सरस सलिल विशेष

21 मार्च, 2018 की प्रात: 9 बजे कानपुर के बर्रा थाने के प्रभारी भास्कर मिश्रा को गहोई निवासी बबलू भदौरिया ने सूचना दी कि पांडु नदी पर बने काठ पुल के नीचे एक युवक की लाश तैर रही है. मिश्रा को मामला गंभीर लगा. अपने उच्चाधिकारियों को लाश की जानकारी दे कर वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

पांडु नदी (काठ पुल) थाना बर्रा से करीब 3 किलोमीटर दूर है. भास्कर मिश्रा को वहां पहुंचने में आधा घंटा लगा. उस समय वहां भीड़ जुटी थी. लोग पुल से झांकझांक कर नदी में तैरते शव को देख रहे थे. कोई कह रहा था कि युवक की मौत डूबने से हुई है तो कोई आत्महत्या करने की बात कह रहा था. कुछ लोग ऐसे भी थे, जो हत्या की आशंका भी जता रहे थे.

थानाप्रभारी भास्कर मिश्रा ने युवक के तैरते हुए शव को गौर से देखा तो गले में बंधे दुपट्टे से वह समझ गए कि युवक की हत्या की गई है. साथी पुलिसकर्मियों ने भी उन की हां में हां मिलाई. मिश्रा अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी (साउथ) अशोक कुमार वर्मा तथा सीओ (गोविंदनगर) सैफुद्दीन बेग भी वहां आ गए. उन्होंने मौके पर फोरेंसिक टीम को भी बुला लिया.

पुलिस अधिकारियों ने नदी से लाश बाहर निकलवा कर उस का बारीकी से निरीक्षण किया. मृतक की उम्र करीब 30 वर्ष रही होगी. वह नीले रंग की शर्ट व पैंट पहने था. युवक का गला रेतने के अलावा उस के सीने को किसी नुकीली चीज से गोदा गया था. सिर पर भी कई घाव थे और उस के गले में स्टोल (दुपट्टा) बंधा था.

एसपी (साउथ) अशोक कुमार वर्मा ने मृतक की जामातलाशी कराई तो उस के पास से कुछ भी बरामद नहीं हुआ. थानाप्रभारी को यह देख कर जरूर ताज्जुब हुआ कि मृतक उल्टा अंडरवियर पहने था. उन्हें लगा कि संभवत: यह प्रेमिल संबंधों में हुई हत्या का मामला रहा होगा. उस की हत्या कहीं और की गई होगी और शव को यहां फेंक दिया गया होगा.

अब तक शव को सैकड़ों लोग देख चुके थे, लेकिन कोई भी मृतक की शिनाख्त नहीं कर पाया था. इस से यही लगा कि मृतक युवक यहां का नहीं है. शिनाख्त न होने पर पुलिस ने मौके की काररवाई निपटा कर लाश को मोर्चरी में रखवा दिया. साथ ही अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उस के हुलिए की सूचना वायरलैस से कानपुर नगर व कानपुर देहात के थानों को दे दी.

उसी रोज शाम 4 बजे थानाप्रभारी भास्कर मिश्रा थाने में आए तो 2 लोग उन की प्रतीक्षा में वहां बैठे मिले. उन में से अधेड़ उम्र का व्यक्ति बोला, ‘‘सर, मेरा नाम महेंद्र सिंह है और यह मेरा बड़ा बेटा कुलदीप है. मैं घाटमपुर कस्बा के जवाहर नगर मोहल्ले में रहता हूं. मेराछोटा बेटा संदीप सिंह दिल्ली में नौकरी करता है और अपनी पत्नी व बच्चों के साथ वहीं रहता है.

‘‘संदीप 19 मार्च को दोपहर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से ट्रेन द्वारा कानपुर के लिए रवाना हुआ और रात 10 बजे कानपुर स्टेशन पर उतरा था. इस बीच वह बराबर वीडियो कालिंग द्वारा अपनी पत्नी रेनू के संपर्क में रहा. नौबस्ता थाना के अंतर्गत आशानगर में हमारा मकान बन रहा है. इसी मकान में संदीप को आना था. लेकिन जब वह मकान में नहीं पहुंचा और उस का मोबाइल भी बंद हो गया तो हम ने उस की खोजबीन शुरू की.

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‘‘बहू को जानकारी दी तो वह भी घबरा कर दिल्ली से कानपुर आ गई. जब संदीप का कुछ भी पता नहीं चला तो हम संदीप की गुमशुदगी दर्ज कराने थाना नौबस्ता गए. वहां से पता चला कि बर्रा थाना क्षेत्र में एक युवक की लाश मिली है. हम उस लाश का फोटो देखना चाहते हैं कि वह किस की है.’’

थानाप्रभारी ने पांडु नदी से जो लाश बरामद की थी, उस के फोटो उन के मोबाइल फोन में थे. उन्होंने वे फोटो महेंद्र सिंह को दिखाए तो फोटो देखते ही वह फफक कर रो पड़े. उन्हें देख कर उन का बेटा कुलदीप सिंह भी रोने लगा. वह लाश संदीप की ही थी. संदीप की हत्या की खबर जैसे ही घर पहुंची तो घर में कोहराम मच गया. घर पर रिश्ते नातेदारों की भीड़ जुटने लगी.

थानाप्रभारी ने संदीप सिंह की हत्या के बाबत महेंद्र सिंह से पूछा तो वह बोले, ‘‘सर, हमारी किसी से कोई रंजिश नहीं है. मुझे तो लगता है कि संदीप की हत्या लूट के इरादे से हुई है.’’

लुटेरों द्वारा लूट की बात थानाप्रभारी को हजम नहीं हुई, क्योंकि लुटेरे इस तरह निर्मम हत्या नहीं करते. हत्या का कारण उन्हें कुछ और ही नजर आया.

एसपी (साउथ) अशोक कुमार वर्मा के निर्देश पर पुलिस ने सब से पहले मृतक संदीप की पत्नी रेनू सिंह से पूछताछ की. रेनू ने बताया, ‘‘वह 19 मार्च की दोपहर पौने एक बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से कानपुर जाने के लिए ट्रेन में बैठे थे. उन के पास 25 हजार रुपए नकद, गले में सोने की चेन, सोने की 2 अंगूठियां तथा महंगा मोबाइल फोन था.

‘‘शाम साढ़े 4 बजे उन्होंने मुझे वीडियो कालिंग की और बताया कि वह गाजियाबाद से आगे हैं. रात 9.55 बजे उन्होंने मुझे बताया कि वह कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर उतर गए हैं और टैंपो से आशानगर जा रहे हैं.

‘‘रात पौने 12 बजे उन्होंने फिर मुझे वीडियो काल कर के बताया कि वह नौबस्ता सब्जीमंडी पहुंच गए हैं. सवारी न मिलने से पैदल ही आशानगर स्थित निर्माणाधीन मकान की ओर जा रहे हैं. इस के बाद उन से कोई बातचीत नहीं हुई.’’

रेनू सिंह ने आगे बताया, ‘‘मैं ने फिर सुबह के समय उन से बात करनी चाही तो उन का मोबाइल स्विच्ड औफ मिला. इस के बाद मैं ने ससुरजी को सारी जानकारी दी तो उन्होंने बताया कि संदीप न तो घर पहुंचा है और न ही बन रहे मकान पर. बेचैनी बढ़ी तो मैं कानपुर आ गई. यहां आ कर पता चला कि उन की किसी ने हत्या कर दी है’’

रेनू ने यह भी बताया कि वह पति के साथ सुखमय जीवन बिता रही थी. उस के पति की हत्या किस ने और क्यों की, उसे इस की जानकारी नहीं है.

काल डिटेल्स ने दिखाई जांच की राह

मृतक संदीप की पत्नी व परिवार के अन्य सदस्य रंजिश से इनकार कर रहे थे. लूट की घटना थानाप्रभारी को हजम नहीं हो रही थी. हकीकत जानने के लिए उन्होंने संदीप के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स का अध्ययन करने पर पता चला कि उस दौरान संदीप की अपनी पत्नी के अलावा एक और नंबर पर बात हुई थी.

पुलिस ने उस नंबर का पता लगाया तो वह नंबर तिलसड़ा (घाटमपुर) की नेहा सिंह का निकला. यह पता चलते ही थानाप्रभारी को कहानी में प्रेमप्रसंग वाली बात नजर आने लगी.

इस के बाद पुलिस ने नेहा सिंह के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई, जिस से पता चला कि 19 मार्च, 2018 की शाम नेहा ने एक नंबर पर एसएमएस भेजा था, जिस में उस ने लिखा था, ‘आ जाना, आज उसे उल्टा करूंगी.’

जिस नंबर पर उस ने वह एसएमएस भेजा था, वह नंबर पटेलनगर, कालपी (उरई) निवासी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव का निकला. थानाप्रभारी भास्कर मिश्रा ने पुलिस टीम के साथ 22 मार्च, 2018 की रात प्रवीण कुमार के यहां दबिश दे कर उसे हिरासत में ले लिया.

कालपी से कानपुर आतेआते प्रवीण कुमार ने रास्ते में ही सच्चाई बता दी. उस ने संदीप की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. प्रवीण ने बताया कि बर्रा विश्व बैंक निवासी नेहा सिंह के कहने पर उस ने अपने दोस्त देवेंद्र नागर के साथ मिल कर नेहा सिंह के घर पर ही संदीप की हत्या की थी और शव को कार में रख कर पांडु नदी में फेंक दिया था.

प्रवीण कुमार की निशानदेही पर पुलिस ने नेहा सिंह और देवेंद्र नागर को उन के बर्रा स्थित घर से हिरासत में ले लिया. नेहा सिंह की निशानदेही पर पुलिस ने आला कत्ल हंसिया, लूटी गई नकदी, मोबाइल फोन, सोने की चेन, 2 अंगूठियां तथा बैग भी बरामद कर लिया.

संदीप से लूटे गए पैसों में से प्रवीण कुमार ने 3 पैंटशर्ट खरीदी थी. पुलिस ने वह भी बरामद कर लीं. हत्या में प्रयुक्त कार को भी पुलिस ने बरामद कर लिया. पुलिस द्वारा अभियुक्तों से की गई पूछताछ में नाजायज रिश्तों की सनसनीखेज कहानी प्रकाश में आई.

हंसतेखेलते परिवार के दरवाजे पर मौत की दस्तक

उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर से करीब 30 किलोमीटर दूर एक बड़ी आबादी वाला कस्बा घाटमपुर है. तहसील होने के कारण हर रोज यहां खूब चहलपहल रहती है. इसी कस्बे के जवाहरनगर मोहल्ले में महेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी मालती के अलावा 2 बेटे संदीप, कुलदीप और 2 बेटियां थीं.

महेंद्र सिंह प्रतिष्ठित और धनाढ्य व्यक्ति थे. राजनैतिक लोगों में भी उन की अच्छी पहुंच थी. दोनों बेटियों की वह अच्छे परिवारों में शादी कर चुके थे.

भाईबहनों में संदीप सब से छोटा था. वह पढ़ाईलिखाई में तेज था. इंटरमीडिएट पास करने के बाद उस ने इलैक्ट्रिकल से पौलिटेक्निक का डिप्लोमा किया था. इस के बाद उस ने सरकारी नौकरी की कोशिश की लेकिन असफल रहा.

जब नौकरी नहीं मिली तो संदीप ने अपने पिता से कानपुर में कोई दुकान खोलने की इच्छा जाहिर की. थोड़े प्रयास के बाद उन्हें नौबस्ता के चित्रा डिग्री कालेज के पास एक दुकान किराए पर मिल गई. चूंकि संदीप ने इलैक्ट्रिकल से डिप्लोमा किया था, अत: उस ने बिजली के सामान की दुकान खोल ली. कुछ ही समय में उस की दुकान ठीकठाक चलने लगी.

दुकान पर ही एक रोज उस की मुलाकात रेनू से हुई. उस रोज वह दुकान पर अपनी प्रैस ठीक कराने आई थी. 20 वर्षीय रेनू बेहद खूबसूरत थी. पहली ही नजर में वह संदीप के दिल में रचबस गई. वह संदीप की दुकान से कुछ ही दूर स्थित कच्ची बस्ती में रहती थी. उस के मातापिता की मौत हो चुकी थी. उस का एक भाई अजय था, वह उसी के साथ रहती थी. अजय टैंपो चलाता था.

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संदीप ने रेनू का फोन नंबर ले लिया, जिस के बाद वह किसी न किसी बहाने उस से बात करता रहता था. लगातार बात होने से संदीप और रेनू के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं. संदीप भी सजीला व हृष्टपुष्ट युवक था. रेनू भी उसे चाहने लगी थी. चाहत दोनों ओर से बढ़ी तो दोनों घूमनेफिरने भी जाने लगे. एक दिन बाजार बंदी के दिन संदीप रेनू को मोतीझील पार्क ले गया. वहीं पर बातचीत के दौरान संदीप ने रेनू से अपने प्यार का इजहार कर दिया.

रेनू संदीप के चेहरे पर एक गहरी नजर डाल कर बोली, ‘‘संदीप, प्यार तो मैं तुम से करती हूं, लेकिन मुझे डर लग रहा है.’’

‘‘कैसा डर?’’ संदीप ने पूछा.

‘‘यही कि तुम मुझे मंझधार में तो नहीं छोड़ दोगे?’’

‘‘कैसी बात करती हो रेनू, तुम तो मेरे दिल में बसी हो. मैं वादा करता हूं कि मैं तुम्हारे हर सुखदुख में साथ दूंगा और जीवन भर साथ निभाऊंगा.’’

रेनू और संदीप का प्यार परवान चढ़ ही रहा था कि उसी दौरान किसी तरह उन के घर वालों को इस की भनक लग गई. यह रिश्ता न तो रेनू के भाई अजय को मंजूर था और न ही संदीप के पिता महेंद्र सिंह को.

पर संदीप और रेनू एकदूसरे को दिलोजान से चाहते थे, इसलिए घर वालों के विरोध के चलते दोनों भाग गए. इस पर रेनू के भाई अजय ने इस की रिपोर्ट थाना नौबस्ता में दर्ज करा दी.

नौबस्ता पुलिस संदीप के पिता और भाई को पकड़ लाई. इस की भनक जब संदीप और रेनू को लगी तो दोनों थाने में हाजिर हो गए. उन के आने पर पुलिस ने दोनों पक्षों का समझौता करा दिया. इस के बावजूद दोनों ने आर्यसमाज पद्धति से विवाह कर लिया. विवाह के बाद दोनों हंसीखुशी जीवन व्यतीत करने लगे.

प्यार की मिठास बदलने लगी कड़वाहट में

रेनू की शादी को अभी एक साल ही बीता था कि संदीप के जीवन में एक और लड़की नेहा सिंह आ गई. नेहा सिंह मूलरूप से हमीरपुर के बंडा गांव की रहने वाली थी. 3 भाईबहनों में वह सब से बड़ी थी. नेहा के पिता हाकिम सिंह खेतीकिसानी करते थे. वह साधारण परिवार से थे. उन की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी.

इसी बंडा गांव में संदीप का ननिहाल था. संदीप कभीकभी ननिहाल जाता था. उस के मामा और नेहा का घर अगलबगल था. दोनों परिवारों में घनिष्ठता भी थी. इसलिए नेहा का आनाजाना बना रहता था. एक बार जब संदीप ननिहाल गया तो सजीधजी नेहा से उस की आंखें चार हुईं. नेहा भी संदीप को देख कर प्रभावित हुई. फिर दोनों में बातचीत होने लगी. जल्द ही बातचीत प्यार में बदल गई. बाद में उन्होंने अपनी हसरतें भी पूरी कर लीं.

इधर संदीप और नेहा के प्यार की भनक हाकिम सिंह को लगी तो उन्होंने आननफानन में नेहा का विवाह कानपुर के तिलसड़ा गांव निवासी रणवीर सिंह के साथ कर दिया. लेकिन शादी के बाद भी संदीप ने नेहा का पीछा नहीं छोड़ा और वह उस की ससुराल भी जाने लगा. नेहा के पति रणवीर सिंह ने विरोध जताया तो नेहा ने उसे रिश्तेदार बता कर पति का विरोध दबा दिया.

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उन्हीं दिनों संदीप सिंह की दिल्ली में रिलायंस कंपनी में इलैक्ट्रिशियन के पद पर नौकरी लग गई. वह पत्नी रेनू के साथ पुरानी दिल्ली (दाईवाड़ा) में किराए के मकान में रहने लगा. दूर व व्यस्त रहने के कारण संदीप का नेहा से मिलना बंद हो गया. दिल्ली में संदीप व रेनू हंसीखुशी से रहने लगे. अब तक रेनू 2 बच्चों की मां बन चुकी थी.

इधर नेहा ने भी शादी के एक साल बाद एक बेटे को जन्म दिया. बेटे के जन्म के बाद नेहा ने पति रणवीर सिंह पर दबाव डाला कि वह शहर जा कर कोई नौकरी करे ताकि पैसा आए. रणवीर सिंह ने पत्नी की बात मान कर कोशिश की तो एक दोस्त की मार्फत उसे गाजियाबाद की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी मिल गई. कुछ महीने बाद नेहा भी पति के साथ गाजियाबाद में रहने लगी.

बाद में संदीप को जब पता चला कि नेहा अपने पति के साथ गाजियाबाद में रह रही है, तो उस की बांछें खिल उठीं. एक रोज वह नेहा के कमरे पर जा पहुंचा. दोनों एकदूसरे को देख चहक उठे. पुरानी यादें ताजा हो गईं. मिलन की प्यास जागी तो दोनों खुद को रोक नहीं सके.

इस के बाद तो यह आए दिन का सिलसिला बन गया. रणवीर ड्यूटी पर जाता तो संदीप आ जाता. फिर दोनों मौजमस्ती करते. इसी दरम्यान एक रोज संदीप ने धोखे से नेहा का अश्लील वीडियो बना लिया और आपत्तिजनक स्थिति के फोटो भी मोबाइल में कैद कर लिया.

कुछ समय बाद नेहा को संदीप का आनाजाना खलने लगा. उस ने विरोध जताया तो संदीप ने उस का अश्लील वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी दी. इस पर नेहा डर गई और संदीप उस का शारीरिक शोषण करता रहा. रणवीर ने लगभग 4 साल तक गाजियाबाद में नौकरी की. बाद में उस की नौकरी छूट गई तो वह अपने गांव तिलसड़ा आ गया.

नेहा का बेटा 5 साल का हो चुका था. वह उसे गांव के प्राइमरी स्कूल में नहीं पढ़ाना चाहती थी. बेटे को शहर में पढ़ाने के लिए नेहा ने पति पर दबाव डाला तो रणवीर ने कानपुर शहर में बर्रा विश्व बैंक के बी ब्लौक में एक कमरा किराए पर ले लिया और नेहा के साथ रहने लगा.

यह मकान सपा नेता वैभव मिश्रा का था. वह बर्रा में ही अपने दूसरे मकान में परिवार सहित रहते थे. किराए के मकान में आ कर नेहा ने अपने बेटे का दाखिला इंग्लिश मीडियम स्कूल में करा दिया. किराए के इसी मकान में नेहा की मुलाकात प्रवीण कुमार श्रीवास्तव से हुई. वह मूलरूप से पटेलनगर, कालपी का रहने वाला था और डी ब्लौक बर्रा में किराए पर रहता था. प्रवीण कुमार सपा नेता वैभव मिश्रा का ड्राइवर था. इस के अलावा वह मकान का किराया भी वसूलता था.

नेहा को मिला नया प्रेमी

चंचल व हंसमुख नेहा से प्रवीण की जल्द ही दोस्ती हो गई. दोस्ती प्यार में बदली, फिर दोनों के बीच नाजायज रिश्ता बन गया. इस के बाद वह नेहा की हर तरह से मदद करने लगा. नेहा का पति रणवीर सिंह किसान था. कभी वह नेहा के साथ रहता तो कभी महीनों तक गांव में, जिस से प्रवीण को नेहा से मिलने में कोई बाधा नहीं होती थी.

संदीप सिंह नेहा की टोह में लगा रहता था. वह अय्याश प्रवृत्ति का था. उसे जब पता चला कि नेहा अब बर्रा विश्व बैंक कालोनी में रहने लगी है तो वह वहां भी आने लगा और नेहा का शारीरिक शोषण करने लगा. नेहा जब उस का फोन रिसीव नहीं करती तो वह विभिन्न नंबरों से काल करता. नेहा जब फोन रिसीव कर लेती तो वह उसे भद्दीभद्दी गालियां देता और अश्लील फोटो नातेरिश्तेदारों व घर वालों को भेजने की धमकी देता.

दरअसल नेहा के पास स्मार्टफोन नहीं था. संदीप ने फेसबुक पर उस के नाम की आईडी बना रखी थी, जिसे वह खुद ही अपडेट करता था. अकसर वह सोशल साइट पर नेहा की फोटो के साथ किसी न किसी रिश्तेदार का फोन नंबर डाल कर घर वालों को परेशान करता रहता था. संदीप ने नेहा के मौसेरे भाई को नेहा की अश्लील फोटो भेज भी दी थी.

शारीरिक शोषण और संदीप की गंदी हरकतों से आजिज आ कर नेहा ने अपने नए प्रेमी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव को अपनी व्यथा सुनाई और संदीप से निजात दिलाने की बात कही. इस पर प्रवीण ने नेहा को बातचीत के जरिए समस्या को सुलझाने की सलाह दी.

पहली मार्च को होली थी. संदीप होली मनाने पत्नी और बच्चों के साथ दिल्ली से अपने घर घाटमपुर आया. इन दिनों संदीप के पिता महेंद्र सिंह नौबस्ता (कानपुर) के आशानगर में नया मकान बनवा रहे थे. संदीप इसी निर्माणाधीन मकान में कई रोज रह कर देखरेख करता था.

8 मार्च को संदीप ने नेहा सिंह से बात करने के लिए उस का फोन नंबर मिलाया. लेकिन नेहा ने फोन रिसीव नहीं किया. कई बार प्रयास के बाद नेहा ने फोन रिसीव किया तो वह नाराज हुआ और कर्रही (बर्रा) में मिलने को कहा. नेहा मिलने आई तो संदीप ने उसे गालियां दीं और फोन न उठाने तथा मिलने से इनकार करने पर 2 थप्पड़ भी जड़ दिए. नेहा तमतमा कर घर चली गई और संदीप पत्नीबच्चों के साथ दिल्ली चला गया.

चोट खाई नागिन बन गई नेहा अपमानित नेहा ने प्रेमी प्रवीण कुमार से संपर्क किया और संदीप द्वारा बेइज्जत करने और थप्पड़ मारने की बात बताई. नेहा ने कहा कि संदीप की ज्यादतियां अब बरदाश्त नहीं होतीं. अत: उसे रास्ते से हटाना ही होगा, जिस के लिए तुम्हें साथ देना होगा.

अगर तुम ने साथ नहीं दिया तो आज के बाद मुझ से बात नहीं करना. प्रेमिका की जिद पर प्रवीण कुमार संदीप को रास्ते से हटाने को राजी हो गया. साथ देने के लिए उस ने अपने दोस्त बर्रा निवासी देवेंद्र नागर को भी राजी कर लिया.

18 मार्च, 2018 को संदीप ने दिल्ली से नेहा को फोन किया कि वह 19 मार्च को कानपुर आ रहा है, उसे मिलना होगा. इस पर नेहा ने जवाब दिया कि बेटे शुभम के पेपर 15 मार्च को खत्म हो गए हैं. अब वह अपनी ससुराल तिलसड़ा (घाटमपुर) में है, इसलिए मिलना संभव नहीं है. इस पर संदीप ने उस के फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी दी. धमकी से नेहा डर गई और बर्रा विश्व बैंक कालोनी स्थित मकान में मिलने का वादा कर लिया.

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संदीप के शहर आने की जानकारी पर नेहा 19 मार्च की दोपहर ससुराल से कानपुर आ गई. किराए के मकान पर पहुंचने के बाद नेहा ने प्रवीण कुमार को मैसेज किया कि संदीप आ रहा है. आ जाना, आज उसे उल्टा करना है. मैसेज पढ़ कर प्रवीण अपने दोस्त देवेंद्र के साथ रात 9 बजे नेहा के कमरे पर पहुंच गया. नेहा ने दोनों को छत पर बैठा दिया.

इधर 19 मार्च को संदीप रात 10 बजे दिल्ली से कानपुर आया. इस बीच वह पिता, पत्नी व प्रेमिका के संपर्क में रहा. रास्ते में उस ने खाने का सामान व शराब की बोतल खरीदी, फिर रात 12 बजे के आसपास नेहा के घर पहुंच गया.

नेहा ने संदीप के साथ खाना खाया और उसे शराब पिलाई. इस के बाद संदीप ने बदन से सारे कपड़े उतारे और नेहा के शरीर से खेलने लगा. शारीरिक भूख मिटाने के बाद संदीप अंडरवियर में ही पलंग पर लेट गया और कुछ ही देर में खर्राटे भरने लगा.

उचित मौका देख कर नेहा ने छत पर बैठे प्रवीण व उस के दोस्त देवेंद्र नागर को कमरे में बुला लिया. तीनों मिल कर संदीप का गला स्टोल (दुपट्टे) से कसने लगे तो वह हाथपैर चलाने लगा. तभी नेहा हंसिया ले आई और उस ने संदीप के सिर, गले व दिल पर कई वार किए. प्रवीण ने भी संदीप को हंसिए से गोदा जिस से उस की मौत हो गई.

संदीप को मौत के घाट उतारने के बाद नेहा और उस के प्रेमी प्रवीण ने उस के गले से सोने की चेन और अंगुलियों से दोनों अंगूठियां उतार लीं. पैंट की तलाशी ली तो जेब में पैसे मिले, जो निकाल लिए. फिर संदीप को अंडरवियर पहनाया जो जल्दबाजी में उल्टा पहना दिया गया. फिर पैंटशर्ट पहनाई और लाश चादर में लपेट दी.

शव को ठिकाने लगाने के लिए प्रवीण कुमार रात 3 बजे अपने मालिक वैभव मिश्रा के घर पहुंचा और बताया कि उस की बहन की तबीयत ज्यादा खराब है, उसे अस्पताल पहुंचाना है. अत: कार की चाबी चाहिए. वैभव मिश्रा ने पहले तो इनकार किया. लेकिन पत्नी के कहने पर कार की चाबी दे दी. कार ले कर प्रवीण कुमार नेहा के कमरे पर आया और संदीप के शव को कार में रख कर तीनों पांडु नदी के काठ पुल पर पहुंचे और शव को पुल के नीचे फेंक दिया. लाश फेंक कर वे वापस लौट आए.

इधर 21 मार्च को गहोई निवासी बबलू भदौरिया ने पांडु नदी में एक युवक की लाश पानी पर तैरती देखी तो उस ने बर्रा थानाप्रभारी को सूचना दे दी.

थानाप्रभारी भास्कर मिश्रा ने तीनों अभियुक्तों से पूछताछ के बाद 23 मार्च, 2018 को कानपुर कोर्ट में सीएमएम की अदालत में पेश किया, जहां से तीनों को जिला जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक उन की जमानत नहीं हुई थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित