उस ने अपने परिचित एसीबी के एक अधिकारी से बात की. उस की सलाह पर जकिया ने 9 जून, 2017 को एसीबी में थानाप्रभारी कमलदान चारण के खिलाफ रिश्वत और अस्मत मांगने की शिकायत कर दी.

एसीबी ने उसी दिन शिकायत का सत्यापन कराया. इस सत्यापन में जकिया और थानाप्रभारी कमलदान चारण की कार में बैठ कर की गई सौदेबाजी की सारी बातें रिकौर्ड की गईं. कमलदान जकिया से कह रहा था, ‘मुझे तुम से दोस्ती और प्यार हो गया है. इसलिए तुम ने जो एक लाख रुपए का चैक दिया है, उसे मैं वापस कर दूंगा.’ जकिया ने ये सारी बातें रिकौर्ड कर ली थीं. इस बातचीत में चारण ने यह भी कहा था कि वह 10 से 12 जून तक गांव जाने की वजह से छुट्टी पर रहेगा. गांव से लौटने पर वह उस के पास एंजौय करने आएगा.

गांव जाने के बाद भी कमलदान चारण जकिया से मोबाइल पर संपर्क में रहा. इस बीच वह वाट्सऐप पर मैसेज भी भेजता रहा. वह 12 जून, 2017 की शाम को जोधपुर लौट आया. जोधपुर लौटने पर उस ने 12 जून की शाम को जकिया को फोन कर के नई सड़क स्थित एक होटल में बुलाया. जकिया ने मां की बीमारी का बहाना बना कर उस दिन उसे टाल दिया.

अगले दिन यानी 13 जून को कमलदान चारण ने जकिया को फोन कर के शाम को उस के घर आने की बात कही तो जकिया ने एसीबी को सूचित कर दिया. एसीबी अधिकारियों ने शाम होते ही जकिया के घर के आसपास डेरा डाल दिया. एसीबी के डीएसपी जगदीश सोनी ने जकिया को पहले ही समझा दिया था कि थानाप्रभारी कमरे में आ कर गलत हरकत करने की कोशिश करने लगे तो वह कोल्ड कौफी मंगाने के बहाने फोन कर देगी. जकिया ने ऐसा ही किया, जिस के बाद एसीबी द्वारा वह गिरफ्तार कर लिया गया.

थानाप्रभारी की गिरफ्तारी से जोधपुर पुलिस की बड़ी बदनामी हुई. जोधपुर पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ ने इस पूरे मामले की जांच बोरानाड़ा के एसीपी सिमरथाराम को सौंप दी. वहीं पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर डीसीपी (पश्चिम) समीर कुमार सिंह ने थानाप्रभारी कमलदान चारण को 14 जून को निलंबित कर दिया. एसीबी ने उसी दिन शाम को कमलदान चारण को मजिस्ट्रैट के घर पर पेश किया. न्यायाधीश ने चारण को 2 दिनों के रिमांड पर एसीबी को सौंप दिया.

रिमांड के दौरान एसीबी ने एक लाख रुपए के चैक के बारे में पूछताछ की तो कमलदान चारण ने कहा कि उस के पास कोई चैक नहीं था. एक लाख रुपए नकद लेने की बात से भी उस ने इनकार कर दिया. प्यार और दोस्ती के सवाल पर उन्होंने कहा कि वह उस महिला से प्रेम नहीं करता, बल्कि वही उसे फंसा रही थी.

एसीबी ने जब उसे रिकौर्डिंग सुनाई तो उस ने कहा कि यह आवाज उस की नहीं है. कमलदान चारण ने एसीबी को बताया कि जब उन्होंने 3 जून को उस महिला के पति पंकज को अफीम के साथ गिरफ्तार किया था, तब से वह रोजाना थाने आ कर रोती थी. पति के जेल जाने के बाद वह खुद को बेसहारा बता कर बारबार मदद की गुहार लगाती थी. जिस से उसे उस पर तरस आ गया और यही उस की गलती थी.

उस औरत ने आंसुओं की आड़ में उसे हनीट्रैप में फंसाया. वह तो उसे दिलासा दे कर सहारा देने की कोशिश कर रहा था. अफीम वाले मामले में और भी कई लोगों के नाम आने की संभावना है, इसी वजह से उस ने उन के खिलाफ यह साजिश रची.

जोधपुर पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ ने चारण की गिरफ्तारी को एक सबक बताया. उन्होंने 15 जून को जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के सभी अधिकारियों व थानाप्रभारियों को एक पत्र लिख कर कहा है कि ईमानदारी व ड्यूटी में कमी बरदाश्त नहीं होगी. पत्र में लिखा गया है कि इस घटना से पुलिस की प्रतिष्ठा पर आंच आई है, लेकिन अच्छी बात यह है कि गंदगी बाहर हो गई.

एसीबी ने रिमांड अवधि पूरी होने पर कमलदान चारण को 16 जून को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया.

बाद में पुलिस ने नए सिरे से जांच कर के 19 जून, 2017 की देर रात को गणपत बिश्नोई को अफीम की तस्करी के मामले में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उसे 4 दिनों के रिमांड पर लिया. पुलिस ने जकिया की वह कार भी जब्त कर ली है, जिसे छोड़ने के लिए जकिया ने कमलदान चारण को रिश्वत दी थी.

22 जून को पुलिस ने निलंबित थानाप्रभारी कमलदान चारण को भी अफीम तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया है. उसे पहले जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लिया गया. थाने में पूछताछ और गिरफ्तार आरोपी गणपत बिश्नोई से क्रौस एग्जामिनेशन के बाद उसे गिरफ्तार किया गया.

कमलदान चारण अफीम तस्करी के उस मामले में गिरफ्तार हुआ, जिस में वह परिवादी था. यानी परिवादी ही आरोपी बन गया. उसे एनडीपीएस एक्ट के सेक्शन 59 के तहत गिरफ्तार किया गया है. यह धारा एन्फोर्समेंट एजेंसियों के लिए बनी हैं. जो अफसर अपनी ड्यूटी भूल कर अवैध गतिविधियों में लिप्त हो जाता है और आरोपियों को बचाने का प्रयास करता है, उसे इस सेक्शन के तहत गिरफ्तार किया जाता है. इस सेक्शन में जमानत मिलने के आसार बहुत कम होते हैं. इस धारा में न्यूनतम सजा 10 साल और अधिकतम 20 साल है. अब बात करें जकिया चौहान की. जकिया जोधपुर की रहने वाली है. वह 29 सितंबर, 2008 को जोधपुर से अचानक गायब हो गई थी.

उसी साल 4 अक्तूबर को उस के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था. बाद में वह दिसंबर में लौट आई थी. तब उस ने कहा था कि वह अपनी मरजी से गई थी. उस समय जकिया की एक युवक से दोस्ती की बात सामने आई थी.

बाद में सन 2009 में उस ने जोधपुर के नामी कांट्रैक्टर के बेटे साहिल से निकाह कर लिया था. साहिल से जकिया को एक बेटा हुआ. बेटा इस समय 7 साल का है. कुछ समय बाद साहिल और जकिया में विवाद होने लगा. यह विवाद इतना बढ़ गया कि करीब 7-8 महीने पहले दोनों में तलाक हो गया.

तलाक होने पर साहिल ने जकिया को कुछ रकम दी. जकिया ने उन पैसों से ब्लैक मैजिक कैफे शुरू किया. कहा जाता है कि इस कैफे में हुक्का बार भी चलता है. जोधपुर  में अन्य हुक्का बार पर पुलिस ने कई बार काररवाई की, लेकिन जकिया के हुक्का बार पर कभी काररवाई नहीं हुई.

पंकज वैष्णव मूलरूप से फलौदी का रहने वाला है. जोधपुर के रातनाड़ा में उस का मकान है. वह कपड़े का काम करता था. जकिया से जानपहचान हुई तो दोनों ने विवाह कर लिया. गणपत बिश्नोई फींच के पास रोहिचा का रहने वाला है. वह बीटेक कर रहा है. गणपत जकिया के ब्लैक मैजिक कैफे में काम करता था.

यह बात भी सामने आई है कि गणपत जकिया का दोस्त था और जकिया उसे बचाना चाहती थी. गणपत का पिता ओमाराम बिश्नोई अफीम का धंधा करता था. उस के खिलाफ अफीम तस्करी के 3 मामले दर्ज हैं. गणपत ही अपने गांव से अफीम लाया था.

वह पंकज के साथ कार में सवार हो कर अफीम बेचने जा रहा था. वह जिसे अफीम बेचने जा रहा था, उसी ने मुखबिरी कर दोनों को पकड़वा दिया. वह ग्राहक हिस्ट्रीशीटर था और बाद में चारण का मुखबिर बन गया था.

अफीम तस्करी में पुलिस ने जो कार जब्त की है, जकिया ने वह कार अपने धर्मभाई की बताई थी. पुलिस की जांच में पता चला कि 15 लाख रुपए की यह कार जकिया ने ही खरीदी थी और उस की किस्तें भी वह खुद ही चुका रही थी. साहिल ने इस कार का एक दिन भी उपयोग नहीं किया था. अफीम तस्करी के मामले का पता चलने पर साहिल ने जकिया से इस बात पर झगड़ा भी किया था.

बहरहाल, इस मामले में पूर्व थानाप्रभारी कमलदान चारण, पंकज वैष्णव और गणपत बिश्नोई जेल पहुंच गए हैं.

जहां चारण को यह मामला उलटा पड़ गया, वहीं जकिया ने भी जिस कार को छुड़ाने के लिए एक लाख रुपए की रिश्वत दी, वह कार जब्त हो गई. जकिया का आरोप है कि उस के पति पंकज वैष्णव को पुलिस ने अफीम के झूठे मामले में फंसाया है.

– कथा पुलिस सूत्रों व अन्य रिपोर्ट्स पर आधारित

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