सरस सलिल विशेष

16 फरवरी, 2017 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के गांव सिरकोई भूड़ निवासी अरविंद  गांव की ही रहने वाली शीतल के घर पहुंचा. प्रौपर्टी डीलर अरविंद शीतल को मुंहबोली बहन मानता था. शीतल एक बुटीक में काम करती थी.

अरविंद ने शीतल के घर जा कर उस की मां अनीता देवी से कहा कि गजरौला में उस की मौसेरी बहन की शादी है, इसलिए वह शीतल को उस के साथ भेज दें. अनीता अरविंद को घर के सदस्य की तरह मानती थी और उस पर विश्वास करती थी, इसलिए उस ने शीतल को उस के साथ गजरौला भेज दिया.

अगले दिन यानी 17 फरवरी, 2017 को अरविंद गजरौला से लौट कर घर आ गया, पर उस के साथ शीतल नहीं आई. अनीता ने अरविंद से शीतल के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘आंटी, शीतल मेरे साथ गई जरूर थी, पर रास्ते में मुझ से 1500 रुपए ले कर लौट आई थी.’’

इस के बाद अरविंद ने शीतल के घर वालों को विश्वास में ले कर कहा, ‘‘देखो, मुझे यह बात कहनी तो नहीं चाहिए, जो आप को बुरी लगे. पर मैं बताना चाहता हूं कि आजकल शीतल पर महेंद्र कुछ ज्यादा ही मेहरबान है. उन दोनों के बीच कुछ चल रहा है. मुझे लगता है कि शीतल महेंद्र के साथ ही गई है.’’

शीतल की मां अनीता तुरंत महेंद्र के घर पहुंच गई. उस ने पूछा कि महेंद्र कहां है तो उस के घर वालों ने बताया कि उस का कल से ही कुछ पता नहीं है. जब भी उसे फोन किया जाता है, उस के फोन की घंटी तो बजती है, लेकिन वह फोन उठाता नहीं है. यही बात अनीता ने भी बताई कि शीतल के फोन की घंटी तो बज रही है, पर वह फोन उठा नहीं रही है.

महेंद्र और शीतल के घर वालों ने यही समझा कि दोनों को अभी दुनियादारी की समझ नहीं है, जल्दी ही वापस आ जाएंगे. लेकिन जब 2 दिन बाद भी दोनों घर नहीं आए तो शीतल और महेंद्र के घर वालों ने मझोला थाने में उन की गुमशुदगी दर्ज करा दी. थाना मझोला पुलिस ने भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया.

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सोचा कि प्रेमप्रसंग का मामला है, इसलिए दोनों के घर वालों से कह दिया कि वे अपनीअपनी रिश्तेदारियों में उन्हें खोजें. जब मिल जाएं तो थाने आ कर खबर कर दें.

जब कहीं से भी शीतल और महेंद्र के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो दोनों के घर वालों ने मुरादाबाद के एसएसपी मनोज तिवारी, जिलाधिकारी सुहैर बिन सगीर, डीआईजी ओमकार सिंह से गुहार लगाई. इस पर भी उन की शिकायत पर कोई कारवाई नहीं हुई.

मजबूरन शीतल के घर वालों ने महिला थाने और एएसपी औफिस के बाहर जाम लगा दिया. महिला थाना और एएसपी औफिस आसपास ही स्थित हैं. एएसपी यशवीर सिंह ने शीतल के घर वालों को समझाबुझा कर भरोसा दिया कि पुलिस जल्द ही शीतल का पता लगाएगी. इस आश्वासन के बाद जाम खुल गया.

28 फरवरी, 2017 को संभल जिले के थाना असमोली के गांव घूंघरपुर का चेतन सिंह सुबह अपने आम के बाग में गया तो उस ने देखा कि कुछ कुत्ते किसी लाश को खा रहे हैं.

चेतन सिंह ने तुरंत इस की सूचना थाना असमोली पुलिस को फोन द्वारा दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी ब्रजेश यादव फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. वह शव किसी महिला का था. घुटने के नीचे का हिस्सा छोड़ कर पूरी लाश कुत्ते खा गए थे. कपड़ों से पुलिस ने अनुमान लगाया कि लाश महिला की है. पास ही एक गड्ढा था, जिस से अंदाजा लगाया कि लाश इसी गड्डे में दफनाई गई थी.

एसआई मेघराज सिंह ने मौके की जरूरी काररवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने उस का डीएनए कराने के लिए सैंपल सुरक्षित कर लिया.

अगले दिन किसी युवती की सड़ीगली लाश मिलने की खबर अखबार में छपी. अनीता के कई रिश्तेदार संभल में रहते थे. उन्हें पता था कि अनीता की बेटी शीतल कई दिनों से लापता है. अखबार में अज्ञात युवती की लाश मिलने की खबर पढ़ कर एक रिश्तेदार ने शीतल के घर वालों को फोन कर दिया.

यह जानकारी मिलने के बाद शीतल के पिता जसपाल सिंह पत्नी अनीता को ले कर थाना असमोली पहुंच गए. पुलिस ने जब बरामद कपड़े आदि उन्हें दिखाए तो दोनों ही फूटफूट कर रोने लगे. वे कपड़े उन की बेटी शीतल के थे. कपड़ों की शिनाख्त से स्पष्ट हो गया कि चेतन सिंह के बाग में जो लाश मिली थी, वह जसपाल की बेटी शीतल की थी.

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19 मार्च, 2017 को जिला अमरोहा के थाना सैद नगली के गांव ढक्का निवासी शराफत हुसैन के आम के बाग में भी जमीन में गड़ी एक लाश को कुत्ते नोचनोच कर खा रहे थे. शराफत हुसैन ने थाना सैद नगली पुलिस को यह बात बताई तो थोड़ी देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई.

पुलिस ने गड्ढा खोद कर जब लाश बाहर निकाली तो वह किसी पुरुष की थी, पर उस का सिर गायब था. घटनास्थल की तलाशी में वहां से थोड़ी दूरी पर एक मानव सिर मिल गया.

जल्दी ही इस लाश के मिलने की खबर पूरे जिले में फैल गई. थाना मझोला में शीतल और महेंद्र की गुमशुदगी दर्ज थी. शीतल की लाश संभल के थाना असमोली में मिल चुकी थी, जबकि महेंद्र के बारे में अभी तक कुछ नहीं पता चला था.

इसलिए मुरादाबाद के थाना मझोला की पुलिस 20 मार्च, 2017 को महेंद्र के 3 भाइयों कमल, सतपाल और अशोक को साथ ले कर थाना सैद नगली पहुंची. तीनों भाइयों ने उस शव की शिनाख्त अपने भाई महेंद्र के शव के रूप में कर दी. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवा कर शव महेंद्र के भाइयों को सौंप दिया.

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20मार्च, 2017 को महेंद्र का शव मुरादाबाद आया तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. सैकड़ों लोग शव को ले कर सम्राटनगर गेट के पास साईं अस्पताल के सामने दिल्ली रोड पर पहुंच गए. राष्ट्रीय राजमार्ग पर महेंद्र की लाश रख कर जाम लगा दिया. गांगन तिराहे से ले कर स्टेशन रोड, हरिद्वार रोड पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया. जाम की सूचना मिलते ही थाना मझोला पुलिस के साथ एएसपी डा. यशवीर सिंह भी पहुंच गए.

भीड़ आक्रोशित थी. वह हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग कर रही थी. माहौल को देखते हुए मुरादाबाद के अन्य थानों की पुलिस बुला ली गई. पुलिस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी पहुंच गए. उन्होंने भीड़ को आश्वासन दिया कि अभियुक्तों को 5 दिनों के अंदर गिरफ्तार कर लिया जाएगा. इस आश्वासन के बाद शाम 4 बजे से लगा जाम रात 8 बजे खुला.

जाम स्थल पर ही महेंद्र की अर्थी तैयार की गई और उसे लोको शेड शमशान घाट ले जा कर अंतिम संस्कार कर दिया गया. शीतल की मां अनीता ने बताया था कि 16 फरवरी को अरविंद शीतल को बुला कर ले गया था. उस के बाद वह लौट कर नहीं आई थी और अब तो अरविंद भी अपने घर से गायब था. महेंद्र के घर वालों ने भी प्रौपर्टी डीलर अरविंद पर शक जाहिर किया था.

पुलिस ने अरविंद के घर दबिश दी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. पुलिस ने उस के घर वालों पर दबाव बनाया. इस का नतीजा यह निकला कि अरविंद ने 23 मार्च, 2017 को मुरादाबाद की सीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया, जहां से पुलिस ने उसे 2 दिनों के रिमांड पर ले कर पूछताछ की.

पूछताछ में अरविंद ने स्वीकार कर लिया कि शीतल और महेंद्र की हत्या उसी ने कराई थी. इस के बाद उस ने दोनों हत्याओं की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

अरविंद की बहन दुर्गेश का गांव में ही बुटीक था. शीतल उसी के बुटीक पर काम करती थी. चूंकि वह उस की बहन की सहेली थी, इसलिए अरविंद उसे मुंहबोली बहन मानता था. दुर्गेश का शीतल के यहां आनाजाना था. उसी बीच सिरकोई भूड़ निवासी महेंद्र के अवैध संबंध दुर्गेश से हो गए. महेंद्र प्रौपर्टी डीलर का काम करता था.

घर वालों ने दुर्गेश को बहुत समझाया कि वह महेंद्र से संबंध न रखे, क्योंकि वह उन की बिरादरी का नहीं है. घर वालों के समझाने से दुर्गेश मान गई. इस के बाद घर वालों ने दुर्गेश की आननफानन में शादी कर दी. कुछ दिनों ससुराल में रह कर दुर्गेश मायके आ कर रहने लगी.

जब दुर्गेश के पति को पता चला कि उस की पत्नी के महेंद्र से संबंध थे तो उस ने दुर्गेश को तलाक दे दिया. इसी वजह से अरविंद महेंद्र से रंजिश रखने लगा.

पति से तलाक होने के बाद दुर्गेश का महेंद्र से मिलनाजुलना फिर से शुरू हो गया. घर वालों के समझाने के बाद भी दुर्गेश ने उस से मिलना बंद नहीं किया. इस की वजह से उन की बदनामी हो रही थी. एक दिन अरविंद ने गुस्से में दुर्गेश को गला घोंट कर मार डाला और लाश को सिरकोई भूड़ के पास रेलवे लाइन पर डाल आया.

ट्रेनों के गुजरने से दुर्गेश की लाश कट गई. रेलवे पुलिस और थाना मझोला पुलिस ने इसे आत्महत्या मान कर जांच आगे नहीं बढ़ाई. बहन को ठिकाने लगाने के बाद अरविंद ने ठान लिया कि वह महेंद्र को भी नहीं छोड़ेगा. वह महेंद्र को ठिकाने लगाने की योजना बनाने लगा.

कुछ दिनों पहले की बात है. शीतल का मोहल्ले के ही रवि से प्रेमसंबंध था. उस के घर वालों ने एक दिन उसे रवि के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया. घर वालों ने रवि को थाना मझोला पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस ने जब शीतल से पूछताछ की तो घर वालों के दबाव में उस ने रवि के खिलाफ बयान दे दिया. पुलिस ने रवि को जेल भेज दिया. रवि अभी भी मुरादाबाद जेल में बंद है.

बाद में शीतल को अफसोस हुआ कि उसे घर वालों के दबाव में रवि के खिलाफ बयान नहीं देना चाहिए था, क्योंकि वह सचमुच उसे चाहती थी. वह अकसर अपने प्रेमी रवि से मिलने जेल जाती रहती थी. उस ने रवि को भरोसा दिया था कि वह उसे जल्दी ही छुड़ा लेगी.

शीतल किसी भी तरह रवि की जमानत कराना चाहती थी, पर इस के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी. चूंकि अरविंद शीतल को बहन मानता था और शीतल भी उस पर भरोसा करती थी, इसलिए एक दिन उस ने अरविंद को कहा कि उस के बयान से रवि जेल चला गया है. पर अब वह उसे हर हालत में जेल से बाहर निकलवाना चाहती हूं.

अरविंद यह सुन कर बहुत खुश हुआ, क्योंकि जिस बात की वह योजना बना रहा था, वह शीतल की मदद से आसानी से पूरा हो सकती थी. उस ने कहा, ‘‘शीतल, तुम मेरी बहन हो. क्या मैं तुम्हारे इतने भी काम नहीं आ सकता. पर शीतल मेरा एक छोटा सा काम है, तुम उसे करा दो.’’

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‘‘बोलो, क्या करना है?’’ शीतल ने कहा.

‘‘देखो, आजकल महेंद्र से तुम्हारी कुछ ज्यादा ही बन रही है. तुम्हें तो पता है कि दुर्गेश की आत्महत्या के बाद से मैं महेंद्र से बात नहीं करता. हम दोनों प्रौपर्टी डीलिंग का काम करते हैं. कांशीरामनगर के पास एक बड़े प्लौट का सौदा मैं ने कर लिया है. महेंद्र उस में टांग अड़ा रहा है. वह पार्टी को मेरे बारे में उलटासीधा बता कर गुमराह कर रहा है. तुम्हें कुछ नहीं करना. बस तुम पार्टी के पास महेंद्र को ले आना. वहां पर आमनेसामने पार्टी से बात हो जाएगी. इस काम के लिए तुम्हें 50 हजार रुपए और एक प्लौट मिल जाएगा.’’ अरविंद ने कहा.

‘‘इतना सा काम है, यह तो मैं चुटकी बजा कर करा दूंगी.’’ शीतल ने कहा.

16 फरवरी, 2017 की शाम घूमने के बहाने वह महेंद्र को ले गई. दिल्ली रोड स्थित गांगन नदी के तिराहे से सैद नगली के लिए औटो बुक कर के वहां पहुंच गई. वहां अरविंद, सुपारीकिलर गुलाम, अरविंद का भाई राजू और मामा कल्लू मिल गए. सब ने मिल कर पहले शीतल की हत्या की, क्योंकि वह पूरे मामले की राजदार थी. इस के बाद उन्होंने महेंद्र को भी मौत के घाट उतार दिया.

इन लोगों ने महेंद्र की लाश सैद नगली के गांव ढक्का की एक बाग में गड्ढा खोद दबा दिया तो वहां से 2 किलोमीटर दूर संभल के थाना असमोली के गांव घूंघरपुर के एक बाग में शीतल को दफना दिया.

पुलिस ने अरविंद की निशानदेही पर मोबाइल फोन और हत्या में प्रयुक्त फरसा सोनकपुर के जंगल से बरामद कर लिया था. विस्तार से पूछताछ के बाद पुलिस ने अरविंद को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक अन्य अभियुक्त पुलिस के हाथ नहीं लगे थे. पुलिस सरगरमी से उन की तलाश कर रही थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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