सरस सलिल विशेष

9 अप्रैल, 2017 : मिस्र के अलैक्जैंड्रिया और तांता शहरों के गिरजाघरों में हुए धमाकों के बाद राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी ने देश में 3 महीने के आपातकाल की घोषणा कर दी. इन धमाकों में 45 लोगों की मौत हो गई जबकि सैकड़ों घायल हो गए. 2 गिरजाघरों में हुए विस्फोटों की जिम्मेदारी आतंकी संगठन आईएस ने ली है. अलैक्जैंड्रिया के सैंट मार्क्स चर्च में शक होने पर सुरक्षा बलों ने चर्च के मुख्यद्वार पर ही आत्मघाती हमलावर को रोक लिया था, जहां उस ने खुद को उड़ा लिया.

3 अप्रैल, 2017 : रूस में सैंट पीट्सबर्ग के मैट्रो स्टेशन पर 3 धमाकों में 10 लोगों की मौत हो गई जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए. बम विस्फोट करने वाले संदिग्ध व्यक्ति की पहचान को प्रारंभिक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है. यह संदिग्ध व्यक्ति मध्य एशियाई है, जिस के सीरियाई आतंकवादियों से संबंध हैं.

विशेषज्ञों ने विश्लेषण किया है कि यह हमलावर खुद के बनाए हुए बम को ले कर मैट्रो में गया था. वह डब्बे में बीच वाली जगह पर खड़ा हुआ था. मैट्रो टे्रन के चलने के दौरान उस ने विस्फोट कर दिया.

7 अप्रैल, 2017 : स्वीडन की राजधानी स्टौकहोम में एक ट्रक भीड़भाड़ वाले शौपिंग इलाके में घुस गया और लोगों को रौंदते हुए निकल गया, जिस में 5 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए. यह घटना स्टौकहोम के ड्रोटिनिंगटन क्वीन स्ट्रीट पर हुई. अधिकारियों के मुताबिक यह घटना आतंकी हमलों की ओर इशारा करती है.

7 मार्च, 2017 : भारत में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में करीब 12 घंटे चली मुठभेड़ के बाद सैफुल्लाह मारा गया. यह भारत पर आईएस का पहला हमला था. शुरुआती जांच के हिसाब से यह स्वघोषित कट्टरपंथी या लोन वुल्फ था जो खुद को आईएसआईएस खुरासान गु्रप के तौर पर प्रचारित कर रहा था.

जरमनी की राजधानी बर्लिन के क्रिसमस मार्केट में हुए ट्रक हमले की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली. उस से जुड़ी एक एजेंसी अमाक ने हमले के दूसरे दिन बयान जारी कर के हमले की जिम्मेदारी ली. बयान में कहा गया है कि गठबंधन देशों को निशाना बनाने की अपील के बाद आईएस के एक लड़ाके ने हमला किया. हमले में

12 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा घायल हुए थे.

आतंकी वारदात को अंजाम देने के बाद यह आतंकी बच कर भाग निकलने में भी सफल रहा. इसलिए जरमनी में इस बात का खौफ था कि वह दूसरा हमला कर सकता है लेकिन वह 2 दिनों बाद इटली पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारा गया. इसे लोन वुल्फ या अकेले भेडि़ए का हमला माना जा रहा है.

क्या बला है लोन वुल्फ

मौजूदा दौर में लोन वुल्फ हमले का मतलब है बिना किसी नेतृत्व के अपने धार्मिक, सांप्रदायिक और कट्टर विचारधारा के नाम पर अकेले हथियार ले कर आम लोगों व सुरक्षाबल पर हिंसक हमले करना. इस सिलसिले में जो शोध हुए हैं, वे बताते हैं कि ऐसे लोन वुल्फ अकसर किसी छोटे से नैटवर्क का हिस्सा होते हैं. कुछ तो सिर्फ परिवार के सदस्यों व दोस्तों से मदद लेते हैं. या उन की असलियत बहुत नजदीकी लोगों को ही पता होती है.

बोस्टन में बम धमाका करने वाले दोनों लोग भाई थे, जबकि सैन बै्रंडिनो में हमला करने वाले पतिपत्नी थे. यूरोप में पिछले 9 महीनों में इस तरह के जो हमले हुए हैं वे नौजवानों के छोटे से नैटवर्क की करतूतें थीं. वे एकदूसरे को जानते थे, दोस्त थे या पासपड़ोस के ही लड़के थे. खुफिया एजेंसी के लिए इस तरह के हमलावरों को ढूंढ़ना टेढ़ी खीर होता है.

पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां पस्त

आधुनिक युग में आतंकवाद का चेहरा कोई खास अलग नहीं है, लेकिन जैसे ही इस पर आईएसआईएस की मुहर लगती है, हमारी रीढ़ की हड्डी में कंपकंपी छूट जाती है. यह हमें ज्यादा डराता है. आईएसआईएस महज हत्याएं नहीं करता, बल्कि सभ्य समाज और बर्बरता के बीच का फासला कम करता हुआ ऐसे कृत्य को न्यायसंगत व सही भी ठहराता है. वह यह भी समझाता है कि ऐसा करने में गई उस के सदस्यों की जानें दरअसल शौर्य का प्रतीक हैं. आईएसआईएस एक ऐसी फ्रैंचाइज है जो कोई भी हथिया सकता है बिना उस की इजाजत के. सिर्फ इतना भर करना होता है कि हमला करो, हिंसा फैलाओ, बेगुनाह और मासूम लोगों की जानें लो और हमले से ठीक पहले एक संदेश जारी कर दो कि इस हमले का रिश्ता आईएसआईएस से है. आईएसआईएस को बुरा नहीं लगता, वह भी तुरतफुरत ऐसे हमलों की जिम्मेदारी या कहें कि श्रेय लेने में पीछे नहीं रहता.

जब आतंक का रूप ऐसा हो जाए तो चुनौती यह है कि इस से निबटा कैसे जाए. तमाम देशों की सुरक्षा एजेंसियां इस तरह को हमलों को कैसे रोकें, जहां न तो कोई गुट काम कर रहा है, न कोई ट्रेनिंग या उकसावे के कैंप चल रहे हैं, न कोई बड़ा हथियारों का जखीरा जमा किया जा रहा है. अलकायदा के जमाने में तो यही होता रहा है कि एजेंसिया ऐसे लोगों पर नजर रखती थीं जो अपने देश से बाहर जाते थे.

फ्रांस के आतंकी और मतीन में काफी समानताएं हैं. फ्रांस का हमलावर भी पुलिस की नजर में था और मतीन भी. दोनों ही के बारे में पुलिस को लगता था कि वे नाराज युवक हैं, और हिंसा की इस पराकाष्ठा तक नहीं पहुंच सकते. दोनों ही मामलों में पुलिस और एजेंसियां गलत साबित हुई हैं.

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लोन वुल्फ का हाइटैक हथियार

‘लोन वुल्फ टैररिज्म : अंडरस्टैडिंग द ग्रोइंग थ्रेट’ पुस्तक के लेखक जैफ्री सिमोन आतंकवाद की इस नई प्रवृत्ति के बारे में कहते हैं –

‘‘मेरी पुस्तक लोन वुल्फ आतंकवाद की बढ़ती समस्या के बारे में है जो संगठित आतंकवाद से अलग तरह की है जिस के हम सातवें, आठवें और नवें दशक और 21वीं सदी के पहले 5 सालों में आदी रहे हैं. बुनियादी तौर पर लोन वुल्फ एक व्यक्ति होता है, वह 2 व्यक्ति भी हो सकते हैं, वे बाहरी लौजिस्टिक और आर्थिक सहायता के बिना काम करते हैं.

‘‘दरअसल वे अपने लिए काम कर रहे होते हैं. उन की पहचान कर पाना या उन्हें पकड़ पाना मुश्किल होता है क्योंकि उन की किसी से बातचीत नहीं होती, न गु्रप के कोर सदस्य पकडे़ जाते हैं.

अपनी पुस्तक में मैं ने कहा है कि इंटरनैट ने इस खेल को बदल दिया है.  इंटरनैट ने इन आतंकवादियों को यह अवसर दिया है कि आतंकवादी संगठन के वैब पेजेज, ट्वीट्स और ब्लौग पढ़ कर स्वयंमेव उग्रवादी बन सकते हैं. लेकिन इस से अधिकारियों को लोन वुल्फ के बारे में जानने का मौका मिल सकता है क्योंकि कई वुल्फ हमले से पहले संदेश भेजते हैं. हाल ही में लोन वुल्फ की संख्या भी बढ़ती जा रही है और उन के द्वारा की जानेवाली तबाही भी.

‘‘परंपरागत आतंकवादी और लोन वुल्फ आतंकवादियों में एक फर्क यह है कि लोन वुल्फ आतंकवादी नएनए तरीके अपनाते हैं. बुनियादी तौर पर लोन वुल्फ बहुत खतरनाक होते हैं और बहुत रचनात्मक भी. चूंकि उन के पीछे कोई सामूहिक निर्णय प्रक्रिया नहीं होती, इसलिए वे अपनी पसंद का तरीका या रणनीति चुन सकते हैं. इस कारण लोन वुल्फ की संख्या बढ़ती जा रही है. यह एक ट्रैंड बन सकता है.’’

आईएसआईएस आतंकवाद के इतिहास में सब से ज्यादा तकनीक और मीडियापसंद गुट है. इस ने इंटरनैट के इस्तेमाल में महारत हासिल की हुई है. अलकायदा ने भी उस का इस्तेमाल किया मगर आईएसआईएस इसे और ऊंचे स्तर तक ले गया. इसलिए यह कह पाना मुश्किल है कि आने वाले दिनों में क्या नई बात निकल कर आती है.

हमें यह जरूर जानना चाहिए कि आईएसआईएस इराक और सीरिया में घिर चुका है. हो सकता है निकट भविष्य में यह देखने को मिले कि वह हार चुका है मगर वह विकेंद्रित वैश्विक ताकत के रूप में बना रहेगा. इंटरनैट और सोशल मीडिया का उपयोग कर लोगों को आत्मघाती हमले करने को प्रेरित करता रहेगा.

रहना होगा सावधान

फ्रांस के एक शिक्षाविद के मुताबिक, ये वो लोग हैं जो किसी भी समाज में ऐडजस्ट नहीं हो सकते. ये लोग एक काल्पनिक दुनिया में रहते हैं और ये इसलाम के कट्टरपंथ से नहीं, बल्कि अपने ही मन के कट्टरपंथ से प्रभावित हैं. हमलों में आईएसआईएस का नाम लेना इन्हें अच्छा लगता है क्योंकि वह एकमात्र समाजविरोधी और विश्वविरोधी संस्था है. आईएसआईएस आधुनिकता के खिलाफ है और दुनिया को इसलाम के शुरुआती दौर में ले जाना चाहता है. दरअसल, इसलाम का कट्टरपंथी रूप नहीं है यह, वास्तविकता यह है कि यह कट्टरपंथ का इसलामीकरण है.

आतंक के इस नए हाइटैक व धार्मिक हथियारों से घिरे रूप से पूरी दुनिया परेशान है. आज भले ही लोन वुल्फ के निशाने पर फ्रांस, अमेरिका जैसे यूरोपीय देश हों लेकिन जिस तरह से एशिया, खासकर भारत, पिछले कई सालों से आतंक के निशाने पर रहा है उस से यहां भी लोन वुल्फ की क्रूर करतूतों की गुंजाइश और बढ़ जाती है. जाहिर है आने वाले खतरे से चारकदम आगे चलने व निबटने के लिए कमर कसने में ही समझदारी है.

लोन वुल्फ का आईएसआईएस कनैक्शन

आईएसआईएस की लोन वुल्फ आतंकी हमले की सोच काफी पुरानी है. सितंबर 2014 में आईएसआईएस ने अपने एक सरगना का औडियोटेप जारी किया था. उस टेप में इराक पर हवाई हमला करने वाले अमेरिका और उसके सहयोगियों पर लोन वुल्फ के ढंग के हमले करने का आह्वान किया गया था. अकेले आतंकी हमला करने वालों को पश्चिमी देशों में लोन वुल्फ कहा जाता है.  पहले हमले छोटे स्तर पर ही होते थे, अब ये बड़ा रूप लेते जा रहे हैं. इस हमले का यूरोप में नतीजा यह हुआ है कि सभी मुसलमान और मध्यपूर्व से आए मुसलिम शरणार्थी संभावित आतंकवादी के कठघरे में खड़े कर दिए गए हैं.

अमेरिका के ओरलैंडो के गे क्लब में उस रात ऐसा ही खौफनाक वाकेआ हुआ था. अंधाधुंध फायरिंग कर के 50 से ज्यादा लोगों की जान लेने वाले उमर मतीन के बारे में अभी तक इतना ही पता चल सका है कि वह इसलामिक स्टेट यानी आईएस से प्रभावित था, लेकिन यह हत्याकांड उस ने इसलामिक स्टेट के किसी निर्देश पर नहीं किया था. लेकिन कई अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार मतीन ने हमले से पहले और हमले के दौरान इमरजैंसी सर्विस को फोन कर के यह स्वीकार किया था कि वह इसलामिक स्टेट के लिए प्रतिबद्ध है.

इस घटना से 2015 में कैलिफोर्निया के सैन ब्रैंडिनों में हुई शूटिंग याद आती है, जहां हमलावर ने एक क्लिनिक में गोलीबारी कर के 14 लोगों की जान ले ली थी और हमले से पहले सोशल मीडिया में स्वीकार किया था कि वह आईएसआईएस के प्रति आस्था रखता है. इस के बाद आईएस ने भी न सिर्फ उस की प्रतिबद्धता को स्वीकार किया, बल्कि हमले की जिम्मेदारी भी ली थी.

अकेले भेडि़यों की फौज

यह भी एक तरह से आईएस की रणनीति का ही हिस्सा है. वह लगातार ऐसे समर्थक तैयार करने की कोशिश करता रहता है, जो जहां कहीं भी हैं, जैसे भी हैं, अपनी तरह से उस के लिए कुछ करते रहें. खासकर अगर वे खिलाफत वाले क्षेत्र में जा बसने की हिजरत की अपनी जिम्मेदारी निभाने की स्थिति में नहीं हैं.

पिछले कुछ समय से इसलामिक स्टेट अपने दुश्मनों से घिर गया है. रूस, पश्चिमी सैनिक गठबंधन और अरब देशों की आसमान से बरसती हजारों मिसाइलों के कारण इराक और सीरिया की अपनी जमीन पर उस की हालत खस्ता है. वह इराक में 45 प्रतिशत और सीरिया की 20 प्रतिशत जमीन खो चुका है मगर इस का बदला चुकाने के लिए वह दुनियाभर में आतंकवादी वारदातों को अंजाम दे कर कई देशों को दहला रहा है.

आईएस ने ओरलैंडो के हमले की जिम्मेदारी ली, और कहा कि इस काम को इसलामिक स्टेट के एक लड़ाके ने अंजाम दिया. लेकिन यह बयान जिस तरह संक्षिप्त है, उस से यही लगता है कि संगठन को इस हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी और यह किसी अकेले सिरफिरे की हरकत है. इस के विपरीत पेरिस हमले के दौरान जो जिम्मेदारी ली गई थी, उस में जिस तरह का ब्योरा दिया गया था, वह बता रहा था कि बयान देने वाला हमले की साजिश में शामिल था.

निशाने पर फ्रांस, अमेरिका और…

फ्रांस में भी लोन वुल्फ का हमला हो चुका है जिस में केवल ट्रक के जरिए आतंकी हमला किया गया. वह महज 30 साल का नौजवान था ट्यूनीशिया से आ कर फ्रांस में बसे समुदाय का. पुलिस उसे शातिर अपराधी के तौर पर जानती थी, वह अकसर हथियारों का इस्तेमाल किया करता था. पुलिस की उस पर नजर रहती थी, लेकिन कभी भी उस के बारे में यह शक तक नहीं हुआ कि वह किसी कट्टरपंथी इसलामी संगठन से जुड़ा हुआ है.

जब वह फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस का उत्सव मना रहे लोगों की भीड़ में ट्रक ले कर उन्हें कुचलता हुआ बढ़ा तो उस के पास एक पिस्टल और एक अन्य गन थी. उस ने इसी गन से फायरिंग भी की. उस के ट्रक से कुछ हथगोले और अन्य हथियार मिले, लेकिन जांच में पता चला कि वे नकली थे. इस हमले में 77 लोगों की मौत हुई जबकि 50 से ज्यादा लोग जख्मी हुए. इतना क्रूर कदम उठाने की उसे प्रेरणा या ट्रेनिंग कहां से मिली, यह पता नहीं चल पाया .

फ्रांस में पिछले 10 महीनों में दूसरा बड़ा हमला था. हमले के तुरंत बाद पुलिस ने ट्रक के ड्राइवर को मार गिराया. 2015 में 13 नवंबर को हुए हमले से उबर ही रहा था फ्रांस, जिसमें करीब 130 लोग मारे गए थे, कि यह हमला हो गया.

अमेरिका में भी लोन वुल्फ हमले की कई वारदातें हुई हैं. ओरलैंडो के गे क्लब का हमला हो या फिर सिनेमाघर में अंधाधुंध गोलियां बरसाने वाली घटना, दोनों ही मामलों में हमलावर अकेले थे और लोन वुल्फ की तरह घटना को अंजाम दे रहे थे. उन का किसी आतंकी संगठन से संबंध भी नहीं पाया गया.

आतंक की सिरफिरी ब्रैंडिंग

लोन वुल्फ सिर्फ हमले ही नहीं करता बल्कि कभी उन के हमले बहुत छोटे स्तर के भी होते हैं. दक्षिण जरमनी में एक सिरफिरे शख्स ने 4 लोगों को ट्रेन में कुल्हाड़ी मार कर जख्मी कर दिया. हमलावर की कुल्हाड़ी का शिकार हुए 3 लोग गंभीररूप से घायल हुए, जबकि एक को हलकी चोट आई. यह घटना बवेरिया में वुर्जबर्ग और ट्रेचलिंगन के बीच एक लोकल ट्रेन में हुई. हमलावर को पुलिस ने ढेर कर दिया. चाकू और कुल्हाड़ी से लैस इस हमलावर की पहचान 17 साल के अफगानी युवक के रूप में हुई.

ये सभी ऐसे आतंकी थे जिन्हें आज की भाषा में लोन वुल्फ यानी अकेला भेडि़या या अकेला हमलावर कहा जाता है. ये आईएसआईएस की रणनीति थी जो जहां है वहीं रहे और हमले का मौका तलाशता रहे, जब मौका मिले अपने निशाने पर हमला बोल दे. पहली बार किसी आतंकवादी संगठन ने लोन वुल्फ का फंडा अपनाया है. यह बेहद खतरनाक है क्योंकि इस के लिए किसी खास ट्रेनिंग या पैसे की जरूरत पडती है, सिर्फ दिमागी ब्रेन वौश चाहिए.

लोन वुल्फ की ये आतंकी घटनाएं इस तथ्य की ओर संकेत करती हैं कि इसलामिक स्टेट एक स्थायी मानसिक अवस्था बन चुका है. दरअसल

इस मामले में आईएसआईएस अलकायदा से बहुत आगे है. अलकायदा महज आतंक फैलाने का काम कर रहा था तो आईएसआईएस वैचारिक आतंकवाद का एक ऐसा विचार, जो आम से दिखने वाले साधारण लोगों को हिंसक तरीके अपनाने के लिए उकसाता है.

जिस तरह देसी उत्पाद ग्लोबल ब्र्रैंड का ठप्पा लगते ही आकर्षण का केंद्र बन जाता है वैसे ही किसी भी तरह की हिंसा में आईएसआईएस का ठप्पा लगते ही वह वैश्विक घटना में बदल जाती है. उन के पीछे बड़ी संगठित ताकत सक्रिय रहती थी.

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आतंक की आर्थिक रणनीति

अब आतंकवाद के नए रूप में किसी संगठन को लंबे अरसे तक योजना बना कर करोड़ों रुपए खर्च कर हमले करवाने की जरूरत नहीं, बल्कि कोई भी अकेला इंसान इन्हें अंजाम दे कर दुनियाभर में दहशत फैला सकता है. लेकिन अब दुनियाभर में ऐसी ही दहशत पैदा करने के लिए 1 या 2 लोग ही काफी होंगे.

वह किसी एक जीप या कार पर सवार हो किसी भीड़ को कुचलता हुआ निकल सकता है या फिर रसोई में काम आने वाले चाकू की मदद से ही किसी भीड़ वाले इलाके में एकसाथ दसों लोगों का कत्ल कर सकता है.

ऐसी हरकत चीन के शिनच्यांग में देखी गई है. ऐसे इंसान के लिए कोई धार्मिक आतंकवादी या अलगाववादी संगठन प्रेरणा का स्रोत बनता है. उसे संगठन से मदद की कोई जरूरत नहीं होती और न ही उस के निर्देशों की जरूरत होती है.  ऐसे लोग कई देशों के लिए एक बड़ी परेशानी बने हुए हैं.

बहरहाल, लोन वुल्फ जिस तरह पनप रहे हैं उन से निबटने के लिए सैन्य या पुलिस ताकत से काम नहीं चलेगा. ऐसे तत्त्व अब हर समाज में नजर आ रहे हैं.