सरस सलिल विशेष

27 सितंबर, 2016 को उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर गांव फरीदपुर के नजदीक स्ड्डिथत अंडरपास से जरा सी दूरी पर एक युवक की लाश पड़ी मिली. सुबह सुबह लोग जब अपने खेतों पर जा रहे थे, तभी उन की नजर हाईवे के नीचे कच्ची रोड पर चली गई थी. लाश वहीं पड़ी थी. किसी ने फोन कर के इस की सूचना थाना मैनाठेर को दे दी. थानाप्रभारी राजेश सोलंकी उसी समय थाने पहुंचे थे. मामला मर्डर का था, इसलिए सूचना मिलते ही वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने देखा, मृतक 25-26 साल का था और उस की लाश लहूलुहान थी.

थानाप्रभारी ने लाश का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतक के गले व सिर पर किसी तेजधार हथियार के गहरे घाव थे. उस की लाश के पास ही शराब की खाली बोतल और 2 गिलास पड़े मिले. इस से अनुमान लगाया गया कि हत्या से पहले हत्यारे ने मृतक के साथ शराब पी होगी. घटनास्थल पर काफी भीड़ इकट्ठी हो चुकी थी.

थानाप्रभारी ने भीड़ से मृतक की शिनाख्त कराई तो किसी ने उस का नाम हरि सिंह बताते हुए कहा कि यह मुरादाबाद-संभल रोड पर स्थित गांव लालपुर हमीर का रहने वाला है. थानाप्रभारी ने एक सिपाही को हरि सिंह के घर भेज कर उस की हत्या की खबर भिजवा दी. उस की पत्नी रानी उस समय अपने मायके वारीपुर भमरौआ में थी. जैसे ही उसे पति की हत्या की खबर मिली, उस का रोरो कर बुरा हाल हो रहा था.

मृतक के परिजन घटनास्थल पर पहुंच चुके थे. पुलिस ने उन से संक्षिप्त पूछताछ कर के घटनास्थल की काररवाई पूरी की और लाश को पोस्टमार्टम के लिए मुरादाबाद भेज दिया.

मृतक हरि सिंह के चाचा ओमप्रकाश की तरफ से पुलिस ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. एसएसपी नितिन तिवारी ने थानाप्रभारी राजेश सोलंकी को घटना के शीघ्र खुलासे के निर्देश दिए. थानाप्रभारी ने सब से पहले हरि सिंह के गांव लालपुर हमीर जा कर उस के घर वालों से पूछताछ की. घर वालों ने बताया कि उन की किसी से कोई रंजिश नहीं है. वैसे भी हरि सिंह बहुत सीधासादा था.

26 सितंबर, 2016 की शाम को उस के मोबाइल पर किसी का फोन आया था. फोन पर बात करने के बाद वह यह कह कर घर से गया था कि जरूरी काम है, थोड़ी देर में लौट आएगा. लेकिन वह वापस नहीं आया. सुबह उस की हत्या की जानकारी मिली.

राजेश सोलंकी ने हरि सिंह की पत्नी रानी से भी बात की. उस ने बताया कि हमारी किसी से कोई रंजिश नहीं है. पता नहीं यह सब कैसे हो गया. रानी से बातचीत करते समय राजेश सोलंकी की नजर उस की बौडी लैंग्वेज पर टिकी हुई थी.

पति के मरने का जो गम होना चाहिए, वह उस के चेहरे पर दिखाई नहीं दे रहा था. वह बात करने में डर रही थी और उन से निगाहें चुरा रही थी. थानाप्रभारी ने अपने अनुभव से अनुमान लगाया कि कहीं न कहीं दाल में काला जरूर है. लेकिन बिना ठोस सबूत के उस पर हाथ डालना ठीक नहीं था. लिहाजा वह उस से यह कह कर लौट आए कि अगर किसी पर शक हो तो फोन कर के बता देगी.

इस के बाद पुलिस ने हरि सिंह के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पता चला कि हरि सिंह के मोबाइल पर जो आखिरी काल आई थी, वह संभल जिले के थाना नरवासा के गांव बारीपुर भमरौआ के ओंकार सिंह की थी. पुलिस ने दबिश दे कर उसे पकड़ा और पूछताछ के लिए उसे थाना मैनाठेर ले आई.

थाने में उस से हरि सिंह की हत्या के बारे में गहनता से पूछताछ की गई तो पहले तो वह खुद को निर्दोष बताता रहा, लेकिन जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो वह टूट गया. उस ने अपना अपराध कबूल करते हुए बताया कि हरि सिंह की हत्या उस ने ही की थी. उस ने उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों पर आधारित थी.

हरि सिंह मुरादाबाद के थाना मैनाठेर के गांव लालपुर हमीर के रहने वाले रामकिशोर की पहली पत्नी का बेटा था. दरअसल, रामकिशोर ने अपनी पत्नी शांति देवी की मृत्यु के बाद मुरादाबाद के मोहल्ला बंगला गांव की चंद्रकला से शादी कर ली थी. हरि सिंह शांति देवी से पैदा हुआ था. रामकिशोर दूसरी पत्नी चंद्रकला के साथ मुरादाबाद में ही रहने लगा था. करीब 5 साल बाद रामकिशोर की भी मृत्यु हो गई तो हरि सिंह की परवरिश उस की दादी हरदेई ने की थी.

हरि सिंह जवान हो गया तो राजमिस्त्री का काम करने लगा. बाद में उस की शादी संभल जिले के थाना नरवासा के अंतर्गत आने वाले गांव बारीपुर भमरौआ की रानी से हो गई. यह 7 साल पहले की बात है. शादी के 4 साल बाद उन के यहां एक बेटा हुआ, जिस का नाम जितिन रखा गया. यह शादी हरि सिंह के दूर के रिश्ते के बहनोई रोहताश ने करवाई थी. शादी के बाद रोहताश सिंह और उन के बच्चों का हरि सिंह के यहां आनाजाना बढ़ गया.

रोहताश का एक बेटा था ओमकार सिंह. वह इंटरमीडिएट तक पढ़ा था और बनठन कर रहता था. वह भी हरि सिंह के घर खूब आता जाता था. उस की रानी से बहुत पटती थी. रानी रिश्ते में उस की मामी लगती थी, इस नाते वह उस से हंसीमजाक कर लेता था.

हरि सिंह राजमिस्त्री था. दिन भर काम करने के कारण शाम को थकामांदा घर आता तो वह पत्नी को ज्यादा समय नहीं दे पाता. खाना खाने के बाद वह जल्द ही सो जाता. यह बात रानी को अखरती थी. पति की इस उदासीनता की वजह से रानी का झुकाव ओमकार की तरफ हो गया.

मामी के इस आमंत्रण को ओमकार समझ गया. हरि सिंह के घर से निकलते ही वह उस के घर पहुंच जाता और अपनी लच्छेदार बातों से उस ने मामी का दिल जीत लिया. लिहाजा एक दिन ऐसा आया, जब दोनों ने अपनी सीमाएं लांघ कर अपनी हसरतें पूरी कर लीं. यानी दोनों के बीच अवैध संबंध बन गए.

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घर में हरि सिंह की दादी हरदेई और पत्नी रानी ही रहती थीं. दादी मोहल्ले में औरतों से बतियाने चली जाती तो रानी घर में अकेली रह जाती. ओमकार इसी का फायदा उठा कर उस के घर पहुंच जाता. इस तरह काफी दिनों तक दोनों मौजमस्ती करते रहे.

जाहिर है, अवैध संबंध छिपाए नहीं छिपते. मोहल्ले की औरतों को इस बात का शक हो गया कि ओमकार हरि सिंह की गैरमौजूदगी में ही उस के घर क्यों आता है, किसी तरह यह बात हरि सिंह के कानों तक पहुंच गई. इस से हरि सिंह का भी माथा ठनका. उस ने पत्नी से साफ कह दिया कि वह ओमकार से कह दे कि उस की गैरमौजूदगी में यहां कतई ना आए.

इस के बाद भी ओमकार ने हरि सिंह के घर आना बंद नहीं किया. यह जानकर हरि सिंह ने ओमकार से साफ कह दिया कि वह उस के घर न आया करे. इस के अलावा उस ने पत्नी को भी खूब खरीखोटी सुनाई. आखिर ओमकार ने हरि सिंह के यहां आनाजाना बंद कर दिया.

हरि सिंह की सख्ती के बाद रानी और ओमकार की मुलाकातें नहीं हो पा रही थीं. दोनों ही बहुत परेशान थे. ऐसे में दोनों को हरि सिंह अपनी राह का कांटा दिखाई देने लगा.

एक दिन किसी तरह मौका मिलने पर रानी ने ओमकार से मुलाकात की. उस ने ओमकार से कहा, ‘‘हरि को हमारे संबंधों की जानकारी हो चुकी है. उस ने मेरे ऊपर जो सख्ती की है, उस हालत में मैं नहीं रह सकती. मुझे तुम इस तनावभरी जिंदगी से निकालो. किसी तरह हरि को ठिकाने लगा दो. इस के बाद ही हम लोग चैन से रह सकते हैं.’’

उस की बातों में आ कर ओमकार हरि सिंह की हत्या करने के लिए तैयार हो गया.

26 सितंबर, 2016 को हरि सिंह की दादी हरदेई ने शाम का खाना बनाने के बाद उस से खाने को कहा. हरि सिंह की पत्नी रानी 2 दिन पहले अपने मायके चली गई थी, इसलिए खाना दादी ने बनाया था. हरि सिंह खाना खाने के लिए बैठा ही था कि उस के मोबाइल पर ओमकार का फोन आया. वह ओमकार की काल रिसीव करना नहीं चाह रहा था, लेकिन उस ने सोचा कि हो सकता है, कोई खास बात हो जो वह फोन कर रहा हो.

यही सोच कर उस ने फोन उठाया तो ओमकार बोला, ‘‘मामा, तुम्हारे लिए एक अच्छी खबर है. मेरे एक मिलने वाले का मकान बनना है. बड़ी पार्टी है. ऐसा करते हैं, दोनों मिल कर मकान का ठेका ले लेते हैं. पैसे मैं लगाऊंगा. पार्टी से आज ही बात करनी है. अगर आज बात नहीं हुई तो वह पार्टी किसी दूसरे ठेकेदार के पास चली जाएगी. तुम जल्दी चले आओ, मैं बाहर सड़क पर इंतजार कर रहा हूं. अगर बात बन गई तो पार्टी से आज ही थोड़ाबहुत एडवांस ले लेंगे.’’

हरि सिंह लालच में आ गया. वह दादी से यह कह कर घर से निकल गया कि थोड़ी देर में लौट कर खाना खाएगा. जब वह सड़क पर आया तो वहां मोटरसाइकिल लिए ओमकार खड़ा था. हरि सिंह को देखते ही वह बोला, ‘‘मामा, जल्दी से कस्बा सिरसी चलो.’’

हरि सिंह इस के लिए राजी हो गया. वह ओमकार सिंह की मोटरसाइकिल पर बैठ गया. रास्ते में ओमकार सिंह ने बताया कि जिस पार्टी से बात करनी है, वह सिरसी कस्बे की पुलिस चौकी के सामने खड़ी है. थोड़ी देर में दोनों सिरसी पहुंच गए. वहां जा कर देखा तो पार्टी नहीं मिली. ओमकार सिंह ने किसी को फोन किया, फिर बताया कि पार्टी किसी जरूरी काम से संभल चली गई है. उस ने यहीं इंतजार करने को कहा है.

सिरसी से संभल की दूरी करीब 10 किलोमीटर है. कुछ देर दोनों वहीं खड़े इंतजार करते रहे. तभी ओमकार ने हरि सिंह से कहा कि तुम अपने घर फोन कर लो कि देर से लौटोगे. इस पर हरि सिंह ने बताया कि घर पर फोन नहीं है. फोन तो उसी के पास है.

जब वहां खड़ेखड़े काफी देर हो गई और संभल से पार्टी भी नहीं आई तो हरि सिंह बोला, ‘‘चलो, कल बात कर लेंगे.’’

ओमकार ने कहा कि चलो जब यहां तक आए हैं तो एकदो पैग लगा लें. हो सकता है जब तक हम यह काम करें, तब तक पार्टी आ जाए. इतना कहने के बाद ओमकार शराब की दुकान से एक बोतल खरीद लाया. पास ही अंडे के ठेले से गिलास ले कर दोनों ने शराब पी. जो थोड़ी शराब बोतल में बची थी, वह ओमकार ने अपनी बाइक की डिक्की में रख ली और गिलास भी रख लिए.

शराब पीने के बाद ओमकार ने कहा, ‘‘देखो मामाजी, तुम्हारे घर वाले इंतजार कर रहे होंगे और मेरे भी. हो सकता है पार्टी को कोई जरूरी काम आ गया हो, इसलिए अब सुबह उस से बात कर लेंगे. मैं ऐसा करता हूं कि पहले तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ देता हूं, उस के बाद अपने घर चला जाऊंगा.’’

इस के बाद हरि सिंह उस की बाइक के पीछे बैठ गया. कुछ दूर चल कर ओमकार ने सड़क किनारे बसे राजस्थानी खानाबदोशों की झुग्गी के पास अपनी बाइक रोक दी.  खानाबदोश लोहे के सामान बना कर बेचते थे. उन से उस ने 80 रुपए में एक गंडासा खरीदा. हरि सिंह ने उस से पूछा कि वह इस का क्या करेगा तो उस ने बताया कि घर के आसपास काफी जंगली पौधे उग आए हैं, उन्हें काटेगा. वह गंडासा उस ने बाइक की डिक्की में रख लिया.

हरि सिंह उस की योजना से अनभिज्ञ था. उसे क्या पता था कि वह गंडासा जंगली पौधे काटने के लिए नहीं, बल्कि उस की हत्या के लिए खरीदा है. बाइक जब हरि सिंह के गांव के नजदीक पहुंची तो ओमकार ने कहा, ‘‘मामा, अभी थोड़ी शराब बची है. अगर मैं इसे घर ले जाऊंगा तो घर वाले फेंक देंगे. क्योंकि वे लोग शराब से बहुत नफरत करते हैं और जब यह फेंकी जाएगी तो मुझे बहुत दुख होगा. ऐसा करते हैं कि एकएक पैग और ले लेते हैं.’’

हरि सिंह ओमकार की बात को टाल नहीं सका. दोनों जिस जगह खड़े हो कर बातें कर रहे थे, उन्होंने वहां बैठ कर शराब पीना ठीक नहीं समझा. लिहाजा वे वहां से कुछ दूर चले गए. फिर सड़क की साइड में बैठ कर उन्होंने शराब पी.

हरि सिंह एक तो पहले से ही ज्यादा पिए हुए था. 2 पैग और लगाने के बाद उसे ज्यादा नशा हो गया, जिस से वह लड़खड़ाने लगा. तभी ओमकार ने बाइक संभालते हुए कहा कि यह स्टार्ट नहीं हो रही है, थोड़ा धक्का लगा दे. बाइक गियर में थी, इसलिए आगे नहीं बढ़ सकी. इस पर ओमकार ने गाड़ी स्टैंड पर खड़ी कर के हरि सिंह से कहा कि वह ब्रेक दबाए. नशे में झूमते हुए हरि सिंह ने झुक कर दोनों हाथों से ब्रेक दबाए, ठीक उसी समय ओमकार ने बाइक की डिक्की से गंडासा निकाल कर उस की गरदन पर ताबड़तोड़ प्रहार करने शुरू कर दिए.

नशे की हालत में हरि सिंह को संभलने तक का मौका नहीं मिला. वह निढाल हो कर नीचे गिर पड़ा. कुछ ही देर में उस की मौत हो गई. ओमकार सिंह ने उसे हिलाडुला कर देखा तो वह मर चुका था. वह वहां से अपने घर चला गया. उस ने गांव बारी भमरौआ पहुंच कर रानी को हरि सिंह की हत्या की खबर दे दी. उस ने उस से कह दिया कि जब उसे हरि सिंह की हत्या की खबर मिले तो वह रोने का नाटक करे, जिस से किसी को शक न हो.

पुलिस ने ओमकार से पूछताछ के बाद रानी को भी गिरफ्तार कर लिया. उस ने भी स्वीकार कर लिया कि पति की हत्या की साजिश में वह भी शामिल थी. ओमकार की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त गंडासा भी बरामद कर लिया. इस के बाद दोनों को 28 सितंबर, 2016 को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. इस मामले की तफ्तीश थानाप्रभारी राजेश सोलंकी कर रहे हैं.

लेखक : आर. के. राजू

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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