सरस सलिल विशेष

भोजपुरी सिनेमा में रोजाना नएनए कलाकार ऐक्टिंग में अपने हाथ आजमा रहे हैं. इसी कड़ी में एक और नई कलाकार शगुन दूबे का नाम भी जुड़ गया है. वे जल्दी ही भोजपुरी सिनेमा के रुपहले परदे पर अपनी अदाओं और नजाकत का जलवा बिखरने वाली हैं. उन की पहली भोजपुरी फिल्म ‘दीवाने’ की शूटिंग पूरी हो चुकी है, जो जल्दी ही सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी.

पेश हैं, शगुन दूबे से की गई बातचीत के खास अंश:

आप कहां से हैं और आप के फिल्मी सफर की शुरुआत कैसे हुई?

मैं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से हूं. मेरा पालनपोषण और मेरी पढ़ाईलिखाई यहीं से ही हुई है. बचपन से ही मैं स्कूल और फिर कालेज में हर सांस्कृतिक कार्यक्रम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती थी.

पापा के जिगरी दोस्त और फिल्मकार इम्तियाज खान ने कई फिल्में बनाई हैं. जब उन की भोजपुरी फिल्म ‘पंचायत’ बन रही थी, तब उन्होंने मुझे हीरोइन के रोल के लिए औफर दिया था, मगर उस समय मेरी पढ़ाई चल रही थी. मम्मी और पापा ने कहा था कि पहले पढ़ाई पूरी हो जाए, फिर देखा जाएगा.

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जब मेरी पढ़ाई पूरी हो गई, तो इम्तियाजजी ने दोबारा औफर दिया. मैं ने तुरंत हां कह दिया और बन गई फिल्म ‘दीवाने’ की हीरोइन.

इस फिल्म के पहले सीन की शूटिंग के समय आप के मन में क्या चल रहा था?

इस फिल्म की शूटिंग को ले कर मैं बहुत जोश में थी, पर कैमरे के सामने ऐक्शन बोलते ही पहली बार थोड़ा नर्वस थी. लेकिन जब पहला शौट ओके हो गया, तो सभी ने तालियां बजा कर मेरा हौसला बढ़ाया.

इस फिल्म में अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?

इस फिल्म में मेरा किरदार एक ऐसी लड़की का है, जो अपने प्रेमी से बेइंतिहा मुहब्बत करती है, मगर समय आने पर खुद ही अपने प्यार का बलिदान दे कर अपने प्रेमी की शादी किसी और लड़की से करा देती है.

यह किरदार मेरे दिल के बहुत करीब है. मुझे यह रोल निभा कर बहुत ही मजा आया. उम्मीद है कि हमारी रोमांटिक जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आएगी.

आप के आदर्श कौन हैं?

मैं मम्मीपापा को अपना आदर्श मानती हूं. मेरे भाई अभिषेक दूबे ने भी काफी सहयोग किया है. फिल्मकार इम्तियाज खान तो मेरे लिए गौडफादर जैसे हैं.

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ग्लैमर वर्ल्ड में हीरोइनों में हौट दिखने की एक होड़ सी लगी रहती है. इस बारे में आप क्या कहेंगी?

जहां तक हौट दिखने या अंग प्रदर्शन की बात है, तो फिल्म जगत में यह आम है. मैं फिल्मों में कहानी के मुताबिक जो सीन की डिमांड होगी, वह करूंगी, मगर मैं किसी इमेज में बंधना नहीं चाहती हूं. मैं हर तरह के किरदार निभाना चाहती हूं.

मैं एक बात और कहना चाहती हूं कि भोजपुरी फिल्मों को ले कर लोगों के मन में फूहड़ता का भरम कुछ ज्यादा ही घर कर गया है, जबकि बौलीवुड व हौलीवुड की फिल्मों में जिस तरह से फिल्म हीरोइनों को पेश किया जाता है, उस तरह भोजपुरी फिल्मों की हीरोइनों को नहीं पेश किया जाता है. पहले के बजाय अब भोजपुरी फिल्में भी करोड़ों रुपए के बजट में बनने लगी हैं.

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