इंसान अपने स्वार्थों के चलते कभीकभी इतना वहशी दरिंदा बन जाता है कि स्वार्थों के आगे उसे इंसान की जान सस्ती लगती है. इस दोहरे हत्याकांड में भी ऐसा ही कुछ हुआ. ममता और उस का बेटा तो मारे ही गए, बचा वाहिद भी.