सरस सलिल विशेष

24 साल की तनु का रंग हालांकि बहुत साफ नहीं था, लेकिन कुदरत ने उसे कुछ इस तरह गढ़ा था कि जो भी उसे देखता, एक ठंडी आह भरने से खुद को रोक नहीं पाता था. सांवले सौंदर्य की मालकिन तनु के जिस्म की कसावट और फिगर देख मनचले गहरी सांसें लेते हुए फिकरे कसते थे तो खुद को शरीफजादा कहलाने और दिखलाने वाले भी उस की खिलती जवानी का नेत्रपान चोरीछिपी ही सही, करते जरूर थे.

किसी भी लड़की की छवि ऐसी जैसी कि ऊपर बताई गई है, यूं ही नहीं मन जाती, बल्कि इस में खुद उस के स्वभाव का भी बड़ा हाथ होता है. तनु खुले स्वभाव की लगभग उच्छृंखल युवती थी, जो किसी बंधन में नहीं बंधतीं. लेकिन एक ऐसे मजबूत सहारे की जरूरत उसे हमेशा महसूस होती रहती थी, जो उसे दुनियाजहान की दुश्वारियों से महफूज रखे.

आमतौर पर तनु जैसी महत्त्वाकांक्षी युवतियां जो सपने देखती हैं, उन्हें किसी भी शर्त पर या कोई भी जोखिम उठा कर पूरे करना भी जानती हैं. पर इस के लिए जो कीमत उन्हें चुकानी पड़ती है, वह कभीकभी इतनी भारी पड़ जाती है कि सौदा अंतत: उनके लिए घाटे का साबित होता है. तब उन के पास हाथ मलने और अपनी नादानियों पर पछताने के सिवाय कुछ भी नहीं रह जाता. जिंदगी को कुछ इसी तरह हलके में लेने की कीमत तनु ने कैसे चुकाई, यह जानने से पहले तनु के बारे में जान लेना जरूरी है.

इंदौर के गोयलनगर स्थित अड़ोसपड़ोस अपार्टमेंट में रहने वाली तनु राजौरिया की उम्र तब महज 11 साल थी, जब उस की मां का निधन हो गया था. इस उम्र में लड़कियां शारीरिक और मानसिक बदलावों के दौर से गुजरते हुए तनाव में रहती हैं. ऐसे में मां की कमी उन्हें और असुरक्षित बना देती है. यही तनु के साथ भी हुआ.

तनु के पिता श्याम सिंह राठौर ने दूसरी शादी नहीं की. लेकिन इस बात का अंदाजा उन्हें था कि इस उम्र की बेटी की परवरिश कर पाना उन के लिए आसान नहीं है. लिहाजा उन्होंने उसे अपनी साली यानी तनु की मौसी अनीता के पास भेज दिया. अनीता श्याम सिंह की इस उम्मीद पर खरी उतरीं कि सौतेली मां से बेहतर सगी मौसी होती है.

तनु को पालनेपोसने में अनीता ने न कोई कसर रखी, न भेदभाव किया. लेकिन तनु जैसेजैसे बड़ी होती गई, वैसेवैसे अपनी मरजी की मालकिन होती गई. अनीता ने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी कि अपनी दिवंगत बहन की बेटी को बेहतर संस्कार दें, पर जवान होती तनु के सपने आम लड़कियों से कुछ हट कर थे. मौसी के घर कौशल्यापुरी में तनु ने जवानी में कदम रखा तो उस के इर्दगिर्द लड़कों की भीड़ जमा होने लगी.

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तनु हर किसी को भले घास नहीं डालती थी, लेकिन उस की खूबसूरती के चर्चे हर कहीं होने लगे थे. वजह थी एक छरहरी युवती का भरे मांसल बदन का होना, उस की लंबी नाक और बड़ीबड़ी आंखें और पतले होंठों पर पसरी एक शोख मुसकराहट किसी का भी दिल धड़का देने के लिए काफी थी.

हालत यह थी कि मोहल्ले का हर लड़का तनु की नजदीकियां पाने को बेताब रहने लगा. लेकिन कोई भी तनु के तयशुदा पैमानों पर खरा नहीं उतर रहा था. उसे जो बातें अपने सपने के हीरो में चाहिए थीं, वे आखिरकार उसे दिखीं चंदन राजौरिया में.

चंदन कांग्रेस का छोटामोटा नेता और पेशे से प्रौपर्टी ब्रोकर था. वह दबंग भी था, जिस से दूसरे लड़के उस से खौफ खाते थे. 2-4 मुलाकातों में ही तनु ने उसे और उस ने तनु को दिल दे दिया. आजकल की लड़कियों को जैसे लड़के भाते हैं, चंदन ठीक वैसा ही था. माशूका का खयाल रखने वाला, उस पर पैसे लुटाने वाला और सजसंवर कर रहने वाला. लच्छेदार बातों और वादों में भी वह माहिर था.

तनु अब हवा में उड़ने लगी थी, पर उस की शुरू होती प्रेमकथा के किस्से शायद उड़तेउड़ते पिता श्याम सिंह के कानों तक पहुंच गए थे, इसलिए उन्होंने बेटी की शादी अहमदाबाद के एक तेल, गुड़ व्यापारी से न केवल तय कर दी, बल्कि कर भी दी. तनु और चंदन प्यार के रास्ते पर अभी इतने दूर नहीं पहुंचे थे कि वापस न लौट पाएं. तनु शादी कर के अहमदाबाद चली गई तो चंदन अपनी नेतागिरी और प्रौपर्टी डीलिंग के छोटेमोटे कामों में लग गया. पर दोनों ही एकदूसरे को भूल नहीं पाए.

ससुराल में तनु का मन नहीं लगा. वजह जैसी जिंदगी और पति उसे चाहिए था, वह उसे नहीं मिला. दुकानदार पति सुबह दुकान पर चला जाता तो देर रात को लौटता था. अकेली वह खीझ उठती. तनु के लिए शादीशुदा जिंदगी के मायने होटलिंग, शौपिंग और मौजमस्ती भर थे, जो पूरे नहीं हुए तो वह पति से बातबात पर कलह करने लगी. इस से जल्दी ही दांपत्य टूटने की कगार पर आ पहुंचा. यही वह चाहती भी थी, लेकिन इस की वजह कुछ और थी.

वजह था उस का पूर्व प्रेमी चंदन राजौरिया. शादी के बाद पहली बार विदा हो कर तनु मायके इंदौर आई तो चंदन से सामना होने पर दबा प्यार जाग उठा. कहां वह बोर दुकानदार पति और कहां यह बिंदास चंदन.

चालाक चंदन ने जल्दी ही तनु की इस कशमकश भांप ली और उस की गदराई जवानी हासिल करने का उसे यह सुनहरा मौका लगा. लिहाजा पहले तो उस ने तनु की ख्वाहिशों को हवा दी और फिर उन्हें पूरा करने के लिए शादी की पेशकश कर डाली.

तनु के लिए तो यह अंधा क्या चाहे, दो आंखें जैसी बात थी. पर चंदन से शादी करने के लिए जरूरी था पति से तलाक हो, जो आजकल खासतौर से नई पत्नियों के लिए मुश्किल काम नहीं है. तनु दोबारा अहमदाबाद गई तो चंदन के प्यार में महक रही थी. उस ने पति से की जाने वाली कलह की तादाद बढ़ा दी. फलस्वरूप तलाक मांगा तो पति को भी मानो मुंहमांगी मुराद मिल गई. क्योंकि वह तनु की बेहूदा हरकतों और रोजरोज की कलह से आजिज आ चुका था.

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तलाक के बाबत तनु ने पति से 5 लाख रुपए मांगे तो उस ने खुशीखुशी दे कर पत्नी से छुटकारा पा लिया. तनु इंदौर वापस आई तो चंदन और उस की मां शादी के लिए तैयार बैठे थे. पति से लिए 5 लाख रुपए उस ने चंदन को दे दिए. कुछ दिनों बाद चंदन ने वादा निभाते हुए उस से शादी कर ली. चंदन की मां राजकुमारी से उस की अच्छी पटरी बैठती थी.

चंदन से शादी के बाद उस के 2 साल अच्छे से गुजरे, ठीक वैसे ही जिस तरह से वह पहली शादी के पहले सपने देखा करती थी. पर यह शादी नहीं एक सौदा था, जिस के तहत तनु ने अपने पहले पति से गुजारे के लिए लिए गए 5 लाख रुपए बतौर दहेज चंदन को दे रखे थे.

लेकिन यहां भी दोनों के बीच वादविवाद और झगड़े होने लगे. चंदन का मकसद तनु की जवानी और खूबसूरती भोगना था, जो पूरा हो गया था. एक साल बाद ही इन के यहां एक बेटी हुई, जिस का नाम विनी रखा गया. चंदन का बदलता बर्ताव और बेरुखी देख कर तनु को समझ आने लगा कि इस से अच्छा तो वह दुकानदार पति ही था, जो उस का पूरा ध्यान रखता था.

झगड़े इतने बढ़ गए कि दोनों का साथ रहना दूभर हो गया. ऐसे में सास राजकुमारी ने तनु की परेशानी हल की. उस ने उसे समझाया कि जब चंदन से नहीं पट रही है तो उसे तलाक दे दो और एवज में 10 हजार रुपए हर महीने लेती रहो.

तनु के मायके वालों का जी उस की हरकतों के चलते पहले ही उचट चुका था, लिहाजा उन्होंने उस की दूसरी शादी के विवाद में न कोई दखल दिया और न ही दिलचस्पी दिखाई. चंदन को तलाक दे कर तनु अलग गोयलनगर के अपार्टमेंट अड़ोसपड़ोस के फ्लैट नंबर 103 में बेटी के साथ रहने लगी.

रिश्तों की ऐसी सौदेबाजी टीवी धारावाहिकों में ही देखने को मिलती है. तनु ने पहले पति से एकमुश्त 5 लाख रुपए लिए थे और दूसरे से 10 हजार रुपए महीना ले रही थी. एक तरह से यह देह की या यौनसुख की कीमत वसूलने जैसी बात थी, जिस का कोई अफसोस या ग्लानि उसे नहीं थी.

अब तनु आजाद थी, पर जल्दी ही यह आजादी उसे खलने लगी. इंदौर जैसे औद्योगिक शहर में एक अकेली लड़की का बिना किसी सहारे के रहना नामुमकिन नहीं तो मुश्किल जरूर है. गोयलनगर में शिफ्ट होने के बाद भी चंदन उस से मिलने आया करता था.

न जाने किस जादू के जोर से दोनों के बीच के विवाद सुलझ गए थे. अड़ोसपड़ोस अपार्टमेंट के अड़ोसियोंपड़ोसियों से तनु ने चंदन का परिचय पति के रूप में ही कराया था. लिहाजा सभी यह सोचते थे कि दोनों पतिपत्नी हैं और चंदन अकसर काम के सिलसिले में बाहर रहता है.

तन की भूख फिर से दूसरे पति से बुझने लगी तो तनु चंदन के पांवों में बिछने लगी और इस तरह बिछने लगी कि जब चंदन ने अपनी दूसरी शादी की बात उसे बताई तो उस के चेहरे पर शिकन तक नहीं आई. शिकन तो दूर की बात, सन 2015 की इस अनूठी शादी में विचित्र किंतु सत्य जैसी बात यह हुई थी कि आमंत्रण पत्र में तनु का नाम बतौर चंदन की बहन छपा था.

जाने क्या खिचड़ी तनु, चंदन और राजकुमारी के बीच पकी, जो तनु अपने दूसरे पति की दूसरी शादी में बहन की हैसियत से शामिल हुई और बारात में जम कर नाची भी. इतना ही नहीं, चंदन की सुहाग की सेज भी उस ने अपने हाथों से सजाई. किसी भी तरह के साहित्य में शायद ही ऐसी किसी घटना का वर्णन देखने को मिले, जो इंदौर की इस शादी में घटित हुआ था.

शादी के बाद भी चंदन गोयलनगर में तनु के पास आताजाता रहा और तनु की हर तरह की जरूरत भी पूरी करता रहा. 10 हजार रुपए महीने तो वह उसे दे ही रहा था. तनु अपनी तनहाई से समझौता कर के संतुष्ट हो चली थी. लेकिन चंदन के मन में उसे ले कर कुछ और ही चल रहा था, जो अब तक उस की रगरग से वाकिफ हो चुका था. चंदन का असली धंधा क्या था, इस का अंदाजा तनु को नहीं था. वह तो उसे प्रौपर्टी ब्रोकर समझती रही थी, जिस के एक बड़े कांग्रेसी नेता से अच्छे संबंध थे.

चंदन का एक दोस्त था महिम शर्मा. वह पेशे से वैसा ही पत्रकार था, जैसा कि चंदन नेता यानी कहने भर के लिए. फिर भी दोनों में अपनेअपने धंधे की ठसक भी थी और पैसा भी अच्छाखासा था. दरअसल, चंदन और महिम दोनों मिल कर एक गिरोह चलाते थे, जिस का काम लोगों को, खासतौर से व्यापारियों को फांस कर उन्हें ब्लैकमेल करना था. इस के लिए कई खूबसूरत लड़कियां इन दोनों ने पाल रखी थीं, जिन का काम सोशल मीडिया के जरिए व्यापारियों को फंसाना होता था.

शिकार जब जाल में फंस जाता था तो ये लड़कियां किसी लौज, होटल या फ्लैट में उसे बुलाती थीं और उस के साथ वैसी ही वैरायटी वाली सैक्सी हरकतें करती थीं, जैसी ब्लू फिल्मों में दिखाई जाती हैं. नई तकनीकों से अंजान व्यापारी इन लड़कियों के साथ सैक्स का लुत्फ तो उठाते थे, पर इस बात का अहसास उन्हें नहीं होता था कि उन की हरकतें कैमरे में कैद हो रही हैं, जो एक बार अगर दुनिया के सामने आ जाएं तो उन की इज्जत धूल में मिल जाना तय थी.

इसी से बचने के लिए कितने ही व्यापारी चंदन और महिम को पैसा दे चुके थे, इस का ठीकठाक हिसाबकिताब शायद ही कोई दे पाए, क्योंकि अधिकांश क्या, सभी व्यापारी अपनी ब्लू फिल्में देख कर पसीनेपसीने हो उठते थे और डरते भी थे कि अगर ये वायरल हो गईं तो वे कहीं के नहीं रहेंगे. घरगृहस्थी तो चौपट होगी ही, समाज और रिश्तेदारारी में भी छीछालेदर होगी. इसलिए वे चुपचाप इन दोनों को मुंहमांगा पैसा दे देते थे.

इस काम में एकलौती दिक्कत इन दोनों को यह थी कि जिस लड़की को ये चारे के रूप में इस्तेमाल करते थे, उसे खासी रकम देनी पड़ती थी और एक नया राजदार भी बनाना पड़ता था,जो एक तरह का खतरा ही था. चंदन और महिम ब्लैकमेलिंग के इस धंधे के खासे विशेषज्ञ हो चुके थे और मन ही मन उन अधेड़, जवान और बूढ़ों की हालत पर हंसते भी थे, जो कमसिन लड़कियों के जिस्म की चाहत में आ कर गाढ़ी कमाई उन्हें दे जाते थे.

चंदन का ध्यान जब इस तरफ गया कि अगर तनु उन के गिरोह में शामिल हो कर काम करने को तैयार हो जाए तो बात सोने पे सुहागा वाली होगी. उस पर बुरी तरह मरने वाली तनु न केवल भरोसेमंद थी, बल्कि उस का मांसल सैक्सी जिस्म उस की दूसरी खूबी थी, जिस की ब्लैकमेलिंग के धंधे में खासी अहमियत होती है.

चंदन को यह तो समझ में आ गया था कि पैसों के बाबत तनु ज्यादा मुंह नहीं फाड़ेगी, लेकिन अपनी पूर्वपत्नी को इतना तो वह जानने ही लगा था कि वह इस काम के लिए कभी तैयार नहीं होगी. वह जैसी भी थी, पर उस के अपने कुछ उसूल थे, जिन से ब्लैकमेलिंग की बात मेल नहीं खाती थी. बिस्तर में चंदन के मुताबिक कुलाटियां खाने वाली तनु इस काम के लिए आसानी से तैयार होगी, इस में उसे शक था.

इस के बाद भी उसे कोशिश करने में हर्ज महसूस नहीं हुआ. उस के खुराफाती दिमाग में आइडिया यह आया कि तनु को एक मर्द की जरूरत तो है ही, इसलिए क्यों न महिम का चक्कर उस से चलवा दिया जाए. इस से होगा यह कि अगर महिम और तनु के बीच जिस्मानी ताल्लुक कायम हो गए तो आसानी से तनु को शीशे में उतारा जा सकता है. इस बाबत उस ने पहले महिम का परिचय तनु से करवाया और फिर खुद धीरेधीरे उस से किनारा करने लगा.

अब अड़ोसपड़ोस अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 103 में महिम लगभग रोज आने लगा. वह सधा हुआ खिलाड़ी था, जिस से उसे देख कर औरों की तरह जीभ लपलपाने के बजाय मुकम्मल सब्र से काम लेते हुए उसे फंसाया. चंदन का अंदाजा सही निकला, जल्दी ही तनु और महिम में शारीरिक संबंध बन गए. तनु की मर्द की जरूरत अब महिम पूरी करने लगा.

जब इन दोनों को यकीन हो गया कि तनु अब न नहीं करेगी तो एक दिन उन्होंने उस के सामने अपना ब्लैकमेलिंग वाला राज खोल कर उसे भी इस धंधे में शामिल होने का न्यौता दिया. इस पर तनु भड़क उठी और सीधेसीधे मना कर दिया. जोशजोश में दोनों ने अपने सारे राज उस पर खोल दिए थे कि वे कैसे शिकार को फंसा कर उसे ब्लैकमेल करते हैं.

चूंकि तनु से न की उम्मीद नहीं थी, इसलिए दोनों दिक्कत में पड़ गए. डर इस बात का था कि कहीं ऐसा न हो कि यह नादान लड़की कभी उन का राज दुनिया के सामने उजागर कर दे. फिर भी हिम्मत न हारते हुए चंदन और महिम उसे पटाने की कोशिशें करते रहे और ढेर सारी दौलत का सब्जबाग दिखाते रहे.

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लाख मनाने के बाद भी तनु राजी न हुई तो चंदन और महिम ने उसे हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का खतरनाक फैसला न केवल ले डाला, बल्कि उस पर इस तरह अमल भी कर डाला कि अगर अनीता सजगता न दिखातीं तो तनु की मौत हमेशा के लिए एक राज बन कर रह जाती.

इंदौर में होली के पांचवें दिन रंगपंचमी का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. सारे शहर की दुकानें बंद रहती हैं और जगहजगह रंगपंचमी के जुलूस निकलते हैं और लोग तबीयत से रंग का यह त्यौहार मनाते हैं.

17 मार्च को महिम, चंदन और तनु ने रंगपंचमी की पार्टी रखी, जिस में तनु ने छक कर भांग पी. नशा ज्यादा हो जाने से उस की तबीयत बिगड़ने लगी तो चंदन उसे अपने साथ ले गया. अगले 3-4 दिनों तक वह लगातार तनु के फ्लैट पर आता रहा तो एक दिन किसी पड़ोसन ने तनु के बारे में पूछ लिया. चंदन ने उसे बताया कि तनु का इलाज उस के पिता के घर चल रहा है. वह तो यहां दीपक रखने आता है.

सभी की निगाह में चूंकि चंदन तनु का पति था, इसलिए उस की बात पर किसी ने किसी तरह का शक नहीं किया. 25 मार्च को तनु का जन्मदिन था. उस दिन मौसी अनीता उसे बधाई देने के लिए फोन लगाती रहीं, पर उस का फोन लगातार स्विच्ड औफ जा रहा था. लिहाजा उन्होंने खुद उस के घर जा कर उसे बधाई देने का फैसला किया.

25 मार्च की सुबह जब वह तनु के फ्लैट पर पहुंची तो वहां झूलता ताला देख कर हैरान रह गईं, क्योंकि तनु बगैर बताए गायब थी. इस पर उन्होंने पड़ोस में पूछताछ की तो पता चला कि तनु ने ज्यादा भांग पी ली थी, इसलिए उस का पति चंदन उसे पिता के घर ले गया था.

अनीता ने श्याम सिंह को फोन किया तो जवाब मिला कि तनु तो उन के यहां नहीं आई है. वह किसी अनहोनी की आशंका से घबरा गए, साथ ही अनीता के माथे पर भी बल पड़ गए. उन्होंने चंदन को फोन किया तो उस का भी फोन नहीं लगा.

श्याम सिंह भागेभागे अनीता के पास आए और तनु की खोजबीन की. लेकिन वह कहीं नहीं मिली तो उन्होंने थाना तिलकनगर में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी. तलाक होने के बाद भी चंदन तनु के पास आताजाता रहता था, यही बात पुलिस को चौंकाने वाली भी थी और सुराग देने वाली भी.

इंदौर के डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने तनु की खोज के लिए एएसपी अमरेंद्र सिंह को नियुक्त कर दिया. उन्होंने पहले उन दोनों की जन्म कुंडलियां खंगाली तो जल्द ही सारा सच सामने आ गया.

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पता चला कि चंदन और महिम अव्वल दरजे के ब्लैकमेलर हैं, पर अभी तक किसी ने उन के खिलाफ रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई है. अलबत्ता दोनों अन्नपूर्णा इलाके में सन 2012 में हुई गोलीबारी में भी शामिल थे. इन पर एक और दूसरा आपराधिक मामला इसी साल फरवरी में दर्ज हुआ था.

शक के आधार पर क्राइम ब्रांच ने चंदन और महिम को गिरफ्तार किया, पर पूछताछ में कुछ हासिल नहीं हुआ. दोनों ही पुलिस को गुमराह करने वाले बयान देते रहे. दरअसल, इस में दिक्कत यह थी कि एक पत्रकार था और दूसरा बड़े कांग्रेसी नेता का चेला. ऐसे में अगर इन के साथ जोरजबरदस्ती की जाती तो खासा बवाल मच सकता था.

सब कुछ साफ समझ में आ रहा था, इसलिए अमरेंद्र सिंह ने जोखिम उठाया और चंदन तथा महिम से सख्ती की तो वे टूट गए और सारा सच उगल दिया. सच बड़ा वीभत्स था. दोनों ने 17 मार्च को ही तनु की हत्या उस के फ्लैट में कर दी थी. भांग के नशे में चूर तनु को शायद पता भी नहीं चला था कि उसे किस ने और कैसे मार डाला. चूंकि त्यौहारी सन्नाटा था, इसलिए तनु की हत्या कर उस की लाश ज्यों की त्यों छोड़ कर दोनों अपनेअपने घर चले गए थे.

अगले दिन दोनों फिर फ्लैट पर आए और तनु की लाश के 16 टुकड़े कर उन्हें फ्रिज में ठूंस दिया, जिस से बदबू न आए. 3-4 दिन चंदन अपना डर मिटाने फ्लैट पर आताजाता रहा. चौथे दिन फ्लैट में दाखिल होते ही उसे मांस के टुकड़ों से गंध आती महसूस हुई तो दोनों ने मिल कर लाश के उन टुकड़ों को अलगअलग थैलियों में पैक कर के उन्हें कार में रख कर बड़वाह के जंगल में फेंक आए.

चंदन और महिम के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने के लिए जरूरी था कि तनु की लाश का कोई टुकड़ा मिले. इस बाबत पुलिस वाले लगातार भागादौड़ी करते रहे. पुलिस की आधा दर्जन टीमें जंगलों की खाक छानती रहीं, पर तनु की लाश का कोई टुकड़ा उन्हें नहीं मिला. नदियों में भी तलाशी ली गई, पर उस से भी कुछ हासिल नहीं हुआ. बस एक गुदड़ी ही बरामद हो पाई.

इस बिना पर आईपीसी की धाराओं 302 व 201 के तहत हत्या का मामला दर्ज कर पुलिस ने चंदन राजौरिया और पत्रकार महिम शर्मा को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. इन के बयानों से जो कहानी सामने आई, उसे आप ऊपर पढ़ ही चुके हैं.

दोनों मुजरिमों ने अपने बयान में जुर्म जरूर स्वीकार कर लिया है, पर अदालत में उसे साबित कर पाना टेढ़ी खीर होगी, क्योंकि तनु की हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है, उस की लाश भी बरामद नहीं हुई है. इस के अलावा हत्या में प्रयुक्त हथियार भी नहीं मिले हैं. ऐसे में संदेह का लाभ उन्हें मिल सकता है. तय है, बचाव पक्ष का वकील यह दलील भी देगा कि इस से तो यह भी साबित नहीं होता कि वाकई तनु की हत्या हुई है. पुलिस ने जोरजबरदस्ती कर उस के मुवक्किलों से झूठ बुलवा लिया है.

अंजाम कुछ भी हो, पर अपनी इस हालत की एक बड़ी जिम्मेदार तनु खुद भी थी, जो 2 में से एक पति की भी न हुई और एक ऐसे ब्लैकमेलर पर अपना सब कुछ लुटा बैठी, जिस ने अंतत: उस की सांसें छीन लीं. क्योंकि वह गुनाह में उस का साथ देने को तैयार नहीं हो रही थी.

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