सरस सलिल विशेष

गैरकानूनी काम करने वाला कोई शख्स कानूनी फंदे में आ जाए, तो उस की छटपटाहट बढ़ जाती है. मजबूत कठकाठी वाले आचार्य कल्कि कृष्णन की हालत भी ऐसी ही हो रही थी. वह खुद को पहुंचा हुआ ज्योतिषाचार्य और तांत्रिक बताता था. उस के पास भक्तों की कतार लगती थी. धर्म के चोले में वह अपने ऐसे ही भक्तों से लाखों रुपए कमाता था. कल्कि कृष्णन का धंधा इतने बड़े पैमाने पर चल रहा था कि उस ने आधा दर्जन से ज्यादा लोगों का स्टाफ रखा हुआ था. अनेक बड़े लोगों से उस के रिश्ते थे, लेकिन यह बात अलग थी कि वह खुद को बेबस महसूस कर रहा था. न उस का रसूख काम आया और न ही कोई तंत्रमंत्र.

जब कल्कि कृष्णन की काली करतूतों से परदा उठा, तो असली चेहरा बेनकाब होने से हर कोई चौंक गया. तंत्रमंत्र की आड़ में वह प्रतिबंधित दुर्लभ जीवजंतुओं के अंगों की तस्करी भी कर रहा था. तंत्र विद्या के जरीए लोगों के दुखदर्द दूर करने और उन की किस्मत संवारने का दावा करने वाला खुद ही सलाखों के पीछे पहुंच गया.

बड़े पैमाने पर धंधा

दरअसल, वन विभान की टीम ने 21 जून, 2017 को राजधानी नई दिल्ली से लगे शहर नोएडा के सैक्टर-18 में बने एस्ट्रोदेवम ज्योतिष केंद्र पर छापा मारा. इस छापेमारी में तंत्रमंत्र में काम आने वाली चीजों में गोह, समुद्री मूंगा, सियार के बाल और उस से बने यंत्र, संरक्षित जीवजंतुओं के अवशेष मिले. इन चीजों का इस्तेमाल तथाकथित तौर पर काला जादू, वशीकरण व तंत्रमंत्र में किया जाता था.

इस संस्थान के मुखिया ज्योतिष व तांत्रिक आचार्य कल्कि कृष्णन को गिरफ्त में ले लिया गया. इस संस्थान से 25 हत्था जोड़ी, जो गोह का दोहरा लिंग होता है, बरामद हुईं. इस का कथित रूप से इस्तेमाल बेहतर सैक्स जिंदगी के लिए घर में रख कर किया जाता है.

इस के अलावा 28 सी फैन (समुद्री कोरल) मिले, जिन्हें इंद्रजाल कहा जाता है और इस का इस्तेमाल वशीकरण व खुशहाल जिंदगी के लिए होता है. 27 सियार सिंघी (सियार के सिर की खाल) मिलीं, जिन का इस्तेमाल तंत्र क्रियाओं में होता है और कोरल शंख भी बरामद हुए. इस के साथ ही तकरीबन 2 लाख रुपए की नकदी और 8 कंप्यूटर भी बरामद हुए.

21वीं सदी को भले ही वैज्ञानिक युग कहा जाता है, लेकिन समाज में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है, जो अंधविश्वास में पड़ कर सुखी जिंदगी का चमत्कारी रास्ता ढोंगियों, पाखंडियों, तांत्रिकों या बाबाओं के दरबार में खोजते हैं. इस की बाकायदा वे बड़ी कीमत भी चुकाते हैं.

लोगों के अंधविश्वास का ऐसे ढोंगी भी भरपूर फायदा उठाते हैं, क्योंकि अंधविश्वासियों से ही तो उन की दुनिया आबाद रहती है. कल्कि कृष्णन के पास से जो एक खास डायरी बरामद हुई, उस में छात्रों, कारोबारियों, नेताओं और कई हस्तियों के नाम व मोबाइल नंबर लिखे हुए थे. उस के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 39, 44, 48, 48ए, 48बी, 50 व 51 के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया.

कल्कि कृष्णन की पोल शायद ही खुल पाती, अगर अप्रैल महीने में मेरठ शहर में रिटायर्ड कर्नल के बेटे नैशनल शूटर प्रशांत विश्नोई की कोठी पर छापा डाल कर वन विभाग की टीम ने वन्य जीवों की खालें व दूसरी चीजों के साथ ही भारी मात्रा में करोड़ों रुपए के गैरकानूनी हथियारों का जखीरा बरामद न किया होता.

इंटरपोल, वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, साइबर सैल व दूसरी सैंट्रल एजेंसियां जांच में जुटी थीं कि प्रशांत विश्नोई पकड़ में आ गया. पुख्ता सूचना के बाद वन विभाग की टीम ने पहले निगरानी की, फिर खुद ग्राहक बन कर कल्कि कृष्णन के पास पहुंची, तो छापेमारी की कार्यवाही की गई.

तस्करों से जुड़े तार

पकड़ा गया कल्कि कृष्णन सिर्फ अपने संस्थान से ही नहीं, बल्कि इंटरनैट के जरीए भी प्रतिबंधित सामान को औनलाइन बेचा करता था. वैबसाइट पर बाकायदा जीवों के अंगों को ऊंचे दामों पर बेचा जाता था.

वशीकरण, सैक्स जिंदगी को मस्त बनाने और खुशहाली लाने के नाम पर बनाए गए यंत्रों को भी ऐसे ही बेचा जाता था. उस का नैटवर्क देश के कई राज्यों में होने के साथसाथ ब्रिटेन, अमेरिका सहित कई दूसरे देशों में भी फैला हुआ था.

तांत्रिक कल्कि कृष्णन बहुत ही शातिराना अंदाज में इस काम को करता था. किसी को शक न हो, इस के लिए वह कोडवर्ड में बात किया करता था. बाघ की खाल को धारी वाली चादर, बड़ी चादर, सियार के बाल को कंघी व हड्डी को लकड़ी वगैरह कहता था. जो लोग उस के साथ तस्करी के धंधे में जुड़े थे, उन से वह देर रात में ही बातें किया करता था. अलगअलग तरीकों से माल को बाहर विदेशों में भेजा जाता था. उसे पकड़ने वाली टीम को उस के 10 बैंक खातों की जानकारी भी मिली.

बरामद हुए दस्तावेजों में जिन विदेशियों को संरक्षित वन्य जीवों के अंगों और उन से बनी चीजें बेची गईं, उन का ब्योरा भी दर्ज था. अपने सामान को वह विदेशियों को बेचने में ज्यादा दिलचस्पी रखता था. इस की वजह यह थी कि देश के मुकाबले विदेश में जीवों के अंगों की कीमत उसे ज्यादा मिल जाती थी.

सरस सलिल विशेष

कल्कि कृष्णन के पकड़े जाने के बाद अब वन्य जीवों से संबंधित चीजों की खरीदफरोख्त करने वाले देशीविदेशी लोग भी जांच के दायरे में हैं. जांच टीम को उम्मीद है कि बरामद कंप्यूटरों की हार्डडिस्क व दूसरें कागजों की जांच के बाद उस की और भी करतूतें खुल सकती हैं.

नौकरी छूटी, बना तांत्रिक

कल्कि कृष्णन शुरू से ही कोई चमत्कारी बाबा रहा हो, ऐसा नहीं था. पकड़े जाने पर उस का अतीत भी सामने आ गया. उस के भक्त भले ही उस की असलियत नहीं जानते थे, लेकिन उस का असली नाम कृष्ण कुमार बरनवाल था. वह कस्टम विभाग में इंस्पैक्टर के पद पर नौकरी करता था.

वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक मुकेश कुमार की मानें, तो कल्कि कृष्णन या कृष्ण कुमार बरनवाल साल 1998 में रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया था. उसे सीबीआई ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था. सरकार ने उसे नौकरी से भी बरखास्त कर दिया था.

कल्कि कृष्णन शातिर था. उसे अपनी जिंदगी में अंधेरा नजर आया, तो उस ने धर्म और समाज में फैले अंधविश्वास को ही हथियार बनाया और नाम बदल कर बाबा बन गया.

वक्त के साथ कल्कि कृष्णन का धंधा भी चल निकला. वह तंत्रमंत्र और उस के लिए बने सामानों से लोगों के दुखदर्द दूर करने की बात करता था. नतीजतन, लोग उस के पास आतेजाते थे. इन में कोई जिंदगी में कामयाबी पाना चाहता था, कोई वशीकरण, तो कोई सैक्स जिंदगी सुखमय बनाना चाहता था.

ऐसी तमाम परेशानियों का इलाज धर्म व तंत्र क्रियाओं में इस्तेमाल होने वाली चीजों में बताया जाता था. पूजापाठ की सामग्री भी वह अपने दफ्तर में सजा कर बेचता था. धार्मिक कामों में वह बढ़चढ़ कर हिस्सा लेता था.

कल्कि कृष्णन का नाम हुआ, तो ज्योतिष ज्ञाता बता कर उसे कार्यक्रमों में भी बुलाया जाने लगा. उस का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा था. खास कामों को छोड़ कर बाकी कामों को उस का स्टाफ संभालता था. इस सब की आड़ में वह कौन सा गुल खिला रहा था, इस बात को कोई नहीं जानता था. कल्कि कृष्णन पर जो धाराएं लगी हैं, उन में उसे 3 साल से 7 साल तक की सजा हो सकती है.

कल्कि कृष्णन तंत्रमंत्र की आड़ में गलत काम करने वाला कोई पहला या आखिरी खिलाड़ी है, ऐसा नहीं है. लोगों के अंधविश्वास और कानून के लचीलेपन से हर शहर में धर्म की आड़ में धंधा करने वालों की दुकानें सजी होती हैं. अपने धंधे को आबाद करने के लिए वे लोग जम कर प्रचार भी करते हैं. लोगों की हर तकलीफ को दूर करने के नाम पर पैसा वसूलते हैं.

अंधविश्वासी लोग कई बार पैसे के साथसाथ इज्जत भी गंवा देते हैं. शिकायत मिलने या कोई बड़ा मामला सामने आने पर ही पुलिस कार्यवाही करती है.