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मथुरा, उत्तर प्रदेश का रहने वाला विश्वेंद्र सिंह पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करतेकरते थक चुका था. आखिरकार उस ने हार मान कर अपना खुद का कारोबार शुरू करने की ठानी.

इस के लिए विश्वेंद्र सिंह को पैसों की जरूरत थी. इस वजह से उस ने कई बैंकों से लोन लेने के लिए बातचीत की. लेकिन उसे वहां भी निराशा ही हाथ लगी, क्योंकि इस के लिए उसे बैंक में सिक्योरिटी के रूप में अचल संपत्ति या गारंटर की जरूरत थी, लेकिन उस की बेरोजगारी के चलते कोई भी उस का गारंटर बनने को तैयार नहीं था.

एक दिन विश्वेंद्र सिंह की अखबार पढ़ते हुए उस में छपे एक इश्तिहार पर नजर पड़ी. ‘गारैंटैड लोन, वह भी मात्र 2 घंटे में. नो फाइल चार्ज. नो गारंटर. खर्चा लोन पास होने के बाद.’

इसी तरह का एक इश्तिहार और था, जिस में मार्कशीट पर किसी भी कारोबार के लिए लोन देने की बात लिखी थी.

विश्वेंद्र सिंह को इसी तरह के तमाम इश्तिहार उस अखबार में दिखाई पड़े, जिन में 10 लाख से ले कर करोड़ रुपए तक लोन देने की बात की गई थी. उस ने उस अखबार में दी गई मेरठ की एक फाइनैंस कंपनी, जिस का नाम सिक्योर इंडिया सर्विसेज लिमिटेड और पता अबू प्लाजा लेन का था, को फोन किया.

वहां से फोन रिसीव करने वाले शख्स ने उसे बहुत आसान शर्तों पर लोन देने की बात कही. इस के लिए विश्वेंद्र सिंह को मेरठ बुलाया गया.

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विश्वेंद्र सिंह जब उस लोन कंपनी के दफ्तर में पहुंचा, तो उस से पहले से बताए गए डौक्यूमैंट की फोटोकौपी व उस का फोटो जमा करवा कर 5 लाख रुपए के लोन की फाइल तैयार की गई और उस लोन की कुल रकम की सिक्योरिटी मनी के रूप में उस से 30 हजार रुपए मांगे गए.

इस पर विश्वेंद्र सिंह चौंका और बोला कि इश्तिहार में तो किसी भी तरह की गारंटी या प्रोसैसिंग फीस लेने की बात नहीं की गई थी, तो फिर यह कैसी गारंटी मनी?

इस पर उस लोन कंपनी की तरफ से कहा गया कि वे उसे 5 लाख रुपए बिना किसी गारंटर के दे रहे हैं और वह 30 हजार रुपए सिक्योरिटी मनी के रूप में नहीं दे सकता.

इस के बाद विश्वेंद्र सिंह 30 हजार रुपए देने को तैयार हो गया और उस ने उस कंपनी के खाते में 10 हजार रुपए जमा करा दिए और बाकी के पैसे उस ने नकद जमा किए. इस के एवज में उसे बिना कंपनी का नामपता लिखी एक रसीद थमा दी गई.

इस के बाद सादा कागज पर एक एग्रीमैंट करवाया गया, जिस में यह लिखा गया था कि स्थानीय तहसीलदार से जांच कराने के बाद ही उसे लोन देने की बात की गई थी.

उस एग्रीमैंट में यह भी लिखा था कि तहसीलदार की रिपोर्ट अगर उस के पक्ष में होगी, तभी यह लोन दिया जाएगा.

इस एग्रीमैंट के बाद विश्वेंद्र सिंह घर चला आया और वह लोन की रकम मिलने का इंतजार करता रहा, लेकिन जब 3 महीने बीत जाने पर भी कंपनी के लोगों ने उस से संपर्क नहीं किया, तो वह सीधे कंपनी के दफ्तर गया और लोन न मिलने की बात कही.

इस पर कंपनी की तरफ से उसे यह कहा गया कि तहसीलदार ने उस के पक्ष में रिपोर्ट नहीं लगाई है, इसलिए अब उसे लोन नहीं दिया जा सकता है.

जब विश्वेंद्र सिंह ने तहसीलदार की रिपोर्ट देखने के लिए मांगी, तो उसे यह कर मना कर दिया गया कि यह गोपनीय रिपोर्ट होती है. हम इसे नहीं दिखा सकते.

इस के बाद विश्वेंद्र सिंह ने सिक्योरिटी मनी के अपने 30 हजार रुपए वापस मांगे, तो उसे भी कंपनी ने यह कर मना कर दिया वह रकम वापस नहीं की जा सकती है.

इस तरह की फर्जी लोन कंपनियों से ठगे जाने का मामला सिर्फ बेरोजगार विश्वेंद्र सिंह का नहीं है, बल्कि हर रोज आसान तरीके से ऐसे लोन लेने के चक्कर में हजारों बेरोजगार ठगी के शिकार होते हैं.

ऐसे पहचानें फर्जी कंपनी

आसान शर्तों पर लोन देने का झांसा देने वाली इश्तिहार कंपनियां ज्यादातर मामलों में फर्जी ही होती हैं, जो भोलेभाले बेरोजगार लोगों को लोन देने के नाम पर शिकार बनाती हैं.

ऐसे में अगर आप को आसान शर्तों पर लोन देने का दावा करता कोई इश्तिहार दिख जाए, तो यह समझ लेना चाहिए कि यह महज ठगी करने वाली कंपनी ही होगी, क्योंकि कोई भी कंपनी बिना अपने रुपए की वापसी की गारंटी जांच की पड़ताल किए किसी को भी लोन नहीं देती है.

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फर्जी लोन कंपनियों की पहचान के मसले पर पंजाब नैशनल बैंक में मार्केटिंग अफसर अभिषेक पांडेय का कहना है कि कोई भी फाइनैंस कंपनी शुरू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी व सिडबी जैसे वित्तीय संस्थानों से लाइसैंस लेना पड़ता है.

ये संस्थाएं लाइसैंस देने के पहले खुलने वाली फाइनैंस कंपनी की कई तरीके से जांचपड़ताल करती हैं.

मानकों पर खरी पाए जाने पर उस कंपनी के लोन कैटीगरी को तय किया जाता है कि वह किस तरह का लोन देना चाहती है. इस में  घर का लोन, गाड़ी के लिए लोन, कारोबार वगैरह की अलगअलग कैटीगरी तय की जाती है.

अभिषेक पांडेय के मुताबिक, कोई भी लोन देने वाली कंपनी एक फीसदी  सालाना के न्यूनतम ब्याज पर कर्ज दे कर नहीं चलाई जा सकती है, वह भी कर्ज वापसी के लिए बिना किसी छानबीन व गारंटी के तो यह एकदम मुश्किल है. अगर कोई कंपनी इस तरह के लोन देने का दावा करती है, तो वह धोखाधड़ी व ठगी के मकसद से ही ऐसा कर रही होती है.

इन से ही लें लोन

अगर आप बेरोजगार हैं और किसी तरह का लोन लेना चाहते हैं, तो इस के लिए बैंक व फाइनैंस कंपनी से ही आप का लोन लेना ज्यादा अच्छा होता है.

एक वित्तीय सलाहकार मनमोहन श्रीवास्तव के मुताबिक, लोन देने के पहले बैंकों द्वारा लोन लेने वाले के पते की छानबीन कर पूरी गारंटी के साथ ही लोन दिया जाता है.

बैंक द्वारा लोन के लिए सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक ही फीस ली जाती है. अगर आप किसी कारोबार के लिए लोन ले रहे हैं, तो बैंक उस के लिए उस कारोबार का प्रोजैक्ट मांगता है. उस प्रोजैक्ट रिपोर्ट के संतुष्ट होने के बाद ही लोन देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है.

मनमोहन श्रीवास्तव का आगे कहना है कि बैंक द्वारा जो ब्याज की रकम ली जाती है, वह इश्तिहारी लोन कंपनियों के बजाय ज्यादा तो होती है, लेकिन यह भारतीय रिजर्व बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक ही तय होती है, जिस में धोखाधड़ी का कोई डर नहीं होता है.

उन का कहना है कि अगर अखबारों में आसान शर्तों पर लोन देने के इश्तिहार दिखाई दें, तो उस पर ध्यान न दे कर बैंकों से लोन लेने की कोशिश करें. इस लोन को हासिल करने में भले ही समय लगे, लेकिन इस में आप की जेब का पैसा डूबने का डर नहीं रहता है.