सरस सलिल विशेष

गोवा में नए साल के जश्न के बाद एक नौजवान की रहस्मयी मौत के मद्देनजर पूछताछ के दौरान एक लड़की के अंग में मिर्च का पाउडर डाल देने का मामला सामने आया. लेकिन यह कोई अकेला मामला नहीं था. औरतों के नाजुक अंग पर इस तरह की दरिंदगी की वारदात आम है. औरत तो औरत, छोटी बच्चियों के साथ भी ऐसे वाकिए पेश आते हैं. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के परपोड़ी इलाके में दुकलहीन बाई नामक एक औरत पर तांत्रिक होने के शक के चलते पूरे गांव के सामने उस के सारे कपड़े उतारे गए और फिर उस के अंग में मिर्च का पाउडर डाल दिया गया.

करनाल, हरियाणा में एक रिकशा चलाने वाले ने अपनी पत्नी पर बदचलनी का आरोप लगा कर उस के अंग में मिर्च का पाउडर डाल दिया था. शर्म के मारे उस औरत ने किसी से कुछ नहीं कहा, लेकिन जब हालत बिगड़ती चली गई, तो मामला सामने आया. तब जा कर पुलिस ने अस्पताल में उस का इलाज कराया.

आरोपी के बेटे के मुताबिक, उस के पिता ने ऐसा घिनौना काम पहले भी कई बार किया था. पश्चिम बंगाल में वीरभूम जिले के नानूर थाने के कीर्णाहार इलाके में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच बमबारी की घटना हुई.

इस घटना के दौरान तृणमूल कांग्रेस के पंचायत प्रधान के घर पर भी बम से हमला हुआ. इस घटना में पुलिस ने पाडुई के सात्तोर गांव के शेख मिठुन नाम के एक शख्स को नामजद किया था.

बताया जाता है कि शेख मिठुन भाजपा का समर्थक है और स्थानीय भाजपा नेताओं के उकसावे में आ कर उस ने पंचायत प्रधान के घर पर बम से हमला किया था. इस हमले में शेख मिठुन खुद भी घायल हुआ था.

पुलिस का मानना है कि हमले की घटना के बाद पानागढ़ के एक प्राइवेट नर्सिंगहोम में इलाज के बाद वह अपनी काकी के मायके में जा छिपा था. उधर मामले की जांच टीम तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के साथ शेख मिठुन की गिरफ्तारी के लिए उस के घर गई. लेकिन घर पर वह नहीं मिला, तो पुलिस ने देवशाला गांव में उस के रिश्तेदारों के घर पर छापा मारा. वहां भी शेख मिठुन को न पा कर तृणमूल कांग्रेस नेताओं के दबाव में आ कर पुलिस मिठुन की काकी सईफुन्नेसा बीबी को उठा लाई.

आरोप है कि फरार शेख मिठुन का पता पूछने के लिए पाडुई थाने के प्रभारी अमरजीत विश्वास, बोलपुर थाने के अफसरों और स्थानीय तृणमूल कांग्रेस

के 2 नेताओं की मौजूदगी में 18 जनवरी की ठिठुरती ठंड में रातभर जंगल में सईफुन्नेसा बीबी पर बेरहमी से जोरजुल्म किया गया.

सब से पहले तो सईफुन्नेसा बीबी को जंगल में एक पेड़ से बांध कर पीटा गया. उसे इतना पीटा गया कि पुलिस की 2-2 लाठियां टूट गईं. पिटाई से सईफुन्नेसा बीबी के दोनों हाथों की उंगलियां टूट गई थीं. ब्लेड से उस के शरीर पर चोट पहुंचाई गई. दोनों हथेलियों को ब्लेड से काट कर जख्मी कर दिया गया.

इतना ही नहीं, सईफुन्नेसा बीबी के अंग में खुजली और जलन पैदा करने वाली जहरीली पत्तियों को रगड़ दिया गया. इतने जोरजुल्म के बाद सईफुन्नेसा बीबी जब बेहोश हो गई, तब थाने ला कर उसे रातभर के लिए पटक दिया.

गंभीर रूप से जख्मी हालत में पुलिस ने सुबह उसे छोड़ दिया. गिरतेपड़ते सुबह जब वह किसी तरह गांव पहुंची, तो घर वाले उसे सिउड़ी के स्वास्थ्य केंद्र ले गए. बाद में स्वास्थ्य केंद्र ने उसे वीरभूम जिला अस्पताल को रैफर कर दिया.

जब पीडि़ता का पति सबूर शेख पाडुई थाने में पुलिस के खिलाफ शिकायत का मामला दर्ज कराने पहुंचा, तो पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से न केवल मना किया, बल्कि उसे धक्के दे कर बाहर कर दिया. पुलिस की यह दरिंदगी देख गांव वालों के बीच गुस्सा भड़क उठा. तब घटना का राजनीतिक फायदा लेने के लिए वामपंथियों से ले कर कांग्रेसी भी बीच में कूद पड़े. मामला फिलहाल कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है.

ऐसी ही एक घटना पिछले साल टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के तहत भी सामने आई थी. टीटागढ़ की एक औरत संध्या सेन ने अपनी 6 साल की बेटी को बिस्तर में पेशाब करने की सजा के तौर पर उस के अंग में मिर्ची का पाउडर डाल दिया था.

टीटागढ़ पुलिस के मुताबिक, श्यामल सेन और संध्या के कोई औलाद नहीं थी. उन्होंने 6 साल की एक बच्ची को गोद लिया था. दरअसल, बच्ची के मातापिता की मौत हो गई थी. वह अपनी एक काकी के यहां पलबढ़ रही थी. लेकिन काकी ने माली तंगी के चलते सेन दंपती को बच्ची दे दी थी. गोद लेने के लिए कानूनी खानापूरी नहीं की गई थी.

बहरहाल, यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने सेन दंपती को गिरफ्तार किया और गंभीर हालत में बच्ची को कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में इलाज के लिए भेजा. इलाज के बाद बच्ची की काउंसलिंग चल रही है.

हालांकि गिरफ्तारी के बाद श्यामल सेन को जमानत मिल गई, लेकिन संध्या सेन को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. फिलहाल तो इस मामले की जांच का जिम्मा जिला बाल कल्याण समिति के पास है.