सरस सलिल विशेष

अपने दमदार अभिनय से लगभग चार दशक तक बौलीवुड में अपना एकाधिकार जमाए रखने वाली और महिला सुपरस्टार से सम्मानित श्रीदेवी का 54 वर्ष की उम्र में दुबई में हृदय गति रूक जाने से निधन हो गया. श्रीदेवी अपने पारिवारिक सदस्य मोहित मारवाह की शादी के समारोह में शामिल होने के लिए अपने पति बोनी कपूर व बेटी खुशी के साथ दुबई गई थीं और आज ही वापस लौटने वाली थीं. लेकिन अचानक उनकी तबियत खराब हुई और अस्पताल ले जाने पर पता चला कि हृदय गति रूक जाने से उनका निधन हो गया. श्रीदेवी का पार्थिव शरीर मुंबई लाया जा रहा है. उनका अंतिम संस्कार मुंबई में ही संपन्न होगा.

13 साल की उम्र में तमिल फिल्म में वयस्क किरदार निभाने के बाद श्रीदेवी ने हिंदी, तमिल, तेलगू की 300 फिल्में की. उनकी करियर की 300 वीं फिल्म 7 जुलाई 2017 को प्रदर्शित हुई थी. ‘‘सोलहवां सावन’’, ‘हिम्मतवाला’’, ‘‘सदमा’’, ‘‘तोहफा’’, ‘ ‘नगीना’’, ‘‘चालबाज’’, ‘‘लम्हे’’, ‘खुदा गवाह’ उनकी कुछ अति चर्चित फिल्में रही हैं. श्रीदेवी एकमात्र ऐसी अदाकारा रही हैं, जिन्हें बौलीवुड में सुपरस्टार का दर्जा मिला था. श्रीदेवी से पहले और श्रीदेवी के बाद आई किसी भी अभिनेत्री को यह तमगा नसीब नहीं हुआ. इतना ही नही यह उनके दमदार अभिनय का ही कमाल था कि उन्हे 2013 में “पद्मश्री’’ से नवाजा गया था.

सिवाकाशी, तमिलनाड़ु में 13 अगस्त 1963 में जन्मी श्रीदेवी के अभिनय से जुड़ने की बड़ी अजीबोगरीब कहानी रही. उन्होंने सबसे पहले चार साल की उम्र में बाल कलाकार के रूप में एक छोटी सी भूमिका निभाई थी, पर तब उन्हें अहसास नहीं था कि वह अभिनय को करियर बनाएंगी. लेकिन जब वह तेरह साल की उम्र में मदुराई से चेन्नई आईं, तो उनकी किस्मत बदल गई.

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खुद श्रीदेवी ने मुझसे अपने अभिनेत्री बनने की बात को इत्तफाक की संज्ञा देते हुए बताया था- ‘‘मेरा फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ना भी एक इत्तफाक/एक्सीडेंट था. क्योंकि मेरे माता पिता फिल्मों से नहीं हैं. हमारा परिवार बहुत दकियानूसी व रूढ़िवादी परिवार रहा है. मेरी मां गृहिणी थी, मेरे पिता वकील, ऐसे में फिल्म तो बहुत दूर की बात थी. लेकिन मेरी डेस्टिनी मुझे फिल्मों में ले आई. अन्यथा मैं चेन्नई या मदुराई में पड़ी होती. वास्तव में पढ़ाई करने के लिए मैं मदुराई से चेन्नई आई थी. यहां मेरे पिताजी वकालत कर रहे थें. मेरे अंकल एमएलए थें. एक दिन मेरे अंकल को एक समारोह में जाना था, पर वह जा नहीं पा रहे थे. तो उन्होंने मेरे पिता से कहा कि वह चले जाएं. मैं अपने पिता के बहुत करीब थी. तो मैंने उनसे कहा कि मैं भी चलूंगी. उन्होंने कहा चलो. उस समारोह में एक अति लोकप्रिय व नामचीन गीतकार मिल गएं. उन्होंने मेरे पिता से पूछा कि क्या आप अपनी बेटी को एक फिल्म में अभिनय करवाना पसंद करेंगे? मेरे पिता ने मेरी तरफ देखा और फिर गीतकार से कहा कि मैं घर जाकर इस बारे में सोचूंगा, अभी मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता. दूसरे दिन सुबह मेरे पिता ने मम्मी से रातवाली बात बताई. उनकी बात पूरी होते होते हमारे घर के दरवाजे पर एक गाड़ी आकर रूकी, जो कि मुझे फिल्म के सेट पर ले जाने के लिए आई थी. मेरी मम्मी उत्साहित व खुश हो गईं. उन्होंने कहा जा बेटी जा, उस वक्त मेरे पिताजी भी कुछ बोल नहीं पाए और मैं सेट पर चली गई. जबकि मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं पढ़ लिखकर उन्हीं की तरह मशहूर वकील बनूं. उस दिन मैं अभिेनेत्री बन गई थी, और मेरी पहली तमिल फिल्म 1976 में “मूंद्रू मुदीचू’’ आयी थी. उस वक्त मैं सिर्फ तेरह वर्ष की थी और युवा किरदार निभाया था.’’

यह भी रहा अजीब इत्तफाक

मशहूर अभिनेता बोनी कपूर से श्रीदेवी ने 1996 में विवाह रचाया था. उस वक्त बोनी कपूर शादीशुदा थें. उनकी पहली पत्नी मोना शोरी कपूर जिंदा थीं और उनके बेटे अर्जुन कपूर भी थें, जो कि आज एक सफल अभिनेता माने जाते हैं. पर बोनी कपूर और श्रीदेवी के बीच ऐसा प्यार पनपा था कि उन्होंने कई तरह के विराधों के बावजूद 1996 में शादी कर ली थी.

बोनी कपूर की पहली पत्नी और अभिनेता अर्जुन कपूर की मां मोना शोरी कपूर का 25 मार्च 2012 को निधन हुआ था. उस वक्त तक अभिनेता अर्जुन कपूर अपने करियर की पहली फिल्म ‘‘इश्कजादे’’ की शूटिंग खत्म कर चुके थे और उन्हें अपनी फिल्म के प्रदर्शित होने का इंतजार था. मगर मोना शोरी कपूर अपने बेटे अर्जुन कपूर की पहली फिल्म के पर्दे पर आने से पहले ही इस दुनिया से विदा हो गई थीं. फिल्म ‘इश्कजादे’ लगभग डेढ़़ माह बाद 11 मई 2012 को सिनेमाघरों में पहुंची थी.

और अब बोनी कपूर की दूसरी पत्नी श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी 2018 को हुआ है, जबकि उनकी बेटी जान्हवी कपूर के करियर की पहली फिल्म ‘‘धड़क’’ की शूटिंग अभी पूरी हुई है. यह फिल्म 20 जुलाई 2018 को प्रदर्शित होनी है. यानी कि श्रीदेवी भी अपनी बेटी के करियर की पहली फिल्म के सिनेमाघर में आने से पहले ही इस संसार से चली गईं.

श्रीदेवी ने अनिच्छा से जान्हवी को अभिनेत्री बनने की इजाजत दी थी

श्रीदेवी की बड़ी बेटी जान्हवी कपूर की पहली फिल्म ‘‘धड़क’’ की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी है और वह अभिनेत्री बन चुकी हैं. मगर हर किसी को पता है कि श्रीदेवी कभी नहीं चाहती थीं कि उनकी बेटी जान्हवी कपूर फिल्मों से जुड़े या अभिनेत्री बने. खुद श्रीदेवी ने हमसे हुई बातचीत में कहा था – ‘‘यह सच है कि जब मेरी बेटी ने कहा कि उसे फिल्मों में हीरोइन बनना है, तो मैं थोड़ी सी घबराई हुई थी. उसे इजाजत देने को लेकर मेरे अंदर एक हिचक थी. जबकि मैं समझती हूं कि आज मैं जो कुछ हूं, वह फिल्म इंडस्ट्री की वजह से हूं. फिल्म इंडस्ट्री की वजह से ही मैंने नाम कमाया है. लेकिन समय का अंतराल बहुत कुछ मायने रखता है. जब मैं हीरोईन बनी थी, उस वक्त हम घोड़े की तरह काम कर रहे थे. आपको पता होगा कि घोड़ो की दोनों आंखों के बगल में पट्टियां बांधी जाती हैं, जिससे घोड़ा एकदम सीधा देखते हुए सरपट दौड़ता रहे. तो हम भी एक ढर्रे पर काम कर रहे थे. आज की तरह शूटिंग, डबिंग, पार्टियां, मस्ती करना, यह सब नहीं होता था. बल्कि उस वक्त हमारे उपर बंदिश होती थी कि हमें जो काम करना है, उसे पूरी तरह ईमानदारी से करना है.’’

श्रीदेवी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा था- ‘‘दूसरी बात मेरी मां मुझे बहुत प्रोटेक्ट करती थी. उसी तरह मैं भी अपनी बेटियों को बहुत प्रोटेक्ट करती हूं. आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन हकीकत यह है कि मैंने 300 फिल्मों में अभिनय कर लिया. मगर मैंने अपनी बेटियों को बहुत कम फिल्में दिखायी हैं. छह साल की उम्र तक तो उन्हें यही नही पता चला कि मैं अभिनेत्री हूं. 6 साल की उम्र के बाद जब वह मेरे साथ एयरपोर्ट पर पहुंची और लोगों ने मुझसे औटोग्राफ मांगा, तब मुझे उन्हें बताना पड़ा कि मैं फिल्मों में अभिनय करती हूं. लेकिन मैंने उनसे कह दिया था कि मैं उन्हें अपनी कोई फिल्म नही दिखाउंगी. ’’