सरस सलिल विशेष

भोजपुरी फिल्मों में सब से अच्छा आइटम डांस करने वाली सीमा सिंह को लगातार 5 बार बैस्ट डांसर का अवार्ड दिया गया है. आज वे अपने देश से ले कर विदेशों तक में डांस शो कर रही हैं. 8 साल के अपने कैरियर में सीमा सिंह भोजपुरी, हिंदी, मराठी, गुजराती, तमिल और बंगाली फिल्मों में आइटम डांस कर चुकी हैं. पेश हैं, उन से की गई बातचीत के खास अंश:

विदेशों में पहले हिंदी फिल्मों के कलाकार ही शो करने जाते थे, पर अब भोजपुरी कलाकार भी वहां जा रहे हैं. इस की क्या वजह है?

विदेशों में बड़ी तादाद में भोजपुरी बोली के लोग बसे हुए हैं. वे लोग यूट्यूब पर भोजपुरी गानों को सर्च कर के सुनते रहते हैं. ऐसे में अपनी बोली से उन का लगाव बना रहता है.

शुरुआत में भोजपुरी के कलाकार विदेशों में कम जाते थे, पर अब विदेशों में इवैंट प्लान करने वाली कंपनियां भोजपुरी कलाकारों को ले कर शो प्लान करने लगी हैं. पहले जहां अरब देशों में ही ऐसे शो होते थे, पर अब दूसरे देशों में भी ऐसे शो होने लगे हैं.

क्या ऐसे डांस शो में आइटम डांसरों की ही डिमांड है?

नहीं, ऐसा बिलकुल भी नहीं है. भोजपुरी फिल्मों की हीरोहीरोइन और दूसरे कलाकारों को भी लोग बेहद पसंद करते हैं. डांस शो इन सब के साथ होता है.

अपने देश में डांस शो के दौरान कई बार हंगामा और मारपीट तक हो जाती है. विदेशों में क्या हाल है?

विदेशों में ऐसी परेशानियां नहीं होती हैं. इस की सब से बड़ी वजह यह भी है कि वहां की कानून व्यवस्था बहुत ही सख्त है.

आप ठाकुर परिवार से हैं, जहां लड़कियों का स्टेज पर डांस करना अच्छा नहीं माना जाता है. ऐसे में आप ने अपने घर वालों को कैसे राजी किया?

मैं इलाहाबाद के मऊ आइमा की रहने वाली हूं. मेरा परिवार रूढि़वादी ठाकुर बिरादरी से आता है. हम भले ही मुंबई में पलेबढ़े हैं, पर हमारी सोच गांव वाली ही थी.

मेरी बहन फिल्मों में ऐक्टिंग करती थी. जब मैं ने डांस शो करने का फैसला किया, तो मेरे पिताजी ने विरोध किया. लेकिन जब मैं ने डांस शो जीता, तब मेरे पिताजी को लगा कि मेरा डांस करने का फैसला सही था. तब से वे मेरा सहयोग करने लगे हैं.

आइटम डांस करने पर जब मुझे लगातार 3 बार बैस्ट डांसर का खिताब दिया गया, तो गांव वालों की भी सोच बदली. अब वे मुझे भी हीरोइन की तरह इज्जत की नजर से देखते हैं.

आप किसी हीरोइन की ही तरह खूबसूरत दिखती हैं. औफर मिलने के बाद भी आप बतौर हीरोइन काम क्यों नहीं करती हैं?

मुझे केवल डांस का शौक है. ऐक्टिंग का मुझे कोई शौक नहीं है. मुझे लोग ‘आइटम क्वीन’ के नाम से पहचानते हैं. भोजपुरी फिल्मों में दर्शक सब से ज्यादा डांस और गाने देखने के लिए आते हैं. वे सब मेरे नाम पर थिएटर तक आते हैं.

मेरा एक आइटम डांस आरा जिला नाम से बना था. वह लोगों को इतना पसंद आया कि मुझे ‘आरा जिला’ ही कहने लगे थे.

बहुत से लोग आइटम डांस को बेहूदा भी कहते हैं. इस पर आप की क्या राय है?

सोचने वाली बात यह है कि जो लोग भोजपुरी फिल्मों के आइटम डांस देखते ही नहीं, वे ही उस को बेहूदा कहते हैं. भोजपुरी आइटम डांस की बुराई करने वाले हिंदी फिल्मों के ‘शीला की जवानी’ और ‘मुन्नी बदनाम’ जैसे दूसरे गानों की तारीफ करते हैं.

भोजपुरी फिल्मों में बैडरूम सीन नहीं होते, चुंबन सीन नहीं होते, हीरोइन बिकिनी नहीं पहनती, फिर भी उस की बुराई होती है.

आप ने गांवदेहांत को बहुत करीब से देखा है. आप वहां की लड़कियों में क्या बदलाव महसूस करती हैं?

पिछले कुछ सालों में गांवदेहात की लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ गया है. वे पढ़ने के लिए स्कूल जाने लगी हैं. उन्हें फैशन के बदलाव की पूरी जानकारी होती है. गांवदेहात के बाजारों में आप को फैशन वाले वे सभी कपड़े मिल जाएंगे, जो शहरों में मिलते हैं. कुछ इलाकों में वे लड़कों से ज्यादा तरक्की करने लगी हैं.

आप अपनी कामयाबी का क्रेडिट किसे देंगी?

मैं ने डांस सीखा नहीं है. मेरे डांस कोरियोग्राफर कानू मुखर्जी ही मेरे गुरु हैं. मैं उन को ही अपनी कामयाबी का क्रेडिट देती हूं. इस के बाद घर में मेरी मां का भी बहुत सहयोग रहा है.