सरस सलिल विशेष

भोजपुरी सिनेमा ने 55 साल से भी ज्यादा का सफर पूरा कर लिया है लेकिन भद्दे गाने, फूहड़ डायलौग, गंदी हरकतें और इशारेबाजी ही भोजपुरी फिल्मों की पहचान बन कर रह गए हैं. हिंदी फिल्मों की अंधी नकल के बाद भी भोजपुरी सिनेमा का काफी बड़ा बाजार है और इस से जुड़े ज्यादातर लोग मुनाफा कमा रहे हैं.

मजदूर, ड्राइवर, खलासी जैसा कम कमाई वाला तबका भोजपुरी फिल्मों का सब से बड़ा दर्शक है. इन फिल्मों के टिकट की कीमत काफी कम होती है. सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में भोजपुरी फिल्मों की टिकट 40 से 60 रुपए में आसानी से मिल जाती है. यही वजह है कि दर्शक कम पैसे में भोजपुरी फिल्मों में सैक्स के तड़के का मजा उठा रहे हैं.

गौरतलब है कि भारत समेत मौरीशस, फिजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद जैसे देशों में तकरीबन 25 करोड़ लोग भोजपुरी बोलनेसमझने वाले हैं. हमारे देश में बिहार और उत्तर प्रदेश में भोजपुरी बोलने वाले सब से ज्यादा लोग हैं. महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात वगैरह राज्य भी भोजपुरी सिनेमा के बड़े बाजार हैं क्योंकि बिहार व उत्तर प्रदेश के हजारोंलाखों लोग वहां के कलकारखानों में काम करते हैं. दर्जनों भोजपुरी फिल्मों में काम कर चुके कलाकार धामा वर्मा कहते हैं कि परदेश में अपनी बोली की फिल्म देख कर लोग अपने गांव की मिट्टी की खुशबू जैसा मजा लेते हैं. इसी वजह से बिहार और उत्तर प्रदेश समेत दूसरे कई राज्यों में भी भोजपुरी फिल्में काफी चलती हैं.

कलाकार धामा वर्मा ने जिस मिट्टी की खुशबू की बात की वह भले ही आज की भोजपुरी फिल्मों से पूरी तरह से गायब हो चुकी है, लेकिन भोजपुरी का बाजार बढ़ता ही जा रहा है. भोजपुरी के सुपरस्टार पवन सिंह की फिल्म ‘गदर’ ने करोड़ों रुपए की कमाई की है. एक औसत दर्जे की भोजपुरी फिल्म बनाने में 1-2 करोड़ रुपए लगते हैं और वह 10 से 20 करोड़ रुपए तक की कमाई कर लेती है. इस से चोखा धंधा और क्या हो सकता है.

भोजपुरी फिल्मों के नाम भी दर्शकों को लुभाने के खयाल से ही रखे जाते हैं. ‘पैप्सी पी के लागेलू सैक्सी’, ‘अजब देवरा के गजब भौजाई’, ‘लैला माल छैला धमाल’, ‘दारोगा बाबू आई लव यू’ जैसे नाम दर्शकों को गुदगुदाते हैं और उन्हें सिनेमाघरों की ओर खींच लाते हैं. भोजपुरी फिल्मों के सैक्सी नामों के साथ उन के गाने और उन गानों का फिल्मांकन भी बड़े ही सैक्सी अंदाज में किया जाता है. ‘हमर जवानी खोजेला डबल मरद…’, ‘नथुनी पागल करेली हो रानी…’, ‘लगावे लू जब लिपिस्टिक…’, ‘लौलीपौप लागे लू…’ जैसी गानों में हीरोहीरोइन के सैक्सी लटकेझटके दर्शकों को सिनेमाघरों में सिसकारी भरने के लिए मजबूर कर देते हैं.

भोजपुरी फिल्में अपने शुरुआती दिनों में गंगा, मैया, भौजी, सैंया जैसे नामों के आसपास घूमती रही थीं. 5 लाख रुपए में बनी ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ ने 75 लाख रुपए की कमाई की थी. विश्वनाथ शाहाबादी की बनाई इस फिल्म को मिली भारी कामयाबी के बाद तो भोजपुरी सिनेमा का रास्ता ही खुल गया था और एक के बाद एक धड़ाधड़ भोजपुरी फिल्में बनने लगी थीं. ‘सैंया

से भइल मिलनवा’, ‘तुलसी सोहे तोहार अंगना’, ‘सोलहो सिंगार करे दुलहनिया’, ‘बिदेसिया’, ‘पान खाए सैंया हमार’, ‘लागी नाही छूटे राम’ जैसी कई फिल्में आईं और भोजपुरी सिनेमा को नई ताकत मिली.

साल 1977 में हिंदी सिनेमा के खलनायक रहे सुजीत कुमार और छोटेमोटे रोल करने वाली प्रेमा नारायण भोजपुरी फिल्म ‘दंगल’ में हीरोहीरोइन बन कर आए थे. ‘दंगल’ भोजपुरी की पहली रंगीन फिल्म थी जिस ने आखिरी सांस ले रहे भोजपुरी सिनेमा में नई जान फूंक दी थी. इस फिल्म के सुपरहिट गीत ‘गोरकी पतरकी रे मारे गुलेलवा जियरा हिलहिल जाए…’ को मोहम्मद रफी और आशा भोंसले ने अपनी आवाज दी थी.

उस के बाद राकेश पांडे और पद्मा खन्ना की जोड़ी फिल्म ‘बलम परदेसिया’ ले कर आई थी, जिस ने कामयाबी के झंडे गाड़े थे. साल 2003 में रिलीज हुई फिल्म ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ ने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को काफी दमदार बना दिया. बिहार के भोजपुरी गायक मनोज तिवारी और रानी चटर्जी की इस फिल्म को मिली कामयाबी ने भोजपुरी सिनेमा के परदे को फिर से चमकदार बना डाला. उस के बाद तो एक बार फिर भोजपुरी फिल्मों की झड़ी लग गई.

फिल्म वितरक विनोद पांडे कहते हैं कि भोजपुरी सिनेमा की बढ़ती लोकप्रियता का ही नतीजा था कि अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, जैकी श्रौफ, शत्रुघ्न सिन्हा, जितेंद्र, रति अग्निहोत्री, नगमा, भाग्यश्री, भूमिका चावला जैसे बौलीवुड के कलाकारों ने इस में काम किया. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री ने कुणाल सिंह, राकेश पांडे के बाद मनोज तिवारी, रविकिशन, दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’, सुदीप पांडे को सुपरस्टार बना दिया.

पिछले 4-5 सालों में भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार की नई खेप पैदा हो चुकी है. भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री ने पवन सिंह, खेसारी लाल, राकेश मिश्रा, धीरज मिश्रा, पाखी हेगड़े, रानी चटर्जी, मोनालिसा, श्वेता तिवारी, दिव्या देसाई, रिंकू घोष, जैसे तमाम कलाकारों को पैसा और पहचान दिला दी है. भोजपुरी सिनेमा की बहती गंगा में हाथ धोने के लिए कई बाहरी लोग भोजपुरी सिनेमा बनाने लगे हैं. साउथ फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग भोजपुरी फिल्म बना रहे हैं.

हिंदी फिल्मों और हौलीवुड की नामचीन हीरोइन प्रियंका चोपड़ा द्वारा बनाई गई फिल्म ‘बम बम बोल रहा है काशी’ ने खासी कमाई थी.