सरस सलिल विशेष

अपने समय के महान संगीतकार स्व. चित्रगुप्त को दो जुलाई, सोमवार के दिन उनके 101वें जन्मदिवस पर श्रृद्धांजली देते हुए उनके बेटे व संगीतकार जोड़ी आनंद मिलिंद यानी कि आनंद चित्रगुप्त व मिलिंद चित्रगुप्त ने एक भव्य समारोह का आयोजन किया. इसी अवसर पर मुंबई के उपनगर खार में 14वें रास्ते और खार डांडा रोड के कोने (त्रिभुवनदास भीमजी -हजयवेरी शोरूम) का नामकरण ‘‘स्व.चित्रगुप्त चौक’’ के रूप में किया गया.

‘‘स्व.चित्रगुप्त चौक’’ के नामकरण के अवसर पर आनंद चित्रगुप्त, मिलिंद चित्रगुप्त, उदित नारायण, आनंद जी शाह, अलका याज्ञनिक, अभिजीत भट्ट, राजू सिंह, ललित पंडित, समीर, शिवरानी सौमैया, जावेद अख्तर, राज जुत्शी सहित कई गायक, गीतकार, संगीतकार व भाजपा नेता आशीष शेलार खास तौर पर मौजूद थे.

स्व.चित्रगुप्त अपने समय के मैलोडियस संगीत परोसने वाले अति मशहूर संगीतकार थे. 1946 से 1988 के चालीस साल के संगीत करियर में 144 फिल्मों को संगीत से संवारा था.

इस समारोह की शुरुआत मशहूर गीतकार जावेद अख्तर और भाजपा नेता आशीष शेलार ने दीप प्रज्वलित कर किया. इसी अवसर पर स्व.चित्रगुप्त के दोनों बेटे आनंद व मिलिंद ने कहा- ‘‘हमारे पिता ने संगीत के क्षेत्र में जो रचनात्मक काम किया था, उसका यह सम्मान है. हमारे लिए यह गौरव की बात है. हमारे पिता ने संगीत के स्वर्णिम काल में बेहतरीन मैलोडियस संगीत परोसकर अपने करोड़ों प्रशंसक बनाए थे. संगीत जगत के इतिहास में पहली बार हमारे पिता को श्रृद्धांजली के तौर पर हमारे गीत ‘पापा कहते हैं’ का नोटेशन दिया गया. हमें गर्व है कि उन्होंने हम जैसे अपने बच्चों को उन्हें कुछ वापस देने योग्य बनाया. मेरे पिता ने अपने जीवन में खार के 14वें रोड पर रहते हुए देश को कई रत्न प्रदान किए.

उनके नाम पर चौक बनाने के उनके प्रशंसकों और परिवार के सदस्यों के लिए गर्व का क्षण है. हम उन सभी के शुक्रगुजार हैं जिन्होंने हमारे इस छोटे से प्रयास में अपना योगदान दिया. लोग आज भी मेरे पिता के बनाए हुए गीत ‘चल उड़ जा रे पंक्षी’ और ‘चली चली रे पतंग’ को गुनगुनाते रहते हैं.’’

इस अवसर पर जावेद अख्तर ने कहा- ‘‘मुझे इस बात की खुशी है कि संगीतकार जोड़ी आनंद मिलिंद ने अपने पिता की याद लोगों के दिलों में हमेशा बनाए रखने के लिए चैक के नामकरण के रूप में यह कदम उठाया है.’’

अलका याज्ञनिक ने चित्रगुप्त जी को याद करते हुए कहा- ‘‘मेरे लिए चित्रगुप्त जी पिता के समान थे. मुझे उनसे हमेशा ढेर सारा प्यार व अपनापन मिला. हम हमेशा कहते हैं- ‘पापा कहते हैं कि बड़ा नाम करेगा.’ पर चित्रगुप्त जी ने मुझे कहा था- ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगी.’ यह उन दिनों की बात है, जब हर दिन लाइव संगीत रिकार्ड किया जाता था. हम एक साथ परिवार की तरह रिकार्डिंग स्टूडियो में पूरा पूरा दिन बिताते थे. जब मैं भोजपुरी गीत रिकार्ड करती थी, तब उनका हाथ मेरे सिर पर रहता था.जब मैं फिल्म उद्योग में नई नई थी, तब चित्रगुप्त जी निर्माताओं को समझाते थे कि उन्हें मुझसे कोई गीत क्यों गंवाना चाहिए. वह बहुत प्यारे इंसान थे. मैं हमेशा उन्हें उतना ही याद करती हूं, जितना मैं अपने पिता को याद करती हूं.’’

मशहूर गायक सुदेश भोसले ने कहा- ‘‘जिन्होंने स्व.चित्रगुप्त के नाम पर इस चौक का नामकरण करने की बात सोची, उन सभी को धन्यवाद देता हूं. आज हम सभी आपके नाम पर चौक के नामकरण समारोह में मौजूद हैं. हर कोई आपको तब तक याद करेगा, जब तक आपका काम जिंदा रहेगा, जो कि अमिट है.’’

संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के प्यारेलाल रामप्रसाद शर्मा ने कहा- ‘‘हमें उस वक्त अपार खुशी और गर्व का अहसास होता है, जब हमारे बच्चे कुछ अच्छा काम करते हैं.’’

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