सरस सलिल विशेष

बिहार के गया शहर में वह मास्टर बन कर रह रहा था. पहले उस ने एक स्कूल में नौकरी की, उस के बाद वह प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाने लगा. उस ने पुलिस और लोकल लोगों को झांसा देने के लिए अपना नाम और पहचान बदल ली थी. उस ने अपना नाम अतीक रख लिया था, जबकि उस का असली नाम तौसिफ खान था. अतीक साल 2008 में अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों का आरोपी था. पिछले 9 सालों से वह गया में अपना हुलिया बदल कर रह रहा था.

13 सितंबर, 2017 को बिहार के गया जिले में दबोचे गए 3 आतंकियों में से एक की पहचान तौसिफ खान के रूप में हुई, तो पुलिस और खुफिया महकमे के होश उड़ गए. उस ने खुलासा किया कि गया शहर के 3 खास इलाकों विष्णुपद मंदिर के पितृपक्ष मेले का इलाका, महाबोधि मंदिर और गया रेलवे जंक्शन पर बम धमाका करने की साजिश रची गई थी.

गौरतलब है कि जिस समय तौसिफ खान ने धमाके की साजिश रची, उस समय गया में 15 दिनों का पितृपक्ष मेला लगा हुआ था. इस में देशविदेश के लाखों लोग पिंडदान करने के लिए गया पहुंचते हैं.

तौसिफ खान साइबर कैफे के एक संचालक की मुस्तैदी से पुलिस के हत्थे चढ़ गया. वह रोजाना साइबर कैफे से ईमेल के जरीए सारी जानकारी अपने आका को भेजता था.

पुलिस ने कैफे से वह कंप्यूटर जब्त कर लिया है, जिस से वह किसी चांद नाम के आदमी को ईमेल भेजता था. गया के एसएसपी ने बताया कि 3 और संदिग्धों को पकड़ा गया है, जिन से पूछताछ के बाद तौसिफ खान के आतंकी होने की बात पक्की हो गई है. पुलिस ने बताया कि साइबर कैफे संचालक अनुराग को तौसिफ खान की हरकतें ठीक नहीं लगी थीं, तो उस ने तौसिफ खान से पहचानपत्र मांगा. जब उस ने पहचानपत्र नहीं दिया, तो अनुराग ने पुलिस को सूचना दी. उस के बाद तौसिफ खान और उस के साथी भागने लगे.

अनुराग ने उन का पीछा किया, तो वे उसे धक्का दे कर आटोरिकशा में सवार हो गए. उसी समय सामने से पुलिस की गाड़ी आ रही थी. अनुराग ने पुलिस वालों को आटोरिकशा रुकवाने का इशारा किया. पुलिस ने आटोरिकशा रोका और उस में सवार तौसिफ खान और उस के साथी सना खान और गुलाम सरवर को पकड़ा.

35 साल के तौसिफ खान उर्फ अतीक का पता अहमदाबाद के जूहापुरा इलाके का यूनाइटेड अपार्टमैंट्स का फ्लैट नंबर-15ए है. वह इंडियन मुजाहिदीन का फं्रटलाइन आतंकी है. इलैक्ट्रोनिक्स ऐंड कम्यूनिकेशन से इंजीनियरिंग की डिगरी लेने के बाद उस ने आतंक की दुनिया में कदम रख दिया था. उस ने महाराष्ट्र के नंदूरबाग के डीएन पाटिल इंजीनियरिंग कालेज से साल 2001-05 में बीटैक किया था.

अहमदाबाद में बम धमाकों को अंजाम देने के बाद तौसिफ खान साल 2008 में गया आ गया था. 26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद में 90 मिनट के अंदर एक के बाद एक 16 बम धमाके किए गए थे, जिन में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 2 सौ से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे.

तौसिफ खान गया जिले के डोभी थाने के करमौनी गांव में रह रहा था और पहचान छिपाने के लिए उस ने अपना नाम अतीक रख लिया था. उस ने स्थानीय सना खान की मदद से मुमताज पब्लिक हाईस्कूल में टीचर की नौकरी हासिल कर ली थी. वह विज्ञान और गणित पढ़ाया करता था.

3 साल तक स्कूल में पढ़ाने के बाद तौसिफ खान ने नौकरी छोड़ दी और प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाने लगा. गिरफ्तारी के बाद उस ने कबूल किया कि वह आईएसआई के प्रचार का काम कर रहा था. पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि वह कितने बच्चों के दिमाग में आतंक का कीड़ा डाल चुका है. उस के पाकिस्तान कनैक्शन की भी खोज की जा रही है.

तौसिफ खान से पूछताछ के बाद कई खुलासे हुए हैं. उस के घर से पाकिस्तान के लाहौर में प्रिंट कराई गई किताबें और जिहादी परचे बरामद हुए हैं. पुलिस को शक है कि उस ने गया में 50 जिहादियों को तैयार कर दिया है, जिस में से ज्यादातर 14 साल से 16 साल की उम्र के लड़के हैं.

तौसिफ खान ने किनकिन बच्चों को पढ़ाने के नाम पर जिहाद की घुट्टी पिलाई है, इस की भी जांच की जा रही है. गया में रहने के दौरान तौसिफ खान कई दफा राजस्थान और मुंबई गया था. पुलिस और एटीएस उस की इन यात्राओं के मकसद का पता लगा रही है. साल 2016 और साल 2017 में वह 2 बार राजस्थान गया था. उस के पास मुंबई जाने का टिकट भी मिला है.

तौसिफ खान के साथ दबोचा गया गुलाम सरवर खान बोधगया ब्लौक के बारा पंचायत के प्राथमिक निमहर विद्यालय का प्रभारी है. स्कूल के बच्चों ने पुलिस को बताया कि गुलाम सरवर खान हफ्ते में 2-3 दिन ही स्कूल आता था. साल 2006 में उस की बहाली पंचायत शिक्षक के रूप में हुई थी.

पुलिस जब गुलाम सरवर खान को गिरफ्तार कर ले जा रही थी, तो गांव वालों ने विरोध किया. पुलिस के काफी समझानेबुझाने के बाद ही गांव वाले शांत हुए. गया की एसएसपी गरिमा मलिक ने बताया कि तौसिफ खान पर पुलिस ने देशद्रोह का केस दर्ज किया है और उस के साथ पकड़े गए उस के 2 साथियों पर उसे संरक्षण देने का आरोप लगा है. उस के पास से मिले कागजात, पैनड्राइव और मोबाइल डाटा से देशद्रोह की गतिविधियों में शामिल होने के ठोस सुबूत मिल चुके हैं.

गुजरात की एटीएस टीम ने 15 सितंबर, 2017 को उस से पूछताछ की. गया के सिविल लाइन थाने में तीनों के खिलाफ केस (नंबर-277/2017) दर्ज कराया गया है. गया पुलिस की रिमांड की सीमा खत्म होने के बाद गुजरात एटीएस उन्हें रिमांड पर ले लेगी.

वहीं पुलिस सूत्रों की मानें, तो तौसिफ खान ने अहमदाबाद बम धमाकों में खुद के शामिल होने की बात को कबूल कर लिया है. पटना एटीएस, एसटीएफ और गया पुलिस अफसरों को पहले वह झांसा देने की कोशिश करता रहा. पहले तो वह आतंकी होने से ही इनकार करता रहा, उस के बाद उस ने माना कि अहमदाबाद बम धमाकों में संदिग्धों की लिस्ट में उस का नाम आने के बाद गिरफ्तारी के डर से वह वहां से भाग निकला था.

15 सितंबर की रात गुजरात एटीएस की टीम गया पहुंची और उस से पूछताछ की. एटीएस टीम ने बम धमाके के दूसरे आरोपियों के साथ उस का फोटो दिखाया, तो उस के होश उड़ गए. चारों ओर से खुद को फंसा देख कर आखिर तौसिफ खान ने हार मान ली.

गुजरात एटीएस की पूछताछ के बाद तौसिफ खान ने माना कि वह सिमी का हार्डकोर सदस्य है. वह 24 आतंकी मामलों में वांटेड था. वह मूल रूप से महाराष्ट्र के जलगांव का रहने वाला है.

सिमी का सदस्य बनने के बाद उसे ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भी भेजा गया था. पाकिस्तान में उस ने बम धमाके की ट्रेनिंग ली थी. इंजीनियर और तेज दिमाग का होने की वजह से उस ने बड़े आतंकियों के बीच अपनी खासी पैठ बना ली थी. वह सिमी की बैठकों और योजनाओं में शामिल होता था और उस की बातें गौर से सुनी जाती थीं.