सरस सलिल विशेष

अप्रैल के महीने में यूं तो इतनी गरमी नहीं पड़ती, लेकिन 2018 का अप्रैल महीना इस बार शुरू से ही कुछ ज्यादा गरमाने लगा था. इसीलिए जल्दी बंद होने वाले बाजार भी देर तक खुलने लगे थे. दिल्ली से मात्र 60 किलोमीटर दूर बसे उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक मोहल्ला है दयानंद नगर, जो शहर के सब से बड़े नाले के किनारे तंग गलियों वाला मोहल्ला है. इसी मोहल्ले में राकेश रूहेला अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी कृष्णा के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा था.

राकेश दिल्ली के शाहदरा के भोलानाथ नगर स्थित बाबूराम टैक्नीकल इंस्टीट्यूट में लैब टेक्नीशियन की नौकरी करते थे. वह सुबह 7 बजे अपने घर से निकल कर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन तक पैदल जाते थे. वहां से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में सवार हो कर वह शाहदरा रेलवे स्टेशन पर उतरते और अपने इंस्टीट्यूट पहुंचते थे. शाम को भी वह इसी तरह ड्यूटी पूरी कर घर पहुंचते थे. ये उन का लगभग रोज का रूटीन था.

7 अप्रैल, 2018 की रात भी राकेश रूहेला रोजमर्रा की तरह करीब साढ़े 9 बजे दिल्ली से अपनी ड्यूटी खत्म कर के ट्रेन से शामली पहुंचे और वहां से नाला पट्टी रोड से पैदल घर की तरफ जा रहे थे.

रात करीब पौने 10 बजे वह अपने घर की गली के मोड़ के करीब पहुंचे ही थे कि उन के पास अचानक 2 युवक तेजी से आए, उन में से एक ने उन के पास जा कर गोली चला दी.

फायर की आवाज सुन कर आसपास खुली इक्कादुक्का दुकानों पर खड़े लोगों ने जब तक पलट कर देखा तब तक राकेश लहरा कर जमीन पर गिर चुके थे और उन्हें गोली मारने वाले दोनों युवक तेजी से विपरीत दिशा की तरफ भाग रहे थे.

लोगों ने देखते ही पहचान लिया कि गोली लगने के बाद जमीन पर खून से लथपथ पड़ा व्यक्ति राकेश रूहेला है. गली के नुक्कड़ पर ही किराने की दुकान चलाने वाला शैलेंद्र कुछ लोगों की मदद से जख्मी राकेश को एक टैंपो में लाद कर जिला अस्पताल ले गया. कुछ लोगों ने तब तक राकेश के घर जा कर इस बात की सूचना दे दी कि किसी ने राकेश पर गोली चलाई है.

मौत पर पत्नी और बेटी का नाटक

इस के बाद उन के घर में कोहराम मच गया. राकेश की पत्नी कृष्णा और बेटा तत्काल आसपड़ोस के लोगों को साथ ले कर सरकारी अस्पताल पहुंच गए. कृष्णा ने 3 नंबर गली में रहने वाले अपने देवर मुकेश को फोन कर के सारी बात बताई और जल्दी से सरकारी अस्पताल पहुंचने के लिए कहा. सरकारी अस्पताल पहुंचने के बाद घर वालों को डाक्टरों ने बताया कि राकेश की रास्ते में ही मौत हो चुकी थी.

पति की मौत की खबर सुनते ही कृष्णा का विलाप शुरू हो गया. मुकेश कुछ लोगों को साथ ले कर शामली कोतवाली पहुंचा, उस वक्त तक रात के करीब 11 बज चुके थे. थाने में मौजूद एसएसआई रफी परवेज को उस ने भाई की हत्या की जानकारी दी.

उस वक्त थानाप्रभारी अवनीश गौतम क्षेत्र की गश्त पर निकले हुए थे. जैसे ही थानाप्रभारी को इस घटना की खबर मिली तो उन्होंने एसएसआई को शिकायत की तहरीर ले कर मुकदमा दर्ज कराने और पुलिस दल के साथ सरकारी अस्पताल पहुंचने के निर्देश दिए.

राकेश का शव अस्पताल में ही रखा हुआ था. एसएसआई रफी परवेज ने मुकेश से ली गई तहरीर के आधार पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया.

इस के बाद वह एसआई सत्यनारायण दहिया, महिला एसआई नीमा गौतम, कांस्टेबल प्रताप व अन्य स्टाफ को साथ ले कर सरकारी अस्पताल पहुंच गए. तब तक थानाप्रभारी अवनीश गौतम भी वहां पहुंच गए.

घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को भी दे दी गई थी. इसलिए सूचना मिलने के बाद सीओ (सिटी) अशोक कुमार सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस के सभी अधिकारियों ने मृतक के परिवार वालों के अलावा राकेश को अस्पताल लाने वाले शैलेंद्र से राकेश पर हमला करने वालों और घटनाक्रम के बारे में पूछताछ की. लेकिन न तो किसी ने ये बताया कि वे हमलावरों को पहचानते हैं, न ही परिजनों ने किसी पर हत्या का शक जताया.

हां, इतना जरूर पता चला कि मृतक अपने औफिस के लोगों और जानपहचान वालों के साथ मिल कर महीने की कमेटी डालने का काम करता था. अकसर उस के पास कमेटी की रकम होती थी.

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परिजनों ने आशंका जताई कि कहीं राकेश को किसी ने लूटपाट के उद्देश्य से तो गोली नहीं मार दी. मगर घटनास्थल पर बतौर चश्मदीद शैलेंद्र व अन्य लोगों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि गोली चलने के तुरंत बाद हमलावर तेजी से भाग गए थे. उन्होंने राकेश से किसी तरह की छीनाझपटी होते नहीं देखी.

पुलिस को भी चश्मदीदों की बात में सच्चाई दिखी, क्योंकि राकेश की जेब में रुपयों से भरा पर्स, अंगुली में सोने की अंगूठी, कलाई में घड़ी और हाथ में लिया बैग एकदम सहीसलामत थे. रात बहुत अधिक हो चुकी थी, इसलिए पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

अगले दिन सीओ (सिटी) और थानाप्रभारी ने जांच अधिकारी रफी परवेज के साथ बैठ कर जब पूरे घटनाक्रम पर विचार करना शुरू किया तो उन्हें लगा कि मामला उतना सीधा नहीं है, जितना दिखाई पड़ रहा है.

क्योंकि अगर बदमाशों को लूटपाट या छीनाझपटी करने के लिए राकेश को गोली मारनी होती तो वे किसी सुनसान जगह को चुनते न कि उस के घर के पास ऐसी जगह को, जहां लोगों की काफी आवाजाही थी.

पुलिस को बेलने पड़े पापड़

पुलिस को लगा कि या तो हत्या किसी रंजिश के कारण की गई है या फिर किसी ऐसे कारण से जो फिलहाल पुलिस की नजरों से छिपा है. थानाप्रभारी एक बार फिर राकेश रूहेला के घर पहुंचे. उन्होंने राकेश की पत्नी, उन की दोनों बेटियों, बेटे और भाई मुकेश से पूछताछ की.

किसी ने भी राकेश की हत्या के लिए न तो किसी पर शक जाहिर किया और न ही किसी से रंजिश की बात बताई. सीओ (सिटी) अशोक कुमार सिंह ने क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर धर्मेंद्र पंवार को भी बुला कर अपराध की इस गुत्थी को सुलझाने के काम पर लगा दिया.

राकेश की हत्या के अगले दिन पुलिस का सारा वक्त घर वालों और जानपहचान वालों से पूछताछ में लग गया. दोपहर बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद राकेश का शव घर वालों को सौंप दिया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि राकेश की मौत सिर में गोली लगने से हुई थी और गोली करीब डेढ़ फुट की दूरी से मारी गई थी, जिस का मतलब था कि हत्यारे राकेश की हत्या करना चाहते थे.

अगले दिन राकेश की हत्या की जांच का काम तेजी से शुरू हो गया. कातिल तक पहुंचने के लिए पुलिस के पास बस अब एक ही रास्ता था कि वह इलाके में लगे सीसीटीवी की फुटेज का सहारा ले कर पता लगाए कि राकेश को गोली मारने वाले कौन लोग थे.

हांलाकि इस दौरान क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर धर्मेंद्र पंवार ने अपनी टीम के साथ इलाके में सक्रिय लूटपाट गिरोह से जुड़े कई बदमाशों को हिरासत में ले कर पूछताछ कर ली थी. सत्यता की जांच के लिए तमाम बदमाशों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन भी देखी गई, मगर इस वारदात में किसी के भी शामिल होने की पुष्टि नहीं हो सकी.

सीसीटीवी से खुलना शुरू हुआ राज

इधर थानाप्रभारी अवनीश गौतम ने स्टेशन से घटनास्थल तक लगे 6 सीसीटीवी कैमरों की जांच की, तो पता चला कि उन में से एक खराब था. कुल बचे 5 सीसीटीवी कैमरे बाकायदा काम कर रहे थे. पुलिस को पूरी उम्मीद थी कि अगर हत्यारे काफी दूर से राकेश रूहेला का पीछा कर रहे थे तो कहीं न कहीं वे सीसीटीवी फुटेज में जरूर कैद हुए होंगे.

थाना पुलिस ने क्राइम ब्रांच की मदद से इन सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखनी शुरू कर दीं. इसी बीच 12 अप्रैल को कोतवाली प्रभारी अवनीश गौतम का तबादला हो गया. उन की जगह जितेंद्र सिंह कालरा आए.

जितेंद्र सिंह कालरा को यूपी पुलिस में सुपरकौप के नाम से जाना जाता है. कार्यभार संभालते ही नए थानाप्रभारी का सामना सब से पहले राकेश रूहेला के पेचीदा केस से हुआ. उन्होंने इस मामले में अब तक की गई जांच पर नजर डाली.

राकेश हत्याकांड के हर पहलू को बारीकी से समझने के बाद कालरा को लगा कि जांच आगे बढ़ने से पहले उन्हें उन सीसीटीवी फुटेज को जरूर देखना चाहिए.

कालरा ने क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर धर्मेंद्र पंवार और उन की टीम के साथ बैठ कर फुटेज देखने का काम शुरू किया. 5 घंटे तक फोरैंसिक एक्सपर्ट के साथ सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद आखिर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली.

पता चला कि जिस जगह राकेश रूहेला को गोली मारी गई थी, उस से 50 कदम की दूरी पर एक इलैक्ट्रौनिक शौप से राकेश ने कुछ सामान खरीदा था. उसी समय 2 युवक राकेश का पीछा करते हुए दिखे. इन में से एक के हाथ में तमंचे जैसा हथियार दिखाई दे रहा था.

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हालांकि उन के चेहरे पूरी तरह तो नहीं दिख रहे थे, लेकिन आकृति देख कर ऐसा कोई भी व्यक्ति जिस ने उन लोगों को पहले कभी देखा हो, पहचान कर बता सकता था कि वे कौन हैं. सब से पहले थानाप्रभारी ने उस रात घटनास्थल के चश्मदीदों, इस के बाद मुकेश को थाने बुला कर उन से फुटेज देख कर कातिल की पहचान करने को कहा.

राकेश रूहेला की पत्नी कृष्णा व दोनों बेटियों तथा कृष्णा के देवर मुकेश ने सीसीटीवी में दिखे उन 2 लोगों को पहचानने से साफ इनकार कर दिया. लेकिन पुलिस को 2 ऐसे व्यक्ति मिल गए, जिन्होंने जांच को एक नई दिशा दे दी.

जिस किराने की दुकान के सामने राकेश को गोली मारी गई थी, उस समय उस दुकान के पास शैलेंद्र सिंह और राकेश का बेटा विशाल खड़े थे, उन्होंने सीसीटीवी में दिख रहे संदिग्धों की पहचान कर ली. शैलेंद्र ने फुटेज में दिख रहे दोनों युवकों की पहचान कर बताया कि राकेश को गोली मार कर जो युवक भागे थे, उन की आकृति बिलकुल सीसीटीवी फुटेज में दिखाई पड़ रहे युवकों जैसी ही थी.

संदेह गहराता गया, दायरा छोटा होता गया

शैलेंद्र ने बताया कि इन में से एक युवक को उस ने कई बार उसी गली में आतेजाते देखा था, जहां राकेश का घर था. कालरा ने गली के नुक्कड़ पर खड़े रहने वाले कुछ दूसरे लोगों से कुरेद कर पूछा तो उन्होंने भी दबी जुबान से बताया कि उन्होंने उस युवक को कई बार दिन में राकेश के घर आतेजाते देखा था.

इस के बाद थानाप्रभारी कालरा ने मृतक के परिजनों को भी सीसीटीवी फुटेज दिखाई. परिवार के सभी सदस्यों में से सिर्फ राकेश के 20 वर्षीय बेटे विशाल ने बताया कि सीसीटीवी में दिख रहे युवक का नाम समीर है, जो उस की बहन वैष्णवी उर्फ काव्या का पूर्व सहपाठी है और अकसर काव्या से मिलने के लिए भी आता था.

यह बात चौंकाने वाली थी. क्योंकि जब सीसीटीवी में दिख रहे युवक को राकेश की पत्नी व बेटियां जानतीपहचानती थीं तो उन्होंने उसे पहचानने से इनकार क्यों किया.

थानाप्रभारी कालरा को साफ लगने लगा कि दाल में कुछ काला है. क्योंकि जबजब उन्होंने कृष्णा और उस की दोनों बेटियों से पूछताछ की, तबतब वो रोनेबिलखने के साथ पूछताछ के मकसद को भटका देती थीं.

कालरा ने मृतक की पत्नी कृष्णा और उस के बच्चों के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि कृष्णा की छोटी बेटी काव्या और समीर के बीच घटना के 2 दिन पहले से दिन और रात में कई बार बातचीत हुई थी. इतना ही नहीं जिस वक्त वारदात को अंजाम दिया गया, उस के कुछ देर बाद भी 3-4 बार दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई थी. समीर के मोबाइल नंबर की लोकेशन भी घटनास्थल के पास की मिली.

अब पूरी तरह साफ हो चुका था कि राकेश रूहेला की हत्या में कहीं न कहीं समीर शामिल है. पुलिस को यह भी पता चल गया कि समीर मोहल्ला हाजीपुरा नाला पटरी में रहने वाले डा. जरीफ का बेटा है.

समीर आया पुलिस की पकड़ में

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थानाप्रभारी कालरा के पास अब समीर को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने के लिए तमाम सबूत थे. उन्होंने टीम के सदस्यों को उस का सुराग लगाने को कहा. आखिर एक कांस्टेबल की सूचना पर उन्होंने 17 अप्रैल को नाला पटरी के पास खेड़ी करमू के रेस्तरां से उसे हिरासत में ले लिया. उस समय उस के साथ मृतक राकेश की बेटी काव्या के अलावा समीर का चचेरा भाई शादाब भी था.

थानाप्रभारी ने समीर को थाने ले जा कर पूछताछ की तो उसे टूटने में ज्यादा वक्त नहीं लगा. समीर ने कबूल कर लिया कि राकेश रूहेला की हत्या उस ने ही अपने चचेरे भाई शादाब के साथ मिल कर की थी और हत्या करने के लिए काव्या ने ही उसे मजबूर किया था. समीर से पूछताछ के बाद हत्या की जो हैरतअंगेज कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली थी.

काव्या की समीर के साथ पिछले 3 सालों से दोस्ती थी. वे दोनों हाईस्कूल में साथ पढ़ते थे. इंटरमीडिएट तक पढ़ाई के बाद काव्या कैराना स्थित एक कालेज से बीएससी करने लगी, जबकि समीर को उस के घर वालों ने एमबीबीएस की कोचिंग करने के लिए राजस्थान के कोटा में अपने एक रिश्तेदार के पास भेज दिया.

दरअसल, समीर के पिता जरीफ बीएएमएस डाक्टर थे और शामली में अपना क्लीनिक चलाते थे. उन की चाहत थी कि समीर बड़ा हो कर डाक्टर बने. इसीलिए उन्होंने डाक्टरी की कोचिंग के लिए उसे कोटा भेज दिया था. उन के रिश्तेदार का बेटा भी समीर के साथ ही एमबीबीएस की तैयारी कर रहा था.

काव्या से शुरू हुई समीर की दोस्ती गुजरते वक्त के साथ प्यार में बदल गई थी. काव्या के प्रति समीर की चाहत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि एक दिन उस ने अपने हाथ पर उस का नाम भी गुदवा लिया. काव्या को यह तो पता था कि समीर उस पर मरता है लेकिन उसे ये नहीं मालूम था कि उस की दीवानगी में वह उस का नाम अपने हाथ पर भी गुदवा लेगा.

इधर इंटरमीडिएट के बाद दोनों चोरीछिपे पढ़ाई के बहाने कभी घर में तो कभी घर के बाहर मिलतेजुलते थे. धीरेधीरे यह बात राकेश के कानों तक जा पहुंची. राकेश की पत्नी कृष्णा के संबध भी अपने पति से ठीक नहीं थे.

दरअसल, तेजतर्रार और चंचल स्वभाव वाली कृष्णा के चरित्र पर राकेश को पहले से ही शक था. राकेश को भनक थी कि कृष्णा उस के ड्यूटी जाने के बाद घर से बाहर अपने चाहने वालों से मिलती रहती है. राकेश को तो इस बात का भी शक था कि कृष्णा के चाहने वाले उस से मिलने के लिए घर में भी आते हैं.

यही कारण था कि अकसर राकेश और कृष्णा के बीच झगड़ा होता रहता था. अपनी इसी झल्लाहट में राकेश कृष्णा पर अकसर हाथ भी छोड़ देता था. जब राकेश शराब पी लेता तो वह कृष्णा को न सिर्फ गालियां देता, बल्कि मारपीट करने के दौरान यहां तक तंज कस देता कि उसे शक है कि उस की तीनों औलाद असल में उस की हैं या किसी और की.

पिता का विरोध करने के लिए जब उस की दोनों बेटियां वैशाली और वैष्णवी उर्फ काव्या कोशिश करतीं तो उन्हें भी राकेश की मार का शिकार होना पड़ता.

इस दौरान जब एक दिन राकेश को पता चला कि काव्या का चक्कर समीर नाम के एक मुसलिम युवक से चल रहा है तो उन का गुस्सा और बढ़ गया. उस ने पत्नी के साथ अब दोनों बेटियों पर भी लगाम कसनी शुरू कर दी. हालांकि समीर एमबीबीएस की तैयारी करने के लिए कोटा जरूर चला गया था, लेकिन वह हर हफ्ते चोरीछिपे अपने परिवार को बताए बिना शामली आता और काव्या से मिल कर चला जाता था.

काव्या और समीर की दोस्ती और परवान चढ़ रहे प्यार की कहानी की खबर काव्या की मां कृष्णा और उस की बड़ी बहन वैशाली को थी. इस की जानकारी राकेश को जब मोहल्ले के कुछ लोगों से मिली तो उस ने काव्या के साथ सख्ती से पेश आना शुरू कर दिया.

राकेश थक गया था लोगों के ताने सुन कर

शक की आग में जल रहे राकेश के गुस्से में एक दिन उस समय घी पड़ गया, जब वह अपनी ड्यूटी से घर लौट रहा था. मोहल्ले के ही एक व्यक्ति ने उसे रोक कर कहा, ‘‘राकेश भाई, आंखों पर ऐसी कौन से पट्टी बांध रखी है आप ने, जो दूसरे मजहब का एक लड़का सरेआम आप की बेटी को ले कर घूमता है. आप के घर आताजाता है. लेकिन न तो आप उसे रोक रहे हैं और न ही आप की धर्मपत्नी. अरे भाई अगर कोई डर या कोई दूसरी वजह है तो हमें बताओ, हम रोक देंगे उस लड़के को.’’

उस दिन कालोनी के व्यक्ति का ताना सुन कर राकेश के तनबदन में आग लग गई. ऐसा पहली बार नहीं हुआ था. इस से पहले भी अलगअलग लोगों ने दबी जुबान में इस बात की शिकायत की थी, लेकिन अब काव्या की शिकायतें खुल कर होने लगीं. खुद राकेश ने भी एकदो बार समीर को अपने घर आते देखा था.

राकेश ने पहले समीर को समझा कर कह दिया कि वह उस के घर न आया करे, क्योंकि काव्या से उस का मिलनाजुलना उन्हें पसंद नहीं है. बाद में जब समझाने पर भी समीर नहीं माना तो उस ने समीर को एक बार 2-3 थप्पड़ भी जड़ दिए. साथ ही धमकी भी दी कि अगर फिर कभी काव्या से मिलने की कोशिश की तो वह उसे पुलिस को सौंप देंगे.

इस के बाद से समीर ने काव्या से मिलने में सावधानी बरतनी शुरू कर दी. अब या तो वह काव्या से सिर्फ उस के घर पर ही मिलता था या फिर दोनों शहर से बाहर कहीं दूर जा कर मिलते थे.

राकेश के ड्यूटी पर निकल जाने के बाद घर में क्याक्या होता, यह खबर रखने के लिए राकेश ने अपने घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा लिए. इन सीसीटीवी कैमरों का मौनीटर उस ने अपने मोबाइल फोन में इंस्टाल करवा लिया. इसी सीसीटीवी के जरिए वह राज खुल गया, जिस का राकेश को शक था. उस ने मौनीटर पर खुद देखा कि किस तरह उस की गैरमौजूदगी में उस की पत्नी और बेटी से मिलने के लिए उन के आशिक उसी के घर में आते हैं.

पहले पत्नी उतरी विरोध पर

पत्नी और बेटी के चरित्र के इस खुलासे के बाद राकेश का मन बेटियों और पत्नी के प्रति खट्टा हो गया. राकेश के लिए पत्नी और बेटियों के साथ मारपीट करना अब आए दिए की बात हो गई.

रोजरोज की मारपीट और बंधनों से परेशान कृष्णा ने एक दिन अपनी दोनों बेटियों के सामने खीझते हुए बस यूं ही कह दिया कि जिंदा रहने से तो अच्छा है कि ये इंसान मर जाए, पता नहीं वो कौन सा दिन होगा जब हमें इस आदमी से छुटकारा मिलेगा.

बस उसी दिन काव्या के दिलोदिमाग में ये बात बैठ गई कि जब तक उस का पिता जिंदा है, वह और उस की मांबहनें आजादी की सांस नहीं ले सकतीं, न ही अपनी मरजी से जिंदगी जी सकती हैं.

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काव्या के दिमाग में उसी दिन से उधेड़बुन चलने लगी कि आखिर ऐसा क्या किया जाए कि उस का पिता उन के रास्ते से हट जाए. अचानक उस की सोच समीर पर आ कर ठहर गई. उसे लगने लगा कि समीर उस से जिस कदर प्यार करता है, बस एक वही है, जो उस की खातिर ये काम कर सकता है.

लेकिन इस के लिए जरूरी था कि समीर को भावनात्मक रूप से और लालच दे कर इस काम के लिए तैयार किया जाए. इस बात का जिक्र काव्या ने अपनी मां से किया तो उस ने भी हामी भर दी. बस फिर क्या था काव्या मौके का इंतजार करने लगी.

एक दिन मौका मिल गया. समीर ने रोजरोज चोरीछिपे मिलने से परेशान हो कर काव्या से कहा कि वह इस तरह मिलनेजुलने से परेशान हो चुका है, क्यों न वे दोनों भाग जाएं और शादी कर लें.

पिता को बताया जल्लाद

काव्या ने कहा कि वह उस से भाग कर नहीं बल्कि पूरे जमाने के सामने ही शादी करेगी लेकिन इस के लिए एक समस्या है. काव्या ने समीर से कहा कि उस के पिता उन के प्रेम में बाधा बने हैं. उन के जीते जी कभी वे दोनों एक नहीं हो सकते. उन के मेलजोल के कारण ही पिता आए दिन पूरे परिवार के साथ मारपीट करते है.

यदि वह उन्हें रास्ते से हटा दे तो वह उस के साथ शादी कर लेगी. काव्या ने समीर को ये भी लालच दिया कि सहारनपुर में उन का एक 100 वर्गगज का प्लौट है. अगर वो उस के पिता की हत्या कर देगा तो वह प्लौट वह उस के नाम कर देगी.

‘‘काव्या, ये तुम कैसी बात कर रही हो. ठीक है वो तुम लोगों के साथ सख्ती करते हैं, लेकिन इस का मतलब ये तो नहीं कि तुम उन की हत्या करने की बात सोचो.’’ समीर बोला.

‘‘समीर, तुम मेरी बात समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रहे हो. तुम्हें पता नहीं मेरा बाप इंसान नहीं है जानवर है, जानवर. वो सिर्फ मुझे ही नहीं मेरी बहन और मां को भी छोटीछोटी बात पर पीटता है.’’

काव्या ने समीर के सामने अपने पिता को ऐसे जल्लाद इंसान के रूप में पेश किया कि समीर को यकीन हो गया कि राकेश की हत्या के बाद ही काव्या और उस के घर वालों को चैन की सांस मिल सकेगी. लिहाजा उस ने काव्या से वादा किया कि वह किसी भी तरह उस के पिता की हत्या कर के रहेगा.

काव्या ने एक और बात कही, जिस से समीर का मनोबल और बढ़ गया. उस ने समीर को बताया कि उस के पिता कमेटी डालने का धंधा भी करते हैं, जिस की वजह से रोज उन के पास हजारों रुपए रहते हैं. काव्या ने उसे समझाया कि जब तुम उन्हें गोली मारो तो उन का बैग छीन कर भाग जाना, इस से लगेगा कि उन की हत्या लूट के लिए हुई है. और हां, बैग में जो भी रकम हो वो तुम्हारी.

इस के बाद समीर के सामने समस्या यह थी कि वह राकेश की हत्या करने के लिए हथियार कहां से लाए. लिहाजा उस ने काव्या से सवाल किया, ‘‘यार, तुम्हारे बाप को तो मैं मार दूंगा लेकिन समस्या ये है कि मेरे पास कोई पिस्तौल वगैरह तो है नहीं फिर मारूंगा कैसे?’’

‘‘तुम उस की फिक्र मत करो. कैराना में हुए दंगों के वक्त पापा ने अपनी हिफाजत के लिए एक तमंचा खरीदा था, साथ में कुछ कारतूस भी हैं. मैं 1-2 दिन में तुम्हें ला कर दे दूंगी. उसी से गोली मार देना उन को.’’

समीर न तो पेशेवर अपराधी था और न ही उस में अपराध करने की हिम्मत थी. इसलिए उस ने अपने चाचा अनीस के बड़े बेटे शादाब से बात की. वह समीर का ही हमउम्र था. दोनों की खूब पटती थी.

जब समीर ने अपनी मोहब्बत की मजबूरी शादाब के सामने बयां की तो वह भी पशोपेश में पड़ गया. समीर ने शादाब को ये भी बता दिया था कि इस काम को करने के बाद उसे न सिर्फ उस की मोहब्बत मिल जाएगी बल्कि सहारनपुर में 100 वर्गगज का एक प्लौट तथा वारदात के बाद कुछ नकदी भी मिलेगी, जिस में से वह उसे भी बराबर का हिस्सा देगा.

शादाब भी लड़कपन की उम्र से गुजर रहा था. लालच ने उस के मन में भी घर कर लिया. इसलिए उस ने समीर से कह दिया, ‘‘चल भाई, तेरी मोहब्बत के लिए मैं तेरा साथ दूंगा.’’

वारदात से 3 दिन पहले किसी बात पर राकेश ने फिर से अपनी पत्नी कृष्णा और बेटी काव्या की पिटाई कर दी. जिस के बाद काव्या को लगा कि अब पिता को रास्ते से हटाने में देर नहीं करनी चाहिए.

उस ने अगली सुबह ही समीर को फोन कर उसे एक जगह मिलने के बुलाया और वहां उसे घर में रखा पिता का तमंचा और 2 कारतूस ले जा कर सौंप दिए.

खेला मौत का खेल

उसी दिन उस ने अपने पिता की हत्या के लिए 7 अप्रैल की तारीख भी मुकर्रर कर दी. काव्या ने समीर से साफ कह दिया कि अब वह उस से उसी दिन मिलेगी जब वह उस के पिता की हत्या को अंजाम दे देगा. मोहब्बत से मिलने की आस में समीर ने भी अब देर करना उचित नहीं समझा.

7 अप्रैल को जब राकेश अपनी ड्यूटी पर गया तो उस दिन सुबह से ही समीर काव्या से लगातार फोन पर संपर्क में रहा. और दिन भर ये जानकारी लेता रहा कि उस के पिता दिल्ली से कब चलेंगे. काव्या वैसे तो अपने पिता को फोन नहीं करती थी, लेकिन उस दिन उस ने दिन में 2 बार उन्हें किसी न किसी बहाने फोन किया.

शाम को भी करीब साढे़ 8 बजे काव्या ने पिता को फोन कर के पूछा कि वह कहां हैं. राकेश ने बेटी को बताया कि वह ट्रेन में हैं. काव्या ने फोन करने की वजह छिपाने के लिए कहा कि इलैक्ट्रिक प्रेस का प्लग खराब हो गया है, जब वह घर आएं तो बिजली वाले की दुकान से एक प्लग लेते आएं.

बस ये जानकारी मिलते ही काव्या ने समीर को फोन कर के बता दिया कि उस के पिता रोज की तरह 9, सवा 9 बजे तक शामली स्टेशन पहुंच जाएंगे. जिस के बाद समीर भी शादाब को लेकर स्टेशन पहुंच गया.

रात को करीब साढ़े 9 बजे राकेश जब स्टेशन से बाहर आया तो समीर व शादाब उस का पीछा करने लगे. रास्ते में कई जगह ऐसा मौका आया कि एकांत पा कर वे राकेश पर गोली चलाने ही वाले थे कि अचानक किसी गाड़ी या राहगीर के आने पर वे राकेश को गोली न मार सके. इसी तरह पीछा करतेकरते दोनों राकेश के घर के करीब पहुंच गए.

इस दौरान राकेश ने बिजली की दुकान से इलैक्ट्रिक प्रेस का प्लग खरीदा और फिर घर की तरफ चल दिया. समीर को लगा कि अगर वह अब भी राकेश का काम तमाम नहीं कर सका तो मौका हाथ से निकल जाएगा और काव्या कभी उसे नहीं मिल सकेगी. उस ने तमंचा झट से शादाब के हाथ में थमा दिया और बोला, ‘‘ले भाई, मार दे इसे गोली.’’

सब कुछ अप्रत्याशित ढंग से हुआ. शादाब ने तमंचा हाथ में लिया और भागते हुए बराबर में पहुंच कर राकेश पर गोली चला दी. गोली मारने के बाद समीर और शादाब ने पलट कर यह भी नहीं देखा कि गोली राकेश को कहां लगी है और वो जिंदा है या मर गया.

बस उन्हें डर था कि वो कहीं पकड़े न जाएं, इसलिए वे तुरंत घटनास्थल से भाग गए. समीर ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचते ही काव्या को फोन कर के सूचना दे दी कि उस ने उस के पिता को गोली मार दी है.

इस के बाद रात भर में काव्या और समीर के बीच कई बार बातचीत हुई. समीर को ये जान कर सुकून मिला कि गोली सही निशाने पर लगी और उस ने राकेश का काम तमाम कर दिया है.

समीर ने तमंचा और बचा हुआ एक कारतूस उसी रात घर के पास नाले के किनारे एक झाड़ी में छिपा कर रख दिया था, जिसे पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद उस की निशानदेही पर बरामद कर लिया. पुलिस ने इस मामले में हत्या के अभियोग के अलावा समीर और शादाब के खिलाफ शस्त्र अधिनियम का मामला भी दर्ज कर लिया.

एक गोली ने खत्म की लव स्टोरी

विस्तृत पूछताछ के बाद थानाप्रभारी जितेंद्र सिंह कालरा ने समीर और शादाब के साथ काव्या को भी हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से तीनों को जेल भेज दिया गया.

लिहाजा 3 दिन तक जांच और कुछ अन्य साक्ष्य जुटाने के बाद थानाप्रभारी कालरा के निर्देश पर पुलिस टीम ने कृष्णा और वैशाली को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों ने पुलिस पूछताछ में राकेश की हत्या की साजिश में शामिल होने का अपराध कबूल कर लिया. पुलिस ने 17 अप्रैल को दोनों को जेल भेज दिया.

अनैतिक रिश्तों का विरोध करने वाले पति और पिता की हत्या की सुपारी देने वाली मां और बेटियां तो जेल में अपने किए की सजा भुगत ही रही हैं, लेकिन समीर ने प्रेम में अंधे हो कर अपने डाक्टर बनने के सपने को खुद ही तोड़ दिया.

– कथा पुलिस की जांच और काररवाई पर आधारित