सरस सलिल विशेष

संगीत में टौपर बने गणेश को यह भी पता नहीं है कि गायन में अंतरा और मुखड़ा किस चिड़िया का नाम है. सारेगामा को हारमोनियम पर बजाना तो दूर वह बोल भी नहीं सकता है. उसे न तो किसी संगीतकार का नाम पता है और न ही किसी क्लासिकल गायक के बारे में रत्तीभर जानकारी है. इस के बाद भी बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने उसे साल 2017 के इंटर का टौपर बना दिया. गणेश को संगीत की लिखित परीक्षा में 100 में से 83 और प्रैक्टिकल में 70 में से 65 नंबर मिले थे. उसे हिंदी में 92, इतिहास में 80, समाजशास्त्र में 80 और मनोविज्ञान में 59 नंबर मिले थे.

कुछ इसी तरह की कहानी पिछले साल की स्टेट टौपर रूबी राय की भी थी, जिसे इतना भी पता नहीं था कि किस सब्जैक्ट में किस चीज की पढ़ाई होती है. इंटर में आर्ट्स टौपर रही रूबी राय से जब यह पूछा गया था कि पौलिटिकल साइंस में किस चीज की पढ़ाई होती है, तो उस ने कुछ देर सोचने के बाद जवाब दिया था कि पौलिटिकल साइंस में खाना बनाने की पढ़ाई होती है. रूबी राय को कुल 500 में से 444 नंबर मिले थे.

इस साल भी बिहार में इंटरमीडिएट की आर्ट्स की परीक्षा में स्टेट टौपर बने गणेश पर कई तरह की गड़बड़ी करने का मामला दर्ज हो चुका है और इस के साथ ही एक बार फिर बिहार की पढ़ाईलिखाई के सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं. इस साल के स्टेट टौपर पर उम्र की हेराफेरी करने का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. फर्जी आर्ट्स टौपर गणेश कुमार के पटना के मुसल्लहपुर महल्ले के घर से कई दस्तावेज बरामद किए गए हैं.

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के प्रशाखा पदाधिकारी विपिन कुमार सिंह ने जन्मदिन छिपाने और गलत नाम दिखाने के आरोप में गणेश, कालेज के संचालक और प्रिंसिपल समेत दूसरों के खिलाफ आईपीसी की धारा 417, 418, 419, 420, 467, 468, 208, 201 और 120बी के तहत केस दर्ज कराया था. रिजल्ट आने के दूसरे ही दिन गणेश का रिजल्ट रद्द कर दिया गया था.

पटना के एसएसपी मनु महाराज ने बताया कि गणेश झारखंड के गिरीडीह में कोलकाता की रसेल नौनबैंकिंग फाइनैंस कंपनी के लिए काम करता था. वह कंपनी ग्राहकों से 70 लाख रुपए ले कर फरार हो गई थी. गणेश भी मार्केट से उठाए गए 15 लाख रुपए दबा कर बैठ गया था. जब लोग उस से पैसे मांगने लगे, तो साल 2013 में वह पटना भाग आया. पटना के भीड़भाड़ वाले इलाके मुसल्लहपुर में वह किराए का मकान ले कर रहने लगा.

पटना पहुंचने के बाद गणेश ने सरकारी नौकरी पाने के लिए हाथपैर मारने शुरू कर दिए. सरकारी नौकरी पाने की उस की उम्र निकल चुकी थी. इसी बीच उस की मुलाकात संजय सिंह नाम के शख्स से हुई. संजय सिंह ने उस की मुलाकात फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह से कराई. उसी के साथ मिल कर गणेश ने अपनी उम्र कम कर जाली प्रमाणपत्र बनवा लिया था. उस ने संगीत सब्जैक्ट ले कर परीक्षा दी थी और जुगाड़पैरवी लगा कर टौपर भी बन गया. उस का मकसद यही था कि इंटर में टौपर बन जाने के बाद उसे आसानी से सरकारी नौकरी मिल जाएगी.

गिरीडीह शहर के सीआरएसआर हाईस्कूल से साल 1990 में गणेश ने 10वीं की परीक्षा पास की थी और उस के सर्टिफिकेट में नाम गणेश राम दर्ज है. गणेश ने साल 2015 में कम उम्र वाला जाली प्रमाणपत्र बनवाया. साल 1992 में उस ने झुमरी तिलैया, कोडरमा के रामलखन सिंह इंटर कालेज से इंटर की परीक्षा दी थी. दोनों ही इम्तिहान में वह सैकंड डिवीजन से पास हुआ था. उस के बाद उस ने साल 2015 में ही समस्तीपुर के लक्ष्मीनियां इलाके के संजय गांधी हाईस्कूल से दोबारा 10वीं की परीक्षा दी. उस के बाद साल 2017 में उस ने उसी कालेज से इंटर की परीक्षा दी और आर्ट्स का टौपर बन गया. गणेश और उस के कालेज के खिलाफ पटना के कोतवाली थाने में कांड संख्या-270/2017 दर्ज किया गया.

दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल भी इंटर टौपर घोटाले के मामले में कोतवाली थाने में दर्ज किए गए मामले की संख्या-270/2016 है. दोनों इंटर टौपर घोटाले का केस नंबर एक ही हो गया है. बस, साल अलग है.

2 जून, 2017 को गणेश को गिरफ्तार किया गया और उस के मैट्रिक और इंटर के रिजल्ट को रद्द कर दिया गया. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की टौपर लिस्ट से गणेश का नाम हटा दिया गया.

गणेश की असली जन्मतिथि 1 नवंबर, 1975 है. साल 1990 में मैट्रिक और साल 1992 में इंटर पास कर चुके गणेश ने जाली जन्म प्रमाणपत्र बना कर दोबारा साल 2015 और साल 2017 में मैट्रिक और इंटर का इम्तिहान दिया. जाली जन्म प्रमाणपत्र में उस का जन्मदिन 2 जून, 1993 दर्ज है.

गणेश के टौपर होने पर जब सवाल उठने लगे, तो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने कहा कि गणेश के टौपर होने में कोई शक ही नहीं है. उन्होंने बाकायदा प्रैस कौंफ्रैंस कर के कहा कि किसी भी हाल में टौपर को बदला नहीं जाएगा. बोर्ड के पास उस की सारी कौपियां मौजूद हैं.

अध्यक्ष आनंद किशोर ने यह भी दावा किया था कि गणेश दलित परिवार से है, इसलिए उस ने देरी से पढ़ाई शुरू की और साल 2015 में ही उस ने मैट्रिक की परीक्षा पास की थी.

2 बच्चों के पिता गणेश ने साफ लहजे में बताया कि उस ने सरकारी नौकरी पाने के लिए कम उम्र कर के दोबारा परीक्षा दी. इस के लिए उसे कोई पछतावा नहीं है. उस ने अपने बच्चों की रोजीरोटी के लिए ऐसा किया.

फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने के सवाल पर गणेश कहता है कि पढ़नालिखना क्या गुनाह है? गरीब होना क्या गुनाह है? उस ने दावा किया कि उस ने मेहनत से पढ़ाई कर के टौप किया है.