सरस सलिल विशेष

3 जुलाई, 2018 की बात है. शाम 6 बजे थाना सजेती का मुंशी अजय पाल रजिस्टर पर दस्तखत कराने थाना परिसर स्थित दरोगा पच्चालाल गौतम के आवास पर पहुंचा. दरोगाजी के कमरे का दरवाजा बंद था, लेकिन कूलर चल रहा था. अजय पाल ने सोचा कि दरोगाजी शायद सो रहे होंगे. यही सोचते हुए उस ने बाहर से ही आवाज लगाई, ‘‘दरोगाजी…दरोगाजी.’’

अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उस ने दरवाजे को अंदर की ओर धकेला. दरवाजा अंदर से बंद नहीं था, हलके दबाव से ही खुल गया. अजय पाल ने कमरे के अंदर पैर रखा तो उस के मुंह से चीख निकल गई. कमरे के अंदर दरोगा पच्चालाल की लाश पड़ी थी. किसी ने उन की हत्या कर दी थी.

बदहवास सा मुंशी अजय पाल थाना कार्यालय में आया और उस ने यह जानकारी अन्य पुलिसकर्मियों को दी. यह खबर सुनते ही थाना सजेती में हड़कंप मच गया. घबराए अजय पाल की सांसें दुरुस्त हुईं तो उस ने वायरलैस पर दरोगा पच्चालाल गौतम की थाना परिसर में हत्या किए जाने की जानकारी कंट्रोल रूम को और वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी.

सूचना पाते ही एसपी (ग्रामीण) प्रद्युम्न सिंह, एसपी (क्राइम) राजेश कुमार यादव, सीओ आर.के. चतुर्वेदी, इंसपेक्टर दिलीप बिंद तथा देवेंद्र कुमार दुबे थाना सजेती पहुंच गए. पुलिस अधिकारी पच्चालाल के कमरे में पहुंचे तो वहां का दृश्य देख सिहर उठे.

कमरे के अंदर फर्श पर 58 वर्षीय दरोगा पच्चालाल गौतम की खून से सनी लाश पड़ी थी. अंडरवियर के अलावा उन के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था. खून से सना चाकू लाश के पास पड़ा था. खून से सना एक तौलिया बैड पर पड़ा था. हत्यारों ने दरोगा पच्चालाल का कत्ल बड़ी बेरहमी से किया था.

पच्चालाल की गरदन, सिर, छाती व पेट पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए गए थे. आंतों के टुकड़े कमरे में फैले थे और दीवारों पर खून के छींटे थे. दरोगा पच्चालाल के शरीर के घाव बता रहे थे कि हत्यारों के मन में उन के प्रति गहरी नफरत थी और वह दरोगा की मौत को ले कर आश्वस्त हो जाना चाहते थे. बैड से ले कर कमरे तक खून ही खून फैला था.

छींटों के अलावा दीवार पर खून से सने हाथों के पंजे के निशान भी थे. इन निशानों में अंगूठे का निशान नहीं था. घटनास्थल को देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे दरोगा पच्चालाल गौतम ने हत्यारों से अंतिम सांस तक संघर्ष किया हो.

पुलिस अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि आईजी आलोक सिंह तथा एसएसपी अखिलेश कुमार भी थाना सजेती आ गए. वह अपने साथ फोरैंसिक टीम और डौग स्क्वायड को लाए थे. दोनों पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तो उन के माथे पर बल पड़ गए.

बेरहमी से किए गए इस कत्ल को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया. फोरैंसिक टीम ने चाकू और कमरे की दीवार से फिंगरप्रिंट उठाए. डौग स्क्वायड ने घटनास्थल पर डौग को छोड़ा. डौग लाश व कमरे की कई जगहों को सूंघ कर हाइवे तक गया और वापस लौट आया. वह ऐसी कोई हेल्प नहीं कर सका, जिस से हत्यारे का कोई सूत्र मिलता.

कारण नहीं मिल रहा था बेरहमी से किए गए कत्ल का

मृतक पच्चालाल के आवास की तलाशी ली गई तो पता चला, हत्यारे उन का पर्स, घड़ी व मोबाइल साथ ले गए थे. किचन में रखे फ्रिज में अंडे व सब्जी रखी थी. कमरे में शराब व ग्लास आदि नहीं मिले, जिस से स्पष्ट हुआ कि हत्या से पहले कमरे में बैठ कर शराब नहीं पी गई थी.

अनुमान लगाया गया कि हत्यारा दरोगा पच्चालाल का बेहद करीबी रहा होगा, जिस से वह आसानी से आवास में दाखिल हो गया और बाद में उस ने अपने साथियों को भी बुला लिया.

आईजी आलोक सिंह तथा एसएसपी अखिलेश कुमार यह सोच कर चकित थे कि थाना कार्यालय से महज 20 मीटर की दूरी पर दरोगा पच्चालाल का आवास था. कमरे में चाकू से गोद कर उन की निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी गई और उन की चीखें थाने के किसी पुलिसकर्मी ने नहीं सुनीं, इस से पुलिसकर्मी भी संदेह के घेरे में थे.

लेकिन इस में यह बात भी शामिल थी कि दरोगा पच्चालाल गौतम के आवास में 2 दरवाजे थे. एक दरवाजा थाना परिसर की ओर खुलता था, जबकि दूसरा हाइवे के निकट के खेतों की ओर खुलता था. पता चला कि पच्चालाल के करीबी लोगों का आनाजाना हाइवे की तरफ खुलने वाले दरवाजे से ज्यादा होता था. हाइवे पर ट्रकों की धमाचौकड़ी मची रहती थी, जिस की तेज आवाज कमरे में भी गूंजती थी. संभव है, दरोगा की चीखें ट्रकों और कूलर की आवाज में दब कर रह गई हो और किसी पुलिसकर्मी को सुनाई न दी हो.

एसएसपी अखिलेश कुमार ने थाना सजेती के पुलिसकर्मियों से पूछताछ की तो पता चला कि दरोगा पच्चालाल गौतम मूलरूप से सीतापुर जिले के थाना मानपुरा क्षेत्र के रामकुंड के रहने वाले थे.

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उन्होंने 2 शादियां की थीं. पहली पत्नी कुंती की मौत के बाद उन्होंने किरन नाम की युवती से प्रेम विवाह किया था. पहली पत्नी के बच्चे रामकुंड में रहते थे, जबकि दूसरी पत्नी किरन कानपुर शहर में सूर्यविहार (नवाबगंज) में अपने बच्चों के साथ रहती थी.

पारिवारिक जानकारी मिलते ही एसएसपी अखिलेश कुमार ने दरोगा पच्चालाल की हत्या की खबर उन के घर वालों को भिजवा दी. खबर मिलते ही दरोगा की पत्नी किरन थाना सजेती पहुंच गई. पति की क्षतविक्षत लाश देख कर वह दहाड़ मार कर रोने लगी. महिला पुलिसकर्मियों ने उसे सांत्वना दे कर शव से अलग किया.

कुछ देर बाद दरोगा के बेटे सत्येंद्र, महेंद्र, जितेंद्र व कमल भी आ गए. पिता का शव देख कर वे भी रोने लगे. पुलिसकर्मियों ने उन्हें धैर्य बंधाया और पंचनामा भर कर शव पोस्टमार्टम के लिए लाला लाजपतराय चिकित्सालय भेज दिया. आलाकत्ल चाकू को परीक्षण हेतु सील कर के रख लिया गया.

4 जुलाई, 2018 को मृतक पच्चालाल के शव का पोस्टमार्टम हुआ. पोस्टमार्टम के बाद शव को पुलिस लाइन लाया गया, जहां एसएसपी अखिलेश कुमार, एसपी (ग्रामीण) प्रद्युम्न सिह व अन्य पुलिस अधिकारियों ने उन्हें सलामी दे कर अंतिम विदाई दी.

इंसपेक्टर देवेंद्र कुमार, दिलीप बिंद व सजेती थाने के पुलिसकर्मियों ने पच्चालाल के शव को कंधा दिया. इस के बाद पच्चालाल के चारों बेटे शव को अपने पैतृक गांव  रामकुंड, सीतापुर ले गए, जहां बड़े बेटे सत्येंद्र ने पिता की चिता को मुखाग्नि दे कर अंतिम संस्कार किया. अंतिम संस्कार में किरन व उस के बच्चे शामिल नहीं हुए.

दरोगा पच्चालाल की हत्या की खबर कानपुर से लखनऊ तक फैल गई थी. यह बात एडीजे अविनाश चंद्र के संज्ञान में भी थी. इसी के मद्देनजर एसएसपी अखिलेश कुमार ने दरोगा हत्याकांड को बेहद गंभीरता से लिया और इस के खुलासे के लिए एक विशेष पुलिस टीम गठित की.

जांच के लिए बनी स्पैशल टीम

इस टीम में उन्होंने क्राइम ब्रांच और सर्विलांस सेल तथा एसएसपी की स्वान टीम के तेजतर्रार व भरोसेमंद पुलिसकर्मियों को शामिल किया. क्राइम ब्रांच से सुनील लांबा तथा एसओजी से राजेश कुमार रावत, सर्विलांस सेल से शिवराम सिंह, राहुल पांडे, सिपाही बृजेश कुमार, मोहम्मद आरिफ, हरिशंकर और सीमा देवी तथा एसएसपी स्वान टीम से संदीप कुमार, राजेश रावत तथा प्रदीप कुमार को शामिल किया गया.

इस के अलावा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के बेहतरीन जासूस कहे जाने वाले 3 इंसपेक्टरों देवेंद्र कुमार दुबे, दिलीप बिंद, मनोज रघुवंशी तथा सीओ (घाटमपुर) आर.के. चतुर्वेदी को शामिल किया गया.

पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी अध्ययन किया. रिपोर्ट में पच्चालाल के शरीर पर 19 गहरे जख्म बताए गए थे जो सिर, गरदन, छाती, पेट व हाथों पर थे. इस टीम ने उन मामलों को भी खंगाला, जिन की जांच पच्चालाल ने की थी. लेकिन ऐसा कोई मामला नहीं मिला, जिस से इस हत्या को जोड़ा जा सकता. इस से साफ हो गया कि क्षेत्र के किसी अपराधी ने उन की हत्या नहीं की थी.

पुलिस टीम ने थाना सजेती में लगे सीसीटीवी फुटेज भी देखे, मगर उस में दरोगा के आवास में कोई भी आतेजाते नहीं दिखा. इस का मतलब हत्यारे पिछले दरवाजे से ही आए थे और हत्या को अंजाम दे कर उसी दरवाजे से चले गए.

टीम ने कुछ दुकानदारों से पूछताछ की तो शराब के ठेके के पास नमकीन बेचने वाले दुकानदार अवधेश ने बताया कि 2 जुलाई को देर शाम उस ने दरोगा पच्चालाल के साथ सांवले रंग के एक युवक को देखा था. उस युवक के साथ दरोगाजी ने ठेके से अंगरेजी शराब की बोतल खरीदी थी. साथ ही उस की दुकान से नमकीन का पैकेट भी लिया था.

पैसे दरोगाजी ने ही दिए थे. अवधेश ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ था, जब दरोगाजी ने पैसे दिए थे. इस के पहले दरोगाजी के साथ वाला व्यक्ति ही पैसे देता था. युवक की बातचीत से लगता था कि वह दरोगाजी का बेहद करीबी है.

दुकानदार अवधेश ने जो बताया, उस से साफ हो गया कि दरोगा पच्चालाल के साथ जो युवक था, वह उन का काफी करीबी था. इस जानकारी के बाद टीम ने दरोगा के खास करीबियों पर ध्यान केंद्रित किया. इस में उस की पत्नी किरन, दरोगा के 4 बेटे और कुछ अन्य लोग शामिल थे. पच्चालाल के बेटों से पूछताछ करने पुलिस टीम रामकुंड, सीतापुर पहुंची.

पूछताछ में सत्येंद्र, महेंद्र, जितेंद्र व कमल ने बताया कि उन के पिता का न तो किसी से विवाद था और न ही जमीनजायदाद का कोई झगड़ा था. सौतेली मां किरन से भी जमीन या मकान के बंटवारे पर कोई विवाद नहीं था. सौतेली मां किरन अपने बच्चों के साथ कानपुर में रहती थी.

पच्चालाल दोनों परिवारों का अच्छी तरह पालनपोषण कर रहे थे. चारों बेटों को उन्होंने कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी थी. सत्येंद्र ने यह भी बताया कि 6 महीने पहले पिता ने उस की शादी धूमधाम से की थी.

शादी में सौतेली मां किरन भी खुशीखुशी शामिल हुई थीं. शादीबारात की सारी जिम्मेदारी उन्होंने ही उठाई थी. शादी में बहू के जेवर, कपड़ा व अन्य सामान पिता के सहयोग से उन्होंने ही खरीदा था. किरन से उन लोगों का कोई विवाद नहीं था.

जितेंद्र और किरन आए संदेह के घेरे में

मृतक दरोगा पच्चालाल के बेटों से पूछताछ कर पुलिस टीम कानपुर लौट आई. इस के बाद यह टीम थाना नवाबगंज के सूर्यविहार पहुंची, जहां दरोगा की दूसरी पत्नी किरन किराए के मकान में रहती थी. पुलिस को देख कर किरन रोनेपीटने लगी. पुलिस ने उसे सांत्वना दी. बाद में उस ने बताया कि दरोगा पच्चालाल ने उस से तब प्रेम विवाह किया था, जब वह बेनीगंज थाने में तैनात थे. दरोगा से किरन को 3 संतानें हुई थीं, एक बेटा व 2 बेटियां.

किरन रो जरूर रही थी, लेकिन उस की आंखों से एक भी आंसू नहीं टपक रहा था. उस के रंग, ढंग और पहनावे से ऐसा नहीं लगता था कि उस के पति की हत्या हो गई है. घर में किसी खास के आनेजाने के संबंध में पूछने पर वह साफ मुकर गई. लेकिन पुलिस टीम ने जब किरन के बच्चों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि जितेंद्र अंकल घर आतेजाते हैं, जो पापा के दोस्त हैं.

पुलिस टीम ने जब किरन से जितेंद्र उर्फ महेंद्र यादव के बारे में पूछताछ की तो उस का चेहरा मुरझा गया. उस ने घबराते हुए बताया कि जितेंद्र उस के दरोगा पति का दोस्त था. वह रोडवेज बस चालक है और रोडवेज कालोनी में रहता है. पूछताछ के दौरान पुलिस टीम ने बहाने से किरन का मोबाइल ले लिया.

पुलिस टीम में शामिल सर्विलांस सेल के प्रभारी शिवराम सिंह ने किरन के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि दरोगा की हत्या के पहले व बाद में किरन की एक नंबर पर बात हुई थी.

उस मोबाइल नंबर की जानकारी जुटाई गई तो पता चला वह नंबर जितेंद्र उर्फ महेंद्र का था. पच्चालाल के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स में भी जितेंद्र का नंबर था.

दूसरी पत्नी बनी हत्या की वजह

जितेंद्र शक के घेरे में आया तो पुलिस टीम ने देर रात उसे रोडवेज कालोनी स्थित उस के घर से हिरासत में ले लिया और थाना सजेती ले आई. उस से दरोगा पच्चालाल की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो उस ने हत्या से संबंधित कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया.

हां, उस ने दोस्ती और दरोगा के घर आनेजाने की बात जरूर स्वीकार की. जब पुलिस ने अपने अंदाज में पूछताछ की तो जितेंद्र ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया और उस ने दरोगा पच्चालाल की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

जितेंद्र उर्फ महेंद्र यादव ने बताया कि किरन से उस के नाजायज संबंध बन गए थे. दरोगा पच्चालाल को जानकारी हुई तो वह किरन को प्रताडि़त करने लगा. पच्चालाल प्यार में बाधक बना तो उस ने और किरन ने मिल कर उस की हत्या की योजना बनाई.

योजना बनाने के बाद उन्होंने एक लाख रुपए में दरोगा की हत्या की सुपारी निजाम अली को दे दी, जो विधूना का रहने वाला है. निजाम अली ने उसे पसहा, विधूना निवासी राघवेंद्र उर्फ मुन्ना से मिलवाया. इस के बाद तीनों ने मिल कर 2 जुलाई की रात दरोगा की हत्या कर दी और फरार हो गए.

पुलिस टीम ने जितेंद्र की निशानदेही पर विधूना से निजाम अली तथा पसहा गांव से राघवेंद्र उर्फ मुन्ना को गिरफ्तार कर लिया. इन तीनों को थाना सजेती की हवालात में डाल दिया गया. इस के बाद पुलिस टीम सूर्यविहार, नवाबगंज पहुंची और यह कह कर किरन को साथ ले आई कि दरोगा पच्चालाल के हत्यारे पकड़े गए हैं.

किरन थाना सजेती पहुंची तो उस ने अपने प्रेमी जितेंद्र तथा उस के साथियों को हवालात में बंद देखा. उन्हें देखते ही वह सब कुछ समझ गई. अब उस के लिए पुलिस को गुमराह करना मुमकिन नहीं था. उस ने पति की हत्या में शामिल होने का जुर्म कबूल कर लिया. जितेंद्र ने दरोगा पच्चालाल का लूटा गया पर्स, घड़ी व मोबाइल भी बरामद करा दिए, जिन्हें उस ने घर में छिपा कर रखा था.

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चूंकि दरोगा पच्चालाल के हत्यारों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था, इसलिए पुलिस ने मुंशी अजयपाल को वादी बना कर भादंवि की धारा 302, 201, 394 तथा 120बी के तहत जितेंद्र उर्फ महेंद्र, निजाम अली, राघवेंद्र उर्फ मुन्ना तथा किरन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया.

7 जुलाई को एसएसपी अखिलेश कुमार ने प्रैस कौन्फ्रैंस की, जिस में उन्होंने हत्या का खुलासा करने वाली टीम को 25 हजार रुपए देने की घोषणा की. उन्होंने गिरफ्तार किए गए दरोगा के हत्यारों को पत्रकारों के सामने भी पेश किया, जहां हत्यारों ने अवैध रिश्तों में हुई हत्या का खुलासा किया.

पच्चालाल गौतम सीतापुर जिले के थाना मानपुरा क्षेत्र के गांव रामकुंड के रहने वाले थे. उन के परिवार में पत्नी कुंती देवी के अलावा 4 बेटे सत्येंद्र, महेंद्र, जितेंद्र व कमल थे. पच्चालाल पुलिस विभाग में दरोगा के पद पर तो तैनात थे ही, उन के पास खेती की जमीन भी थी, जिस में अच्छी पैदावार होती थी. कुल मिला कर उन की आर्थिक स्थिति अच्छी थी. घर में किसी तरह की कोई कमी नहीं थी.

पच्चालाल की पत्नी कुंती देवी घरेलू महिला थीं. वह ज्यादा पढ़ीलिखी तो नहीं थीं, लेकिन स्वभाव से मिलनसार थीं. कुंती पति के साथसाथ बच्चों का भी ठीक से खयाल रखती थीं. पच्चालाल भी कुंती को बेहद चाहते थे, उन की हर जरूरत को पूरा करते थे. लेकिन बीतते समय में इस खुशहाल परिवार पर ऐसी गाज गिरी कि सब कुछ बिखर गया.

सन 2001 में कुंती देवी बीमार पड़ गईं. पच्चालाल ने पत्नी का इलाज पहले सीतापुर, लखनऊ व कानपुर में अच्छे डाक्टरों से कराया. पत्नी के इलाज में दरोगा ने पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन काल के क्रूर हाथों से वह पत्नी को नहीं बचा सके. पत्नी की मौत से पच्चालाल खुद भी टूट गए और बीमार रहने लगे.

जैसेजैसे समय बीतता गया, वैसेवैसे पत्नी की मौत का गम कम होता गया. पच्चालाल ड्यूटी और बच्चों के पालनपोषण पर पूरा ध्यान देने लगे. पच्चालाल का दिन तो सरकारी कामकाज में कट जाता था, लेकिन रात में पत्नी की कमी खलने लगती थी. पत्नी के बिना वह तनहा जिंदगी जी रहे थे. अब उन्हें अहसास हो गया था कि पत्नी के बिना आदमी का जीवन कितना अधूरा होता है.

सन 2002 में दरोगा पच्चालाल को हरदोई जिले के थाना बेनीगंज की कल्याणमल चौकी में तैनाती मिली. इस चौकी का चार्ज संभाले अभी 2 महीने ही बीते थे कि पच्चालाल की मुलाकात एक खूबसूरत युवती किरन से हुई. किरन अपने पति नरेश की प्रताड़ना की शिकायत ले कर चौकी आई थी.

किरन के गोरे गालों पर बह रहे आंसू, दरोगा पच्चालाल के दिल में हलचल मचाने लगे. उन्होंने सांत्वना दे कर किरन को चुप कराया तो उस ने बताया कि उस का पति नरेश, शराबी व जुआरी है. नशे में वह उसे जानवरों की तरह पीटता है. वह पति की प्रताड़ना से निजात चाहती है.

खूबसूरत किरन पहली ही नजर में दरोगा पच्चालाल के दिलोदिमाग पर छा गई. उन्होंने किरन के पति नरेश को चौकी बुलवा लिया और किरन के सामने ही उस की पिटाई कर के हिदायत दी कि अब वह किरन को प्रताडि़त नहीं करेगा. दरोगा की पिटाई और जेल भेजने की धमकी से नरेश डर गया और किरन से माफी मांग ली.

इस के बाद दरोगा पच्चालाल हालचाल जानने के बहाने अकसर किरन के घर आनेजाने लगे. वह किरन से मीठीमीठी बातें करते थे. किरन भी उन की रसीली बातों में आनंद का अनुभव करने लगी थी. किरन का पति नरेश घर आने पर ऐतराज न करे, यह सोच कर पच्चालाल ने उस से दोस्ती गांठ ली. दोनों की नरेश के घर पर ही शराब की महफिल जमने लगी. पच्चालाल उस की आर्थिक मदद भी करने लगे.

घर आतेजाते पच्चालाल ने किरन को अपने प्रेम जाल में फंसा कर उस से नाजायज संबंध भी बना लिए. बाद में पच्चालाल ने किरन को ऐसे सब्जबाग दिखाए कि वह उस की पत्नी बनने को राजी हो गई. किरन राजी हुई तो पच्चालाल ने मंदिर में जा कर उस से प्रेम विवाह कर लिया.

विवाह के समय किरन 20-22 साल की थी, जबकि पच्चालाल 43 साल के. नरेश को किरन की बेवफाई का पता चला तो उस ने माथा पीट लिया. शराबी और जुआरी नरेश इतना सक्षम नहीं था कि दरोगा का मुकाबला कर पाता, लिहाजा वह चुप हो कर बैठ गया.

प्रेम विवाह करने के बाद किरन पच्चालाल की पत्नी बन कर हरदोई में रहने लगी. कुछ समय बाद दरोगा पच्चालाल का ट्रांसफर कानपुर हो गया. कानपुर में पच्चालाल ने नवाबगंज थाना क्षेत्र के सूर्यविहार में किराए पर एक मकान ले लिया और किरन के साथ रहने लगे. बाद में दरोगा पच्चालाल और किरन एक बेटे अमन तथा 2 बेटियों अर्चना व पारुल के मातापिता बने.

कुंती के चारों बेटों ने पिता द्वारा किरन से प्रेम विवाह करने का कोई विरोध नहीं किया था. इस की वजह यह भी थी कि पिता के अलावा उन्हें संरक्षण देने वाला कोई नहीं था. इस तरह दरोगा पच्चालाल 2 परिवारों का पालनपोषण करने लगे. पहली पत्नी के बच्चे गांव में तथा दूसरी पत्नी किरन और उस के बच्चे कानपुर शहर में रहते रहे. पच्चालाल को जब छुट्टी मिलती तो गांव चले जाते और बच्चों से मिल कर लौट आते.

किरन 3 बच्चों की मां जरूर बन गई थी, लेकिन अब भी यौवन से भरपूर थी. वह हर रात पति का संसर्ग चाहती थी, लेकिन इस से वंचित थी. दरोगा पच्चालाल अब तक 50 की उम्र पार कर चुके थे. उन की सैक्स में रुचि भी कम हो गई थी. पहल करने पर भी वह किरन से देह संबंध नहीं बनाते थे.

दरअसल, ड्यूटी करने के बाद पच्चालाल इतने थक जाते थे कि पीने और खाना खाने के बाद बैड पकड़ लेते थे. किरन रात भर तड़पती रहती थी.

उन्हीं दिनों किरन की निगाह जितेंद्र यादव पर पड़ी. जितेंद्र यादव औरैया जिले के सहायल थाना क्षेत्र में आने वाले पुरवा अहिरमा का रहने वाला था. कानपुर में वह नवाबगंज की रोडवेज कालोनी में रहता था और रोडवेज की बस का ड्राइवर था. पच्चालाल और जितेंद्र यादव गहरे दोस्त थे. दोनों का एकदूसरे के घर आनाजाना था. दोनों की महफिल एकदूसरे के घरों में अकसर जमती रहती थी.

किरन की निगाह थी जितेंद्र पर

जितेंद्र यादव शरीर से हृष्टपुष्ट और किरन का हमउम्र था. किरन को लगा कि वह उस की अधूरी ख्वाहिशों को पूरा कर सकता है. अत: उस ने जितेंद्र को लिफ्ट देनी शुरू कर दी. दोनों के बीच देवरभाभी का नाता था.

जबतब दोनों हंसीमजाक भी करने लगे. किरन अपने सुघड़ अंगों का प्रदर्शन कर के जितेंद्र को ललचाने लगी. किरन के हावभाव से जितेंद्र समझ गया कि किरन सैक्स की भूखी है, पहल की जाए तो जल्द ही उस की बांहों में समा जाएगी.

जितेंद्र यादव जब भी किरन के घर आता, बच्चों के लिए फल, मिठाई ले कर जाता. किरन से वह मीठीमीठी बातें करते हुए उसे ललचाई हुई नजरों से देखता. ऐसे ही एक रोज जितेंद्र आया, तो किरन को घर में अकेली देख कर उस से पूछा, ‘‘दरोगा भैया अभी तक नहीं आए?’’

किरन ने बेफिक्री से कहा, ‘‘सरकारी काम से बाहर गए हैं, 1-2 रोज बाद लौटेंगे.’’

जितेंद्र की बांछें खिल गईं. उस ने किरन के चेहरे पर नजरें गड़ाते हुए शरारत की, ‘‘भाभी, आप की रात कैसे कटेगी?’’

‘‘तुम जो हो.’’ किरन ने भी उसी अंदाज में जवाब दे दिया. किरन के खुले आमंत्रण से जितेंद्र का हौसला बढ़ गया. वह बोला, ‘‘तो मैं रात को आऊं?’’

‘‘मैं ने कब मना किया है.’’ किरन ने मादक अंगड़ाई ली.

रात गहराई तो जितेंद्र किरन के दरवाजे पर पहुंच गया. उस ने दरवाजा धकेला तो खुल गया. अंदर नाइट बल्ब जल रहा था. किरन पलंग पर लेटी थी. वह फुसफुसाई, ‘‘दरवाजा बंद कर के सिटकनी लगा दो.’’

जितेंद्र ने ऐसा ही किया और पलंग पर आ कर बैठ गया. दोनों के बीच बातों का सिलसिला जुड़ा तो तभी थमा जब दोनों एकदूसरे की बांहों में समा गए. उस दिन किरन और जितेंद्र के बीच की सारी दूरियां मिट गईं.

किरन और जितेंद्र एक बार देह के दलदल में समाए तो समाते ही चले गए. दोनों को जब भी मौका मिलता, एकदूसरे में सिमट जाते. एक रोज पच्चालाल ड्यूटी के लिए घर से निकले ही थे कि जितेंद्र आ गया. आते ही उस ने किरन को बांहों में भर लिया.

दोनों अभी एकदूसरे से लिपटे ही थे कि पच्चालाल की आवाज सुन कर घबरा गए. किरन ने कपड़े दुरुस्त कर के दरवाजा खोल दिया. घर के अंदर जितेंद्र मौजूद था. बिस्तर कुछ पल पहले गुजरे तूफान की चुगली कर रहा था. पच्चालाल सब समझ गए. उन्होंने किरन को धुनना शुरू किया तो जितेंद्र चुपके से खिसक लिया.

इस घटना के बाद किरन और जितेंद्र ने दरोगा पच्चालाल से माफी मांग ली और आइंदा गलती न करने का वादा किया. पच्चालाल ने दोनों को माफ तो कर दिया, लेकिन जितेंद्र के साथ शराब पीनी बंद कर दी. उस के घर आने पर भी पाबंदी लगा दी. लेकिन देह की लगी ने पाबंदियों को नहीं माना. कुछ दिन दोनों दूरदूर रहे, फिर चोरीछिपे शारीरिक रूप से मिलने लगे.

जितेंद्र बना पच्चालाल की मौत का परवाना  जनवरी, 2018 में दरोगा पच्चालाल का ट्रांसफर कानपुर देहात के थाना सजेती में हो गया. सजेती थाना कानपुर से 50 किलोमीटर दूर है. वहां से रोज घर आनाजाना संभव नहीं था. दरोगा पच्चालाल को थाना परिसर में ही आवास मिल गया. अब वह हफ्ता 10 दिन में ही किरन से मिलने घर जा पाते थे.

पच्चालाल जब भी घर आते थे, किरन से गालीगलौज और मारपीट जरूर करते थे. दरअसल उन्हें शक था कि जितेंद्र के अलावा भी किरन के किसी से नाजायज संबंध हैं. जैसेजैसे समय बीत रहा था, घर में कलह और प्रताड़ना बढ़ती जा रही थी. पति की प्रताड़ना से आजिज आ कर किरन ने अपने प्रेमी जितेंद्र की मदद से पच्चालाल को रास्ते से हटाने की योजना बनाई.

जितेंद्र ने किरन को पच्चालाल की हत्या से फायदे भी बताए. जितेंद्र ने कहा कि पति की हत्या के बाद तुम्हारे बेटे अमन को मृतक आश्रित कोटे से सरकारी नौकरी मिल जाएगी और तुम्हें पेंशन मिलने लगेगी. इस के अलावा प्रेम संबंध का रोड़ा भी हट जाएगा.

किरन और जितेंद्र ने पच्चालाल की हत्या के लिए रुपयों का इंतजाम किया. फिर जितेंद्र ने विधूना निवासी टेलर निजाम अली से बातचीत की. एक लाख रुपए में सौदा तय हुआ. जितेंद्र ने एक लाख रुपया निजाम अली के खाते में ट्रांसफर कर दिया.

इस के बाद निजाम अली ने जितेंद्र को पसहा (विधूना) निवासी राघवेंद्र उर्फ मुन्ना से मिलवाया. राघवेंद्र रिटायर दरोगा हरिदत्त सिंह का अपराधी प्रवृत्ति का बेटा था. निजाम अली ने 20 हजार रुपए एडवांस दे कर उसे इस योजना में शामिल कर लिया.

2 जुलाई, 2018 की देर शाम जितेंद्र यादव राघवेंद्र और निजाम अली को साथ ले कर सजेती पहुंचा और हाइवे से दरोगा के आवास की पहचान कराई. इस के बाद जितेंद्र यादव बाजार गया, जहां उस की मुलाकात दरोगा पच्चालाल से हो गई. जितेंद्र ने झुक कर दरोगा के पैर छुए. पच्चालाल ने उसे रात को वहीं रुक जाने को कहा.

थोड़ी देर की बातचीत के बाद दरोगा पच्चालाल ने अंगरेजी शराब की बोतल और नमकीन खरीदी. दुकानदार को नमकीन के पैसे पच्चालाल ने ही दिए. इस के बाद होटल पर बैठ कर दोनों ने शराब पी और खाना खाया. इस के बाद दोनों पच्चालाल के आवास पर आ गए. दरोगा पच्चालाल ने कपड़े उतारे और कूलर चला कर पलंग पर पसर गए.

कुछ देर बाद जब पच्चालाल सो गए तो जितेंद्र ने आवास का पीछे का दरवाजा खोल कर निजाम अली व राघवेंद्र को अंदर बुला लिया, जो कुछ दूर हाइवे किनारे बैठे थे. साथियों के आते ही जितेंद्र ने पच्चालाल को दबोच लिया. दरोगाजी की आंखें खुलीं तो प्राण संकट में देख वह संघर्ष करने लगे. लेकिन नफरत से भरे जितेंद्र ने पच्चालाल के शरीर को चाकू से गोदना शुरू किया तो गोदता ही चला गया.

हत्या के दौरान खून के छींटे व हाथ के पंजे का निशान एक दीवार पर भी पड़ गया. हत्या के बाद जितेंद्र व उस के साथी दरोगा का मोबाइल, पर्स व घड़ी लूट कर फरार हो गए. जितेंद्र ने मोबाइल से फोन कर के पच्चालाल की हत्या की जानकारी किरन को दे दी थी.

3 जुलाई की शाम 6 बजे मुंशी अजयपाल जब रजिस्टर पर दस्तखत कराने दरोगा पच्चालाल के आवास पर पहुंचा तो हत्या की जानकारी हुई. 7 जुलाई, 2018 को पुलिस ने हत्यारोपी किरन, जितेंद्र, निजाम अली व राघवेंद्र को कानपुर देहात की माती अदालत में रिमांड पर मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से सब को जेल भेज दिया गया.

–  पुलिस सूत्रों पर आधारित