सरस सलिल विशेष

फिल्म ‘‘बाबू मोशाय बंदूक बाज’’ से चर्चा में आईं अदाकारा बिदिता बाग ने 2011 में अभिनय जगत में कदम रखा था. 2011 से अब तक उन्होंने करीबन एक दर्जन से अधिक फिल्में की होंगी, जो कि सिनेमाघरों तक नही पहुंच पाई, जबकि कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में यह फिल्में काफी चर्चा बटोर चुकी हैं. अब बिदिता बाग का करियर काफी तेज गति से आगे बढ़ रहा है. इन दिनों वह निर्माता नीरज भारद्वाज व श्वेता ठाकोर तथा निर्देशक मनोज सिंह की फिल्म ‘‘माया’’ सहित कई फिल्में कर रही हैं. बिदिता बाग ने बिना प्रोस्थेटिक मेकअप का प्रयोग किए फिल्म ‘‘दयाबाई’’ में 16 से 77 वर्ष तक का किरदार निभाया है.

बिदिता बाग के पिता सराकरी नौकरी करने के साथ ही कला से भी जुड़े रहे हैं. वह अमैच्योर थिएटर करने के साथ ही अपने आस पास के बच्चों को थिएटर की ट्रेनिंग भी देते रहे हैं. इसके बावजूद उन्हें पसंद नहीं था कि उनकी बेटी बिदिता बाग फिल्मों से जुड़े. इसलिए जब बिदिता बाग ने बौलीवुड से जुड़ने का ऐलान किया, तो उनके पिता ने काफी विरोध किया था, यहां तक बिदिता के पिता ने बिदिता के निर्णय से नाराज होकर घर छोड़ दिया था.

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अपने पिता की नाराजगी की चर्चा करते हुए खुद बिदिता बाग कहती हैं- ‘‘जब मैने अभिनय को करियर बनाने का निर्णय लिया तो नाराज होकर मेरे पिताजी ने घर छोड़ दिया था. पूरे 45 दिन वह घर नहीं आए. शायद वह कभी घर वापस ना आते लेकिन मेरे फूफाजी को कैंसर हो गया और उनका इलाज हमारे घर से ही हो रहा था. उनकी हालत बिगड़ रही थी. इस वजह से काफी समझाने पर पिताजी घर वापस आए थे.

मेरे पिताजी मुझसे बहुत ज्यादा भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं और मेरे अभिनेत्री बनने में सबसे ज्यादा समस्या उन्होंने ही खड़ी की. वही मेरे सबसे बडे़ आलोचक हैं. वह अभी भी सोचते हैं कि मैं अभिनय छोड़ कर नौकरी कर लूं. वह चाहते हैं कि भविष्य सुरक्षित हो जाए. भारतीय सिनेमा में सबसे बड़ी कमी यह है कि हम कलाकारों को पैसे समय पर नही मिलते और पैसे डूब जाते हैं. कलाकार के तौर पर हमें पैसे बार बार मांगने पड़ते हैं. तो मेरे पापा कहते हैं कि ऐसा काम करने से क्या फायदा काम करो पैसे ना मिले. ’’

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